Monday , 23 October 2017
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जानिए किस बर्तन में खाना बनाना फायदेमंद है और किन बर्तनो में छुपा सेहत का खजाना

इन बर्तनो में छुपा सेहत का खजाना – Kis bartan me khana banana chahiye

सेहतमंद खाना पकाने के लिए आप तेल-मसालों पर तो पूरा ध्यान देते  हैं, पर क्या आप खाना पकाने के लिए बर्तनों के चुनाव पर भी ध्यान देते हैं? अगर आपका जवाब न है तो आज से ही इस बात पर भी ध्यान देना शुरू कर दें। बर्तन कैसे आपको सेहतमंद बना सकते हैं,  आज हम आप को बताते हैं .

खाना पौष्टिक और सेहतमंद हो इसके लिए हम न जाने कितने जतन करते हैं। कम तेल इस्तेमाल से लेकर सब्जियों और दालों को सफाई से धोना, आटा साफ हाथ से गुनना, घर और किचन में साफ-सफाई का खास ख्याल रखना, भोजन की गुणवत्ता, ताजापन, सही मसालों का उपयोग और भी बहुत कुछ हमारी आदत में शुमार हो चुका है। लेकिन एक अहम चीज हम अकसर भूल जाते हैं और वह है हमारे बर्तन। जी हां, भोजन की पौष्टिकता में यह बात भी मायने रखती है कि आखिर उन्हें किस बर्तन में बनाया जा रहा है। आपको शायद मालूम न हो, लेकिन आप जिस धातु के बर्तन में खाना पकाते हैं उसके गुण भोजन में स्वत: ही आ जाते हैं।

डाइटीशियन निशा बंसल के मुताबिक भोजन पकाते समय बर्तनों का मैटीरियल भी खाने के साथ मिक्स हो जाता है। एल्यूमीनियम, तांबा, लोहा, स्टेनलेस स्टील और टेफलोन बर्तन में इस्तेमाल होने वाली आम सामग्री हैं। बेहतर है कि आप अपने घर के लिए कुकिंग मटेरियल चुनते समय कुछ जरूरी बातों का ख्याल रखें और इसके लिए आपको उन बर्तनों के फायदे नुकसान के बारे में जानकारी होना जरूरी है।

हम लोग खाना इसलिए खाते है ताकि हमारे शरीर को जरुरी प्रमाण में पोषक तत्त्व मिले। जो भोजन हम खाते हैं उसमे अपने आप में तो मिनरल्स विटामिन्स प्रोटीन तो होते ही हैं, इनके ये गुण बढ़ाने या घटाने में इनको पकाने वाले बर्तन भी विशेष स्थान रखते हैं। आइये जानते हैं मिटटी और दूसरे बर्तन में बनाया हुआ भोजन किस प्रकार प्रभावी और दुष्प्रभावी होता हैं।

कास्ट लोहे के बर्तन:-

देखने और उठाने में भारी, महंगे और आसानी से न घिसने वाले ये बर्तन खाना पकाने के लिए सबसे सही पात्र माने जाते हैं। शोधकर्ताओं की माने तो लोहे के बर्तन में खाना बनाने से भोजन में आयरन जैसे जरूरी पोषक तत्व बढ़ जाते है।

मिटटी के बर्तन के गुण

इंसान के शरीर को रोज 18 प्रकार के सूक्ष्म पोषक तत्व मिलने चाहिए. मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से पूरे 100 प्रतिशत पोषक तत्व मिलते हैं. और यदि मिट्टी के बर्तन में खाना खाया जाए तो उसका अलग से स्वाद भी आता है. मिटटी के बर्तन में भोजन बनाने से इसका PH भी सही रहता है. जो हमारे शरीर के लिए बहुत उपयोगी है. मिटटी के बर्तन में जो भोजन बनता है उसके पोषक तत्व बाहर नहीं निकलते वो भोजन में ही विद्यमान रहते हैं. और आयुर्वेद के अुनसार खाना पकाते समय उसे हवा का स्पर्श और सूर्य का प्रकाश मिलना जरूरी है. अगर हम ऐसा कर पाए तो ये भोजन ही हमारे लिए अमृत के समान बन जायेगा.

एल्यूमीनियम के बर्तन:-

एल्यूमीनियम के बर्तन हल्के, मजबूत और गुड हीट कंडक्टर होते हैं। साथ ही इनकी कीमत भी ज्यादा नहीं होती। भारतीय रसोई में एल्यूमीनियम के बर्तन सबसे ज्यादा होते हैं। कुकर से लेकर कड़ाहियां आमतौर पर एल्यूमीनियम की ही बनी होती हैं। एल्यूमीनियम बहुत ही मुलायम और प्रतिक्रियाशील धातु होता है। इसलिए नमक या अम्लीय तत्वों के संपर्क में आते ही उसमें घुलने लगता है। खासकर टमाटर उबालने, इमली, सिरका या किसी अम्लीय भोजन के बनाने जैसे कि सांभर आदि के मामले में यह ज्यादा होता है। इससे खाने का स्वाद भी प्रभावित होता है।

खाने में एल्यूमीनियम होना गंभीर चिंता का विषय है। यह खाने से आयरन और कैल्शियम तत्वों को सोख लेता है। यानी यदि पेट में गया तो शरीर से आयरन और कैल्शियम सोखना शुरू कर देता है। इससे हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। कुछ अल्जाइमर (याद्दाश्त की बीमारी) के मामलों में मस्तिष्क के उत्तकों में भी एल्यूमीनियम के अर्क पाए गए हैं। जिससे यह तो स्पष्ट है कि एल्यूमीनियम के तत्व मानसिक बीमारियों के संभावित कारण भी हो सकते हैं। शरीर में एल्यूमीनियम की मात्रा अधिक हो जाए, तो टीबी और किडनी फेल होने का सबब बन सकता है। यह हमारे लिवर और नर्वस सिस्टम के लिए भी फायदेमंद नहीं होता। शोधकर्ताओं की मानें तो एल्यूमीनियम के बर्तन में चाय, टमाटर प्यूरी, सांभर और चटनी आदि बनाने से बचना चाहिए। इन बर्तनों में खाना जितनी देर तक रहेगा, उसके रसायन भोजन में उतने ही ज्यादा घुलेंगे।

इन बर्तनो में छुपा सेहत का खजाना

तांबा और पीतल के बर्तन:-

कॉपर और पीतल के बर्तन हीट के गुड कंडक्टर होते हैं। इनका इस्तेमाल पुराने जमाने में ज्यादा होता था। ये एसिड और सॉल्ट के साथ प्रक्रिया करते हैं। नेशनल इंस्टीटय़ूट आफ हेल्थ के अनुसार खाने में मौजूद ऑर्गेनिक एसिड, बर्तनों के साथ प्रतिक्रिया करके ज्यादा कॉपर पैदा कर सकता है, जो शरीर के लिए नुकसानदेह होता है। इससे फूड प्वॉयजनिंग भी हो सकती है। इसलिए इनकी टिन से कोटिंग जरूरी है। जिसे कलई भी कहते हैं।

स्टेनलेस स्टील बर्तन:-

स्टेनलेस स्टील के बर्तन अच्छे, सुरक्षित और किफायती विकल्प हैं। इन्हें साफ करना भी बहुत आसान है। स्टेनलेस स्टील एक मिश्रित धातु है, जो लोहे में कार्बन, क्रोमियम और निकल मिलाकर बनाई जाती है। इस धातु में न तो लोहे की तरह जंग लगता है और न ही पीतल की तरह यह अम्ल आदि से प्रतिक्रिया करती है। इसकी सिर्फ एक कमी है कि इससे बने बर्तन जल्द गर्म हो जाते हैं। इसलिए इन्हें खरीदते वक्त ऐसे बर्तन चुनें जिनके नीचे कॉपर की लेयर लगी हो। लेकिन इसे साफ करते समय सावधानी बरती जानी चाहिए क्योंकि इसकी सतह पर खरोंच आने से क्रोमियम और निकल निकलता है।

नॉन-स्टिक बर्तन:-

नॉन-स्टिक बर्तनों की सबसे खास बात यह है कि इनमें तेल की बहुत कम मात्रा या न डालो तो भी खाना पढिया पकता है। नॉन-स्टिकी होने की वजह से इनमें खाना चिपकता भी नहीं। लेकिन नॉन-स्टिक बर्तनों को बहुत ज्यादा गर्म करने या इनकी सतह पर खरोंच आने से कुछ खतरनाक रसायन निकलते हैं। इसलिए विशेषज्ञ हमेशा इन बर्तनों को बहुत ज्यादा गर्म करने या जलते गैस पर छोड़ने की सलाह नहीं देते हैं।

 

3 comments

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  2. Beni Gopal Mundara

    Dear Sir.

    Can we use Silver utensils to cook or to eat.it is hygienic or not . please reply.
    Beni Gopal Mundara

  3. sir,
    i live in delhi
    May to Sep. months every year due to heat i feel itching in my belt area in the evening in office after seating for 5-6 hours.
    one cetrizen tablet helps me for two days .
    if i dont take cetrizern tablet then 2nd day anywhere in the body (particularly on chics , belt area, or penis ) it will swell and then i have to take cetrizern tablet.

    For last 18 years i am taking triphala (1:2:4 ratio & for last 3 years with the ratio of 1:2:3) in the morning with 1 liter water at 4 clock and by 7 am stomach is clear as earlier i used to have constipation.
    I can not eat any sour thing like tomato, lemon, Awla etc.
    I am vegetarian and love taking milk particularly at night. now a days amul toned milk one kg daily.

    please help me.

    मैं दिल्ली में रहता हूँ
    गर्मी के कारण हर साल मई से सितंबर महीने तक मैं 5-6 घंटे बैठने के बाद शाम को अपने बेल्ट क्षेत्र में खुजली महसूस करता हूं।
    एक cetrizen गोली मुझे दो दिनों के लिए मदद करता है
    अगर मैं सैट्रिज़र्नल टैबलेट न ले लेता तो दूसरे दिन शरीर में कहीं भी (विशेषकर चिक्स, बेल्ट क्षेत्र या लिंग पर) यह तेज हो जाएगा और फिर मुझे सैटरिजर्न टैबलेट लेना होगा।

    पिछले 18 सालों से मैं त्रिकोणा (1: 2: 4 अनुपात और 1: 2: 3 अनुपात के साथ पिछले 3 वर्षों के लिए) सुबह 1 लीटर पानी के साथ 4 घंटों में और 7 बजे पेट ले रहा हूं। कब्ज करने के लिए इस्तेमाल किया
    मैं टमाटर, नींबू, आवा इत्यादि जैसे कोई खट्टा चीज नहीं खा सकता।
    मैं शाकाहारी हूं और खासकर रात में दूध लेना पसंद करता हूं। अब एक दिन अमूल टोंड दूध एक किलोग्राम दैनिक है।

    क्रिप्या मेरि सहायता करे।

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