Sunday , 17 December 2017
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गांठ चाहे गर्भाशय की हो या शारीर के किसी भी हिस्से में यह नुस्खा जरुर रिजल्ट देगा !!!

शरीर के किसी भी हिस्से में उठने वाली कोई भी गाँठ(Lump)एक असामान्य लक्षण है जिसे गंभीरता से लेना आवश्यक है ये गाँठ पस या टी.बी से लेकर कैंसर तक किसी भी बीमारी की सूचक हो सकती हैं गाँठ रसौली अथवा ठीक नहीं होने वाला छाला व असामान्य आंतरिक या बाह्य रक्तस्राव कैंसर के लक्षण भी हो सकते हैं-

गांठ का घरेलू इलाज क्या है-What is it Home Treatment of Lump

ये भी ज़रूरी नहीं कि शरीर में उठने वाली हर गाँठ ( Lump) कैंसर ही हो अधिकांशतः कैंसर रहित गठानें किसी उपचार योग्य साधारण बीमारी की वजह से ही होती हैं लेकिन फिर भी इस बारे में सावधानी बरतनी चाहिए तथा इस प्रकार की किसी भी गाँठ या रसौली(Tumor)की जाँच अत्यंत आवश्यक है ताकि समय रहते निदान और इलाज शुरू हो सके-

आप अनदेखा न करें(Do not Ignore)

चूँकि लगभग सारी गाँठ ( Lump )या रसौली शुरू से वेदना हीन होती हैं इसलिए अधिकांश व्यक्ति नासमझी या ऑपरेशन के डर से डॉक्टर के पास नहीं जाते है साधारण गाँठ ( Lump )या रसौली भले ही कैंसर की न हों लेकिन इनका भी इलाज आवश्यक होता है। उपचार के अभाव में ये असाध्य रूप ले लेती हैं और परिणाम स्वरूप उनका उपचार लंबा और जटिल हो जाता है।

कैंसर की गठानों का तो शुरुआती अवस्था में इलाज होना और भी ज़रूरी होता है। कैंसर का शुरुआती दौर में ही इलाज हो जाए तो मरीज के पूरी तरह ठीक होने की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं। आपके शरीर मे कहीं पर भी किसी भी किस्म की गाँठ(Lump)हो आप ये घरेलू चिकित्सा अवश्य करें-सफल जरूर होती है। कैंसर मे भी लाभदायक है।

आप ये दो चीज पंसारी या आयुर्वेद दवा की दुकान से ले ले

1- कचनार की छाल( Bauhinia Bark )यदि ताज़ी है तो 25-30 ग्राम अगर सूखी छाल है तो 15 ग्राम लें-

2- गोरखमुंडी( Gorkmundi )-एक चम्मच गोरखमुंडी पिसी हुई लें-

यह दोनों जड़ी बूटी आयुर्वेद दवा बेचने वाले पंसारी से मिल जाती हैं पर यदि कचनार की छाल ताजी ले तो अधिक लाभदायक है कचनार ( Bauhinia Purpurea ) का पेड़ हर जगह आसानी से मिल जाता है-अब आप इसकी शाखा की छाल ले और तने की न ले फिर उस शाखा(टहनी)की छाल ले जो एक इंच से दो इंच तक मोटी हो बहुत पतली या मोटी टहनी की छाल न ले-

गोरखमुंडी का पौधा आसानी से नहीं मिलता इसलिए इसे जड़ी बूटी बेचने वाले से खरीदे-

कैसे प्रयोग करे(How to use)-

अगर कचनार की ताजी छाल 25-30 ग्राम(सुखी छाल 15 ग्राम)को मोटा मोटा कूट ले और एक गिलास पानी मे उबाले-जब 2 मिनट उबल जाए तब इसमे एक चम्मच गोरखमुंडी(मोटी कुटी या पीसी हुई)डाले-अब इसे एक मिनट तक उबलने दे फिर छान ले हल्का गरम रह जाए तब पी ले बस ध्यान दे यह कड़वा है परंतु चमत्कारी है गांठ कैसी ही हो,प्रोस्टेट बढ़ी हुई हो जांघ के पास की गांठ हो, काँख की गांठ हो गले के बाहर की गांठ हो, गर्भाशय की गांठ हो, स्त्री पुरुष के स्तनो मे गांठ हो या टॉन्सिल हो, गले मे थायराइड ग्लैण्ड बढ़ गई हो(Goiter)या LIPOMA(फैट की गांठ)हो लाभ जरूर करती है ये कभी भी असफल नहीं होती है-
Upcharऔर प्रयोग
आप अधिक लाभ के लिए दिन मे दो बार ले-इसे लंबे समय तक लेने से ही लाभ होगा-आप 20-25 दिन तक कोई लाभ नहीं होगा निराश होकर बीच मे न छोड़े-

गाँठ को घोलने में कचनार पेड़ की छाल बहुत अच्छा काम करती है और आयुर्वेद में कांचनार गुग्गुल इसी मक़सद के लिये दी जाती है जबकि ऐलोपैथी में ओप्रेशन के सिवाय कोई और चारा नहीं है-

अन्य प्रयोग-

1- आकड़े के दूध में मिट्टी भिगोकर लेप करने से तथा निर्गुण्डी के 20 से 50 मि.ली. काढ़े में 1 से 5 मि.ली अरण्डी का तेल डालकर पीने से लाभ होता है-

2- गेहूँ के आटे में पापड़खार तथा पानी डालकर पुल्टिस बनाकर लगाने से न पकने वाली गाँठ पककर फूट जाती है तथा दर्द कम हो जाता है-
फोड़े फुन्सी(Pimples)होने पर-

अरण्डी के बीजों की गिरी को पीसकर उसकी पुल्टिस बाँधने से अथवा आम की गुठली या नीम या अनार के पत्तों को पानी में पीसकर लगाने से फोड़े-फुन्सी में लाभ होता है-

घाव( Wound )के लिए

एक चुटकी कालेजीरे को मक्खन के साथ निगलने से या 1 से 3 ग्राम त्रिफला चूर्ण का सेवन करने से तथा त्रिफला के पानी से घाव धोने से लाभ होता है-

सुहागे को पीसकर लगाने से रक्त बहना तुरंत बंद होता है तथा घाव शीघ्र भरता है-

फोड़े( Abscesses )से मवाद बहने पर

अरण्डी के तेल में आम के पत्तों की राख मिलाकर लगाने से लाभ होता है।

थूहर के पत्तों पर अरण्डी का तेल लगाकर गर्म करके फोड़े पर उल्टा लगायें। इससे सब मवाद निकल जायेगा। घाव को भरने के लिए दो-तीन दिन सीधा लगायें।

पीठ का फोड़ा होने पर गेहूँ के आटे में नमक तथा पानी डालकर गर्म करके पुल्टिस बनाकर लगाने से फोड़ा पककर फूट जाता है।

गण्डमाला की गाँठ (Scrofulous knots)

गले में दूषित हुआ वात, कफ और मेद गले के पीछे की नसों में रहकर क्रम से धीरे-धीरे अपने-अपने लक्षणों से युक्त ऐसी गाँठें उत्पन्न करते हैं जिन्हें गण्डमाला कहा जाता है। मेद और कफ से बगल, कन्धे, गर्दन, गले एवं जाँघों के मूल में छोटे-छोटे बेर जैसी अथवा बड़े बेर जैसी बहुत-सी गाँठें जो बहुत दिनों में धीरे-धीरे पकती हैं उन गाँठों की हारमाला को गंडमाला कहते हैं और ऐसी गाँठें कंठ पर होने से कंठमाला कही जाती है।

क्रौंच के बीज को घिस कर दो तीन बार लेप करने तथा गोरखमुण्डी के पत्तों का आठ-आठ तोला रस रोज पीने से गण्डमाला(कंठमाला)में लाभ होता है। तथा कफवर्धक पदार्थ न खायें।

काँखफोड़ा (Beside Abscess)

कुचले को पानी में बारीक पीसकर थोड़ा गर्म करके उसका लेप करने से या अरण्डी का तेल लगाने से या गुड़, गुग्गल और राई का चूर्ण समान मात्रा में लेकर, पीसकर, थोड़ा पानी मिलाकर, गर्म करके लगाने से काँखफोड़े में लाभ होता है।

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