Saturday , 16 December 2017
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ये है भारतीय Ginseng जो किडनी Failure और Dialysis से किसी को भी बचा सकता है

Kidney failure होना  Chronic kidney Diseases अंतिम चरण होता है, मुख्यता kidney फ़ैल होने का कारण Diabetes और High Blood Pressure को माना गया है. इसके इलावा कई प्रकार के Genetic Disorder और किडनी से रिलेटेड बीमारिया जैसे urinary Tract Disorder, Nephrotic syndrome आदि भी आगे जाकर Kidney Failure का मुख्य कारण बनती है. इसके अतिरिक्त Heart attack और रक्तवाहिनियो में अचानक आई सिकुडन भी किडनी फ़ैल होने का कारण बन सकती है

आज हम Only Ayurved में आपको इस प्रकार की प्राकर्तिक ओषधि के बारे में बताने जा रहे है जो न केवल किडनी की बीमारिया होने से रोकती है,बल्कि Chronic Kidney Diseases(CKD) को भी ठीक कर सकती है.

Ayurved में Ashwagandha(Withania Somnifera) या जिसको Indian Ginseng भी कहते है,Ashwagandha में पाए जाने वाले रसायन Withaferin A और Withanolide D इतने अदभुद  है कि ये Ashwagandha  को kidney की बीमारियों रोकने और किडनी को बचाने के लिए एक बहुत ही अच्छे विकल्प  के तोर पर खड़ा करते है.

How Ashwagandha work in Chronic KIdney diseases

Ashwagandha in Diabetec Nephropathy

Diabetes ना केवल किडनी को नुकसान पहुचाती है बल्कि किडनी के फ़िल्टर सिस्टम को भी खराब कर देता है .जिससे Albumin जैसे protien भी पेशाब  में आना शुरू हो जाते है अगर Diabetes का पहले ही पता लग जाये तो किडनी को खराब होने से बचाया जा सकता है अगर Ashwagandha का लगातार सेवन किया जाता है तो ये blood glucose लेवल को कम करता है इसके साथ साथ insulin senstivity को भी बढाता है जिससे रक्त में ग्लूकोस की मात्रा सामान्य हो जाती है .

Ashwagandha lower High Blood Pressure

जब blood pressure बढ़ जाता है तो किडनी की रक्तवाहिनिया धीरे धीरे नष्ट होना शुरू हो जाती है .जिससे किडनी का फिल्टर system गड़बड़ा जाता है जिससे किडनी अतिरिक्त फ्लूइड फ़िल्टर नहीं कर पाती जिससे  BP और बढ़ता जाता है शोध में पता लगा है की Ashwagandha की जड़ का पाउडर दूध के साथ लेने से बढ़ा हुआ BP कम हो जाता है .

Ashwagandha as diuretic

Ashwagandha के सेवन से पेशाब खुलकर लगता है ,जिससे किडनी की फिल्ट्रेशन की प्रकिया सही रहती है और हानिकारक पदार्थ भी शरीर से यूरिन के द्वारा बाहर निकल जाते है जिससे edema (शरीर में पानी भर जाना ) की समस्या भी नहीं रहती है .

Ashwagandha decreases blood cholesterol

Ashwagandha blood में bad cholesterol की मात्रा को कम करता है . जिससे BP सामान्य रहता है और रक्त का सर्कुलेशन बिना रुकावट के होने से किडनी की फिल्ट्रेशन रेट बढ़ जाती है .

Ashwagandha Fight Toxicity

दवाओ की अधिक मात्रा लेने से, वातावरण में ज्यादा टोक्सिन होने से ये हमारे शरीर में जाकर किडनी पर अतिरिक्त दबाव डालते है जिससे Nephrotoxicity होने के चांसेस बढ़ जाते है. जिससे किडनी को नुकसान होता है और हमारे शरीर का इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस गड़बड़ा जाता है Ashwagandha इस प्रकार के toxins को ख़तम करता है

Ashwagandha protect Kidney from Free Radicals

Ashwagandha एक Antioxidant के तरह काम करता है Antibiotic की ज्यादा मात्रा का सेवन करने से उनके साइड इफ़ेक्ट के रूप में toxic फ्री रेडिकल बनते है जो किडनी को बहुत नुकसान पहुचाते है ये फ्री रेडिकल्स किडनी की बीमारियों और किडनी डैमेज होने का मूल कारण है इससे कैंसर भी हो सकता है . Ashwagandha में पाए जाने वाले रसायन इन फ्री रेडिकल्स को बनने से रोकते है और इन फ्री रेडिकल्स को नष्ट भी करते है .Ashwagandha में पाए जाने वाली ये Antioxidant प्रॉपर्टीज किडनी की कोशिकाओ को नष्ट होने से बचाती है.

Ashwagandha repair damaged Nephron

एक शोध के मुताबिक Ashwagandha किडनी की क्रियात्मक इकाई नेफ्रॉन को डैमेज होने से बचाता है. एवं डैमेज नेफ्रॉन को ठीक भी कर सकता है.

Ashwagandha prevent and treat Kidney Cancer

Ashwagandha में पाया जाने वाला रसायन Withaferin A बहुत से कैंसर को रोक सकता है.ये Apoptosis (कैंसर कोशिका को नष्ट करना)

प्रकिया द्वारा कैंसर की कोशिकाओ को नष्ट करता है .

Ashwagandha protect from inflammation and pain

Ashwagandha में पाए जाने वाले प्राकर्तिक स्टेरॉयड कैंसर के दर्द और हर प्रकार की सुजन को कम करते है . किडनी की कुछ बीमारिया  जैसे Nephritis और Glomerulonephritis भी एक प्रकार की सुजन ही है. Ashwagandha इन बीमारियों को होने से रोक सकता है जो आगे जाकर किडनी फ़ैल होने का कारण बन सकती है .

 

Dose

  • जड़ का पाउडर 3 से 5 gram दिन में दो बार
  • लिक्विड में 5 से 10 ml दिन मे दो बार

आपकी बीमारी को आपका वैद्य या डॉक्टर अच्छी तरह समझता है, आप उससे राय जरूर करे. अधिक जानकरी के लिए नीचे दिए गए sources और References पढ़े

Prepared By

Balbir Singh Shekhawat (B. pharma, D. pharma)

Pharmacist at PHC Sikar Rajasthan

Sources and Refrences

  • https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/11116534
  • https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4678649/
  • http://www.nkfi.org/uploads/pdf/Naturopathic_Medicine_and_the_Kidney_Patient.pdf
  • https://www.asn-online.org/education/training/fellows/HFHS_CKD_V6.pdf
  • http://citeseerx.ist.psu.edu/viewdoc/download?doi=10.1.1.847.4282&rep=rep1&type=pdf
  • http://www.krepublishers.com/02-Journals/S-EM/EM-06-0-000-12-Web/EM-06-2-000-12-Abst-PDF/S-EM-06-2-111-12-203-Kushwaha-S/S-EM-06-2-111-12-203-Kushwaha-S-Tt.pdf
  • text book of pharmacognosy ashutoshkar
  • text book of pharmacognosy by kokate, gokhale, purohit

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