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Thursday , 27 July 2017
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Heart Disease और Diabetes से Kidney Failure होने से बचा सकती है दालचीनी

किडनी की कोई भी गंभीर समस्या होने के लिए 3 मुख्य risk factor रहते हैं, अगर ऐसी कोई दवा हो जो इन फैक्टर को कम करे और किडनी को भी Active करे तो उस दवा से बेहतर किडनी रोगियों के लिए कुछ नहीं हो सकता. इसलिए अपनी चल रही दवाओ के साथ इसका सेवन ज़रूर करें. इस से आपको बेहतर परिणाम मिलेंगे. आज बता रहें हैं श्री बलबीर शेखावत जी Senior Pharmacologist Sikar Rajasthan.

kidney disease due to Heart diseases

जिनमे मुख्य है blood pressure का बढना, रक्त में कोलेस्ट्रॉल के मात्रा बढना, रक्त में clot बनना आदि. इनके कारण किडनी में रक्त का संचार सही ढंग से नहीं हो पाताम, जिससे रक्त की filtration सही तरीके से नहीं हो पाती जिस कारण किडनी में कई प्रकार की समस्या हो जाती है. जैसे Acute kidney disease, Chronic Kidney disease, Glomerulonephritis Etc. Www.OnlyAyurved.com

Kidney Disease due to Diabetes :

इस समस्या में रक्त में ग्लूकोस की मात्रा ज्यादा हो जाती है. जिससे kidney पर एक्स्ट्रा ग्लूकोस को फ़िल्टर करने का दबाव बढ़ जाता है जिससे kidney का फिल्ट्रेशन mechanism disturbed हो जाता है जिसके कारण kidney कई हानिकारक chemical को फ़िल्टर नहीं कर पाती और जरुरी chemicals को पुनः अवशोषण अर्थात (Re Absorbtion) नहीं कर पाती जिससे वो urine में आना शुरू हो जाते है और हानिकारक chemical रक्त में बढ़ जाते है. जिस से किडनी के कई रोग हो जाते हैं. जैसे Diabetic nephropathy, Chronic Kidney disease, nephrotic syndrome etc. Www.OnlyAyurved.com

Genetic Kidney Disease.

कई बार व्यक्ति को जन्म जात ही किडनी की बीमारी होती है, जैसे उसकी एक किडनी ना होना, या एक किडनी का कम डेवेलोप होना etc.

 

किडनी रोगों में दालचीनी

जिस व्यक्ति को Diabetes और Heart से सम्बंधित रोग होंगे तो उसकी Kidney Failure होने के Chances बहुत अधिक हो जाते हैं. ऐसे में दालचीनी में ऐसे कई गुण पाए जाते है जो इन दोनों risk factor को कम कर देते है जिससे kidney की कोई बड़ी समस्या नहीं हो पाती. तो आइये जाने दालचीनी के ये रासायनिक प्रभाव. Www.OnlyAyurved.com

  • Diuretic – दालचीनी एक diuretic की तरह काम करती है जो kidney से urine निकलने की मात्रा को बढ़ा देती है जिससे urine खुलकर आना शुरू हो जाता है और blood pressure भी कम हो जाता है. इसमें पाए जाने वाला Mannitol एक तरह का Osmotic diuretic है, जिसकी वजह से ये पेशाब निकालने में मदद करती है.
  • Blood pressure : दालचीनी रक्तवाहिनियो को relax करती है जिससे blood pressure कम हो जाता है और kidney में रक्त संचार भी बढ़ जाता है
  • Anti-inflammatory : दालचीनी में cinnamaldehyde नामक रासायन पाया जाता है जो के Nitric Oxide और cox 2 (Cyclo Oxygenase 2) एंजाइम की क्रिया को बंद करके Prostaglandin की उत्पादन को कम कर देती है जिससे सुजन या inflammation खत्म होती है, किडनी में कई बार इन्फेक्शन की वजह से और टोक्सिन की वजह से सूजन आ जाती है, जिसको Nephritis बोलते हैं, इस प्रकार की nephritis में दालचीनी उपरोक्त बताये गए तरीके से काफी प्रभावी है.
  • LDL cholesterol : दालचीनी ldl cholesterol को कम कर देती है जिससे heart diseases होने के चांसेस कम हो जाते है. यदि बैड कोलेस्ट्रॉल का लेवल ज्यादा हो जाए तो वो Renel Artery में जाकर जमा हो जाता है और Plaque बनाना शुरू कर देता है जिस से किडनी के अन्दर ब्लड सर्कुलेशन कम हो जाता है जिससे किडनी की कार्य क्षमता प्रभावित होती है.
  • Diabetis :  Diabetis आजकल kidney की बीमारियों का मुख्य कारण है. दालचीनी में  Cinnammic Aldehyde पाया जाता है जो blood ग्लूकोस लेवल को कम कर देता है. दालचीनी insulin signalling और ग्लूकोस की कोशिका में ट्रांसपोर्ट होने की प्रोसेस को बढाती है, जिस से Blood में glucose का लेवल कम होता है और किडनी पर कम लोड पड़ता है. कई लोगों में भ्रम है के दालचीनी मीठी होती है और ये शुगर को बढ़ाती है, दालचीनी में पाया जाने वाला मीठापन Mannitol की वजह से होता है, जिसको As a sugar free sweetener भोजन में लिया जाता है.
  • Platelet Aggregation : दालचीनी प्लेटलेट aggregation अर्थात क्लोत्तिंग को ब्लॉक कर देते है जिससे heart diaease होने के चान्सेस कम हो जाते है। जिससे किडनी में ब्लड सर्कुलेशन काफी सुधऱ जाता है
  • Anti Bacterial: दालचीनी एक प्रकार की एंटीबैक्टीरियल और antifungal भी है जो किडनी में होने वाले इन्फेक्शन से बचाती है।

Why kidney pateints have high level of creatinine and BUN

हम जानते हैकि kidney का मुख्य कार्य रक्त में जमा waste material को फ़िल्टर करना होता है जिससे शरीर तंदरुस्त रहता है जब kidney ख़राब हो जाती है तो इन waste मटेरियल को फ़िल्टर नहीं कर पाती जिसके कारण Creatinine, BUN (Blood Urea and Nitrogen) और अन्य Waste material की मात्रा रक्त में बढ़ जाती है. जिससे मरीज को शरीर में सुजन, उलटी उबाक, भूख नहीं लगना और शरीर में खारिश हो जाती है. दालचीनी इन सब लक्षणों को कम कर देती है. Www.OnlyAyurved.com

  1. जैसा कि ऊपर बताया गया है कि दालचीनी एक diuretic का काम करती है यदि मरीज को urine आता है तोभी दालचीनी के सेवन से उसकी फिल्ट्रेशन की प्रोसेस बढ़ जाती है जिससे creatinine और BUN भी फ़िल्टर होकर urine में आना शुरू हो जाता है .इसके लिए मरीज दालचीनी के साथ ginseng का सेवन भी कर सकता है. urine सही मात्र में आने के कारण शरीर से सुजन भी कम हो जाती है .
  2. anti inflammatory : kidney कि बीमारी जैसे glomerulonephritis, nephiritis एक प्रकार कि सुजन या inflammation होती है जिससे आगे जाकर गंभीर kidney कि समस्या हो जाती है .दालचीनी में मोजूद cinnamaldehydeसुजन को कम कर देती है जिससे kidney कि बीमारी का प्रोग्रेस रुक जाता है जब kidney में सुजन कम हो जाती है तो creatinine लेवेल भी blood में कम हो जाता है
  3. दालचीनी kidney की बीमारी में होने वाले gastric discomfort जैसे एसिडिटी ,उल्टी उबाक, भूख नहीं लगना आदि को भी कम कर देती है.
  4. दालचीनी Compliment Dependent Allergic Reaction को ब्लाक कर देती है जिस से Allergic Reaction जैसे Itching जैसी व्याधियां शांत होती है.

Dose: आधा से एक चम्मच रोगी की स्थिति को देखते हुए एक गिलास पानी के साथ में या चल रहे काढ़े के साथ में इसको डालकर इसका भी काढ़ा बना कर लीजिये. या फिर अपने डॉक्टर से या जिस से भी आपका इलाज चल रहा हो उनसे संपर्क कर लें.

असली दालचीनी की पहचान.

दालचीनी दो प्रकार की आती है एक तो Chinese दालचीनी आती है जिसको कैसिया दालचीनी कहते हैं. और एक भारतीय दालचीनी आती है जिसको Cinnamon Bark (दालचीनी छाल) कहा जाता है. भारतीय दालचीनी स्वास्थ्य के लिए बढ़िया होती है और यही किडनी रोगों में काम करती है, और chiniese दालचीनी में Coumarin पाए जाते हैं, जो स्वस्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं. ये लीवर और किडनी दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं. किडनी रोगों में आपको सिर्फ भारतीय दालचीनी का ही उपयोग करना है. इसकी पहचान के लिए कुछ टिप्स. Www.OnlyAyurved.com

  • ये स्वाद में पहले तो मीठी लगेगी और इसके बाद ये तीखी लगेगी. 
  • भारतीय दालचीनी की छाल पतली और बेलनकार होती है। जोकि पेंसिल या पेन के चारो तरफ लपेटी जा सकती है। जबकि कैसिया बार्क कठोर और आसानी से नहीं टूटने वाली होती है। 
  • दालचीनी की छाल आसानी से टूट जाती है जबकि कैसिया बार्क में ज्यादा ताकत लगती है। 
  • दालचीनी हल्के भूरे रंग की होती है जबकि कैसिया बार्क गाड़े लाल रंग की होती है। 
  • दालचीनी में तेज़ खुशबू आती है और कैसिया बार्क में हल्की। 
  • कई बार दालचीनी में अमरुद की छाल की मिलावट भी की जाती है, इसकी जांच करने के लिए इसे हाथ पर रगड़ें।अगर आपके हाथ में हल्का रंग आता है तो समझें दालचीनी में कोई मिलावट नहीं।

इस प्रयोग के लिए आप दालचीनी साबुत ही लेकर आयें और परखने के बाद ही इसको उपयोग करें.

आपको हमारी ये पोस्ट कैसी लगी, ज़रूर बताएं. और हाँ अगर आपको कोई भी आयुर्वेदिक औषधि जैसे गोखरू काँटा, दालचीनी, वरुण छाल, गोरखमुंडी, कासनी के बीज, जिनसेंग इत्यादि कोई भी औषिधि चाहिए तो आप जयपुर में इन भाई साब से संपर्क कर सकते हैं. श्रीमान जितेंदर सिंह – 8290706173, इनसे सिर्फ औषिधियों के लिए ही संपर्क करें. Www.OnlyAyurved.com

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