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Tuesday , 25 July 2017
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जामुन की गुठली है शुगर की बीमारी के लिए बाहुबली की तलवार

सिर्फ जामुन ही काफी है आपको शुगर से छुटकारा दिलाने के लिए – डायबिटीज में है रामबाण

jamun ki guthli se sugar ka ilaj

जामुन की गुठली शुगर को कण्ट्रोल करने के लिए बेहद रामबाण है. इसमें ऐसे केमिकल पाए जाते हैं जो के शुगर को सही करने में बेहद अहम् हैं. आज इसी विषय पर चर्चा करेंगे और बताएँगे श्री बलबीर शेखावत जी. आइये जानते हैं.

जामुन सामान्य तौर पर भारत में पाया जाने वाला बहुत ही सुंदर पेड़ है, इसका वैज्ञानिक नाम Eugenia Jambolana और Syzygium Cumini है जो Myrtaceae परिवार से सम्बंधित है.

इसके common नाम इस प्रकार है.

  • जामुन
  • Java Pulp
  • Black Plum
  • Jambul
  • Indian Black Berry

ये भारत में आम तौर पर कहीं भी मिल जाता है. ये मैदानी और पहाड़ी दोनों ही इलाको में मिल जाता है. आज हम इसके फल की गुठली के एंटी डायबिटिक प्रभाव का विश्लेषण करेंगे के इसमें ऐसे कौन से रसायन हैं के जिस कारण से इसमें ये एंटी डायबिटिक गुण पाया जाता है और वो किस प्रकार से काम करता है. और कैसे ग्लूकोस के लेवल को नियंत्रित करते हैं.

जामुन के बीजों का केमिकल विश्लेषण

जामुन की गुठली में Jambosine पाया जाता है ये एक alkaloid है, इसके साथ इसमें jamboline or antillin नामक Glycoside पाया जाता है. इसके अलावा इसमें Gallic Acid और Ellagic Acid पाए जाते हैं. इसमें कुछ Flavonoid भी पाए जाते हैं, जैसे Quercetin, Myrecetin, इसमें जो मिनरल पाए जाते हैं उनमे विशेष हैं Zinc, Chromium, Vanadium, Potassium and Sodium.

अभी हम बात करेंगे इसके एंटी डायबिटिक इफ़ेक्ट की.

इसमें जो एंटी डायबिटिक इफ़ेक्ट पाया जाता है वो इसमें पाए जाने वाले jamboline or antillin, और इसमें पाए जाने वाले एलिमेंट Chromium, Vanadium की वजह से होता है.

आइये जाने कैसे करती है जामुन की गुठली काम.

Working of Jambolin or Antillin

ये Alpha-Glucosidase inhibitor है जिसका मतलब होता है जो भी कार्बोहायड्रेट हम खाते हैं, उसको ये Alpha-Glucosidase enzyme जो के छोटी आंत में पाया जाता है वो कार्बोहायड्रेट को ग्लूकोस में तोड़ देते हैं. और वो ग्लूकोस छोटी आंत से अवशोषित होकर हमारे रक्त में चला जाता है. और Jambolin इस Enzyme के कार्य को ब्लाक कर देता है. जिससे स्टार्च या कार्बोहायड्रेट को Alpha-Glucosidase ग्लूकोस में नहीं बदल पाते.

Working Of Chromium and Vanadium

जामुन की गुठली में पाए जाने वाले एलिमेंट Chromium और Vanadium इन्सुलिन रेसिस्टेंट को कम करते हैं, ये रक्त से ग्लूकोस को कोशिका के अन्दर ले जाने का काम करते हैं जिससे कोशिका इस ग्लूकोस को उर्जा के उत्पादन में इस्तेमाल कर लेती है और रक्त में ग्लूकोस की मात्रा कम हो जाती है.

जामुन की गुठली को पाउडर बनाने की विधि.

इसके दो तरीके है, पहला है धुप में सुखा कर इसका चूर्ण करना – गुठलियों को एकत्रित करके इनको अच्छे से धुलाई कर लीजिये, साफ़ करने के बाद इसको एक सप्ताह तक सूर्य की धुप में सुखाएं, सूख जाने के बाद आप इसको पहले छोटे छोटे टुकडो में कूट कर फिर इसके किसी यंत्र के साथ या इमाम दस्ते में कूटकर इसका बिलकुल बारीक कपडछान पाउडर कर लीजिये. ये जितना बारीक होगा उतना अधिक प्रभावशाली होगा.

इसका दूसरा तरीका है जामुन की ताज़ा गुठली को धुलाई कर के किसी कडाही में डालकर पहले भून लीजिये, फिर इसको कूट कर कपड छान पाउडर कर लीजिये.

उपरोक्त दोनों तरीक बेस्ट हैं, आप जो भी इस्तेमाल करना चाहें, वो इस्तेमाल कर सकते हैं.

जामुन की गुठली के चूर्ण को सेवन की विधि.

इस चूर्ण को एक चम्मच सुबह खाली पेट खाना खाने के एक घंटे पहले लीजिये. मात्रा लगभग ३ से 6 ग्राम.

अनुभव

ऐसे रोगी जिनको तरह तरह के उपचार देने के बाद भी शुगर में कोई आराम नहीं आ रहा था तो उनको सिर्फ यही दिया, और मात्र 15 से 30 दिन में उसकी शुगर बिलकुल कण्ट्रोल हो गयी.

बेचें जामुन की गुठलियाँ.

अगर आप जामुन की गुठलियाँ बेचना चाहते हैं तो इनको अच्छे से धुलाई कर के आप अपने नजदीकी पंसारी को या हमको भी दे सकते हैं.

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