Friday , 15 December 2017
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Gastric और Duodenal Ulcer के रोगियों के लिए बेहद रामबाण है मुलहठी का ये प्रयोग.

कैसा भी हो अलसर – मुलहठी कर देगी बेअसर – अलसर में दवाओं से भी जल्दी असर करेगी मुलहठी – जानिए इसके उपयोग के तरीके और सावधानियां – Ulcer और Acidity में बेहद रामबाण है मुलहठी – देती है तुरंत राहत.

आज हम आपसे अलसर और एसिडिटी के विषय में बेहद सरल और प्रभावी उपयोग बताने जा रहें हैं. जिन लोगों को अलसर हो चूका है, वो लोग और जिनको हमेशा एसिडिटी रहती है और वो उस से बचना चाहते हैं तो वो ये प्रयोग ज़रूर करें. आइये अब जानते हैं इस प्रयोग को.

Ulcer और Acidity में आज से ही मुलहठी लेना शुरू करें – ये प्रयोग आपको बचाएगा पेट के कैंसर से

अलसर एक भयंकर अवस्था है जो आगे चल कर कैंसर भी बन सकती है, अलसर मुख्यतः अपने पेट की कोशिकाओं के Defense mechanism में कमी होने के कारण और HCL (Hydro chloric Acid) की मात्रा अत्यधित स्त्रावित होने के कारण होता है. यह मुख्यतः दो प्रकार का होता है, एक होता है Gastric Ulcer और दूसरा होता है duodenal ulcer.

Gastric Ulcer पेट में होता है और duodenal ulcer छोटी आंत में होता है.

अलसर होने के ऐसे कारण जो शायद आप नहीं जानते होंगे.

अगर कोई समय पर कोई व्यक्ति खाना नहीं खाता, तो शरीर से एसिड तो समय पर निकलता ही है, वो एसिड को अगर समय पर खाना मिले तो वो खाने को छोटे छोटे टुकड़ों में बदल कर भोजन के पाचन में सहयोग देता है और अगर उस समय खाना नहीं मिलता तो वो पेट की कोशिकाओं को ही खाना शुरू कर देता है. जिस कारण वो नष्ट होने लगती हैं और ये अलसर का रूप धारण कर लेती है. इसी कारण से आयुर्वेद में भोजन करने के सही समय के बारे में विस्तार से बताया गया है के किस किस समय पर सुबह दोपहर और शाम को खाना खा लेना चाहिए.

जो लोग काफी लम्बे समय तक दर्द निवारक दवाएं और स्टेरॉयड खातें हैं तो उनमे अलसर होने के चांस बहुत ज्यादा होते हैं, इसीलिए दर्द नाशक दवाएं और स्टेरॉयड कभी भी खाली पेट नहीं लेनी चाहिए.

जो लोग स्मोकिंग करते हैं, पान तम्बाकू खाते हैं, शराब पीते हैं, उनमे अलसर होने के ज्यादा चांस पाए जाते हैं, क्यूंकि ये चीजें एसिडिटी को बढ़ाती हैं.

तनाव में रहने से शरीर में अत्यधिक एसिड निकलते हैं जो भी अलसर का मुख्य कारण बनते हैं.

यही उपरोक्त कारण एसिडिटी के हैं और एसिडिटी लम्बे समय तक रहने से अलसर बन जाती है.

अलसर मुख्या रूप से Helicobactor Pylori नामक बैक्टीरिया से होता है, जो आमाशय के कैंसर का एक मुख्या कारण है.

अब आइये जानते हैं इस रोग का एक बेहद सरल सा इलाज.

जिन लोगों को एसिडिटी ज्यादा रहती हो या जिन लोगों को अलसर भी हो गया है, वो मुलहठी का नित्य सेवन करें. इसके लिए आप मुलहठी को कूट पीस कर इसका चूर्ण कर लीजिये. अब एक चम्मच मुलहठी को 2 गिलास पानी में गर्म करें, जब एक गिलास पानी रह जाए तो इसको सुहाता सुहाता पी लें. या 2 ग्राम मुलहठी को सुबह शाम घड़े के पानी के साथ निगल लें. और या फिर अगर ऐसा भी नहीं कर सकते तो मुलहठी का छोटा टुकड़ा जेब में रखें इसको चूसते रहें दिन भर.

यह मुंह के छालों में भी बहुत उपयोगी है. इसके लिए इसको मुंह में रखकर चबाते रहें.

कैसे करती है मुलहठी काम.

मुलहठी के अन्दर Glycyrhizin नामक केमिकल पाया जाता है, जो अपनी आमाशय की अन्दर की कोशिकाओं के ऊपर एक Protective Cover बना देता है. इसके कारण निकलने वाले HCL एसिड का डायरेक्ट संपर्क कोशिकाओं से नहीं हो पाता और कोशिकाओं का Defense mechanism मज़बूत हो जाता है. जो लोग लम्बे समय से दर्द निवारक दवाएं या स्टेरॉयड खा रहें हैं उस से जो Gastric Ulcer हो जाता है या फिर उस से बचाव के लिए मुलहठी का ये गुण 100 % फायदा करता है.

मुलहठी सेवन में सावधानी.

3 प्रकार के रोगी अर्थात जिनको हार्ट लीवर और किडनी से सम्बंधित गंभीर समस्या हो तो वो फिर इसके सेवन से बचें, छोटे मोटे रोगों में इतनी चिंता की बात नहीं. मगर जिनको ऊपर बताये गए तीनो रोगों में से कोई गंभीर समस्या हो वो इसका सेवन ना करे.

जो लोग एंटी एसिड दवाएं जैसे Gelucil, diagene इत्यादि दवाएं ले रहें हैं वो भी इसका सेवन कर सकते हैं. इस के सेवन से इन दवाओं का असर बढेगा.

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