Tuesday , 21 November 2017
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संभव है कैंसर का इलाज इन घरेलु औषधियों से – शेयर करना मत भूलें

कैंसर जो आज के समय में बहुत भयंकर रोग हो चूका है, इतने लोग आंतकवादी हमलों में नहीं मरते जितने लोग हर रोज़ कैंसर से मर जाते हैं. अतः ये बहुत ही गंभीर समस्या है. एक आंकड़े के अनुसार कुल मिला कर 12 प्रतिशत मौते सीधे सीधे कैंसर की वजह से हो जाती हैं.

ऐसे में आयुर्वेद और प्राकृतिक इलाज की पद्धति से ना सिर्फ कैंसर की ग्रोथ की रोका जा सकता है जबकि उसको जड़ से ख़त्म किया जा सकता है. वो भी बगैर किसी साइड इफ़ेक्ट के. अनेकों लोगों ने ये पद्धति अपना कर अपना जीवन बचाया है. आप भी इसको अपनाकर अपना जीवन बचा सकते हैं.

तो आज हम ऐसी ही कुछ घरेलु औषधियों पर चर्चा करेंगे जिनको आप अपने नियमित दिनचर्या में शामिल कर के इस से बाख सकते हैं और अगर इस रोग से पीड़ित हैं तो इस का घर पर ही सफल इलाज कर सकते हैं.

कैंसर किलर : – हल्दी – गौ मूत्र – पुनर्नवा ।

हल्दी में एक तत्व पाया जाता हैं जिसको करक्यूमिन कहा जाता हैं जो कैंसर को रोकने में रामबाण हैं। अगर आपको कैंसर का डर हैं या इस की शुरुवात भी हो गयी हैं तो आप घबराइये नहीं आप निरंतर हल्दी का सेवन अपने भोजन में करे।
90 % मरीज कैंसर से नहीं मरते बल्कि उसके इलाज से मर जाते हैं ये एक आश्चर्यजनक तथ्य हैं। अगर किसी मरीज ने अपना कीमो करवाना शुरू कर दिया हैं तो फिर उसका नार्मल होना बहुत मुश्किल हो जाता हैं।

ऐसे में आप भारतीय गौ मूत्र, हल्दी और पुनर्नवा को मिला कर रोगी को दीजिये. 1 कप गौ मूत्र में एक चम्मच हल्दी और आधा चम्मच पुनर्नवा मिला कर धीमी आंच पर गर्म करें. जब इसमें उबाल आ जाए तो आप इसको छान कर घूँट घूँट कर पी लीजिये. यह कैंसर के लिए बहुत ही अच्छी औषिधि है.

कैंसर के घाव सही करने के लिए – हल्दी – गेंदे के फूल – गौ मूत्र

देशी गाय का मूत्र लीजिये (सूती के आठ परत कपड़ो में छान लीजिये ) , हल्दी लीजिये और गेंदे के फूल लीजिये । गेंदे के फुल की पीला या नारंगी पंखरियाँ निकलना है, फिर उसमे हल्दी डालकर गाय मूत्र डालकर उसकी चटनी बनानी है।

अब चोट का आकार कितना बढ़ा है उसकी साइज़ के हिसाब से गेंदे के फुल की संख्या तय होगी, माने चोट छोटे एरिया में है तो एक फुल, काफी है चोट बड़ी है तो दो, तीन,चार अंदाज़े से लेना है। इसकी चटनी बनाके इस चटनी को लगाना है जहाँ पर भी बाहर से खुली हुई चोट है जिससे खून निकल जुका है और ठीक नही हो रहा। कितनी भी दावा खा रहे है पर ठीक नही हो रहा, ठीक न होने का एक कारण तो है डाईबेटिस दूसरा कोई जैनेटिक कारण भी हो सकते है।
इसको दिन में कम से कम दो बार लगाना है जैसे सुबह लगाके उसके ऊपर रुई पट्टी बांध दीजिये ताकि उसका असर बॉडी पे रहे; और शाम को जब दुबारा लगायेंगे तो पहले वाला धोना पड़ेगा ! इसको गोमूत्र से ही धोना है डेटोल जैसो का प्रयोग मत करिए, गाय के मूत्र को डेटोल की तरह प्रयोग करे। धोने के बाद फिर से चटनी लगा दे। फिर अगले दिन सुबह कर दीजिये।

यह इतना प्रभावशाली है इतना प्रभावशाली है के आप सोच नही सकते देखेंगे तो चमत्कार जैसा लगेगा।

 

कैंसर के लिए पपीते के पत्ते.

पपीते के पत्तों के अन्दर Papain Enzyme पाया जाता है जो कैंसर कोशिकाओं के ऊपर उपस्थित प्रोटीन कोटिंग को नष्ट कर देता है.जिससे कैंसर कोशिकाए हमारे इम्यून सिस्टम के सीधे संपर्क में आ जाती है और धोरे धीरे कैंसर की कोशिकाए नष्ट होना शुरू हो जाती है

आप पपीता के पत्तो को सुखाकर उसका पाउडर बना ले इस पाउडर को दो  गिलास पानी में एक चम्मच डालकर अच्छी तरह गर्म करें जब ये एक चोथाई रह जाये  तो इसका सेवन सुबह शाम करे, अन्यथा आप इसका रस भी निरंतर सेवन कर सकते हैं.

अंगूर से कैंसर का इलाज

अंगूर के बीजो में एक विशेष प्रकार का एंटीऑक्सीडेंट Resveratrol पाया जाता है जो कैंसर कोशिकाओ को खत्म कर सकता है.ये विशेष प्रकार से ब्लड कैंसर में काफी प्रभावी होता है एक लेबोरेटरी में हुए शोध में पता लगा है की अंगूर के बीज 24 घंटे में लगभग 76% ब्लड कैंसर की कोशिकाओ को नष्ट कर सकता है तो कैंसर रोगी अंगूर का रस जरुर पिए

तुलसी से कैंसर का इलाज

कैंसर रोगियों को सुबह खाली पेट 21 पत्ते तुलसी के चटनी बना कर रोजाना दीजिये, इनको आप सदाबहार के पत्तों के साथ भी मिक्स कर के दे सकते हैं.

सदाबहार से कैंसर का इलाज

सदाबहार जिसको बारामासी भी कहते है के पत्तो में vincristine और vinblastine नमक रसायन पाए जाते है जो कैंसर कोशिकाओ को नष्ट कर सकते है इसलिए कैंसर के मरीजो को सदाबहार के 11 पत्तो की चटनी बनाकर सुबह शाम जरुर सेवन  करवाइए

बादाम से कैंसर का इलाज

बादाम में विटामिन बी 17 पाया जाता है जो कैंसर कोशिकाओ को नष्ट कर सकता है तो कैंसर रोगियों को दिन में 5 से 10 बादाम का सेवन जरुर करना चाइये

पत्ता गोभी से कैंसर का इलाज

पत्ता गोभी में पाए जाने वाले flavanoid और एंटीऑक्सीडेंट भी कैंसर कोशिकाओ की प्रगति को कम कर कैंसर कोशिकाओ को नष्ट कर सकते है आप पतागोभी को खमीर कर इस्तेमाल करें

नीम्बू से कैंसर का इलाज

नींबू में लगभग 22 प्रकार के anticancer रसायन पाए जाते है जो कैंसर किशिकाओ को नष्ट कर  सकते है. ऐसे में इसको सीधे जूस ना निकाल कर इसको छिलके के सहित पहले फ्रीज कर दीजिये, जब ये बिलकुल बर्फ जैसा जम जाए तो इसको कद्दूकस करके पानी में डालकर पी लीजिये. छिलके सहित ही पीना है ये.

अलसी से कैंसर का इलाज

अलसी में Lignan, Omega 3 fatty acid पाया जाता है जो कैंसर कोशिकाओं की ग्रोथ को रोकने में काफी उपयोगी है, अलसी को तुरंत कूट पीसकर दही में मिलाकर इसका सेवन करें, ध्यान रहे के अलसी को कूट कर नहीं रखना है, दही में मिलाते समय ही इसको कूट पीसना है.

मीठा सोडा – बेकिंग सोडा से कैंसर का इलाज

मीठे सोडे में Alkaline property होने की वजह से यह शरीर में एसिड के स्तर को कम करके Alkaline को बढाता है जिस से कैंसर की कोशिकाओं की ग्रोथ रुक जाती है. एसिडिक माहौल में ही कैंसर की ग्रोथ होती है और ये इसके विपरीत शरीर को एल्कलाइन कर के इससे बचाता है.

पनीर और अलसी का तेल

देसी गाय के दूध को फाड़ कर पनीर कर लीजिये, 100 ग्राम पनीर में 10 ग्राम अलसी का तेल मिला कर दोनों को एक जान कर लीजिये, तेल दिखना नहीं चाहिए, पूरा पनीर में मिक्स कर लीजिये, और इसको सुबह नाश्ते में लेना चाहिए. यह कैंसर रोगियों के लिए अति विशेष डाइट है जो कैंसर को ख़त्म करने में बहुत सहायक है.

अश्वगंधा से कैंसर का इलाज

कैंसर के वो रोगीं जिनको कमजोरी, उलटी, उबाक, दर्द, थकान इत्यादि हो उनको हर रोज़ 5 से 10 ग्राम अश्वगंधा का सेवन करना चाहिए.

गाजर के रस से कैंसर का इलाज

कैंसर के रोगी को गाजर के मौसम में गाजर का रस ज़रूर पिलायें. इसमें बीटा केरोटिन पाया जाता है जो के कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करता है.

कैंसर रोगियों की विशेष चाय

1 गिलास पानी में 5 ग्राम अदरक कूट कर, इसमें 1 ग्राम दालचीनी, काली मिर्च, लौंग इत्यादि मिला कर इसको चाय की तरह उबालें जब यह आधा रह जाए तो इसको छान कर पी लीजिये.

नोट – कैंसर रोगियों को विशेष कर चाय, चीनी और गेंहू से परहेज करवाना चाहिए, उनको भोजन में जूस, फ्रूट, उबली हुयी सब्जियां और सूखे मेवे ही देने चाहिए. ऐसा 45 दिन तक करने के बाद में अपनी रिपोर्ट करवाएं.

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