Wednesday , 16 August 2017
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दालचीनी के औषधीय प्रयोग

गठिया, दमा, पथरी, दाँत का दर्द, पेट रोग, थकान, गंजेपन, क्षयरोग(टी.बी.), सर्दी, खाँसी, जुकाम, मंदाग्नि, अजीर्ण, उदरशूल. कील-मुँहासे, दंतशूल व दंतकृमि, स्कीन बॉडी चमकदार, वृद्धावस्था, मोटापा, रक्तविकार एवं हृदयरोग, संधिशूल, वेदनायुक्त सूज तथा सिरदर्द, त्वचा विकार, मधुमेह का भी इलाज।

भारत में दालचीनी के वृक्ष हिमालय तथा पश्चिमी तट पर पाये जाते हैं। इस वृक्ष की छाल, दालचीनी के नाम से प्रसिद्ध है। यह रस में तीखी, कड़वी तथा मधुर होती है। उष्ण-तीक्ष्ण होने के कारण दीपन, पाचन और विशेष रूप से कफ का नाश करने वाली है । यह अपने मधुर रस से पित्त का शमन और उष्णवीर्य होने से वात का शमन करती है। अतः त्रिदोषशामक है। दालचीनी की छाल में कई तेल पाए जाते हैं।

दालचीनी सुगंधित, पाचक, उत्तेजक, और बैक्टीरियारोधी है। यह पेट रोग, इंफ्यूएंजा, टाइफाइड, टीबी और कैंसर जैसे रोगों में उपयोगी पाई गई हैं। इस तरह कहा जा सकता है कि दालचीनी सिर्फ गरम मसाला ही नहीं, बल्कि एक औषधि भी है।

सावधानीः दालचीनी उष्ण-तीक्ष्ण तथा रक्त का उत्क्लेश करने वाली है अर्थात् रक्त में पित्त की मात्रा बढ़ानेवाली है। इसके अधिक सेवन से शरीर में गरमी उत्पन्न होती है। अतः गरमी के दिनों में इसका लगातार सेवन न करें। इसके अत्यधिक उपयोग से नपुंसकता आती है।

औषधि-प्रयोगः

मुँह के रोगः यह मुख की शुद्धि तथा दुर्गन्ध का नाश करने वाली है। अजीर्ण अथवा ज्वर के कारण गला सूख गया हो तो इसका एक टुकड़ा मुँह में रखने से प्यास बुझती है तथा उत्तम स्वाद उत्पन्न होता है। इससे मसूढ़े भी मजबूत होते हैं।

दालचीनी और शहद का संगम

दालचीनी और शहद का प्रयोग हमारे यहाँ सदियों से होता रहा है। दालचीनी गरम मसाले का एक घटक है और शहद एक रामबाण रसायन।
दालचीनी और शहद के मिश्रण को सोने पर सुहागा कहा जाता है। ऐसा कौन-सा रोग है, जिसका इलाज इस योग द्वारा नहीं किया जा सकता है! गठिया, दमा, पथरी, दाँत का दर्द, सर्दी-खाँसी, पेट रोग, थकान, यहाँ तक कि गंजेपन का भी इलाज इस मिश्रण के द्वारा किया जा सकता है। आयुर्वेद और यूनानी पद्धति में तो शहद एक शक्तिवर्धक औषधि के रूप में लंबे समय से प्रयुक्त की जा रही है। इसके विभिन्न गुण अब दुनिया भर में किए जा रहे शोधों से उजागर हो रहे हैं।

दंतशूल व दंतकृमिः

इसके तेल में भिगोया हुआ रूई का फाहा दाँत के मूल में रखने से दंतशूल तथा दंतकृमियों का नाश होता है। 5 भाग शहद में इसका एक भाग चूर्ण मिलाकर दाँतों पर लगाने से भी दंतशूल में राहत मिलती है।

स्किन बॉडी को चमकदार और हेल्दी बनाये:

स्कीन के साथ बॉडी को भी चमकदार और हेल्दी बनाने के लिए इन दोनों का उपयोग करना चाहिए।

पेट रोगों में लाभकारी:

दालचीनी और शहद का योग पेट रोगों में भी लाभकारी है। पेट यदि गड़बड़ है तो इसके लेने से पेट दर्द ठीक हो जाता है और पेट के छाले भी खत्म हो जाते हैं। खाने से पहले दो चम्मच शहद पर थोड़ा-सा दालचीनी पावडर बुरककर चाटने से एसिडिटी में राहत मिलती है और खाना अच्छे से पचता है।

पेट के रोगः

1 चम्मच शहद के साथ इसका 1.5 ग्राम (एक चने जितनी मात्रा) चूर्ण लेने से पेट का अलसर मिट जाता है। दालचीनी, इलायची और तेजपत्र को समभाग में लेकर मिश्रण करें। इसका 1 ग्राम चूर्ण 1 चम्मच शहद के साथ लेने से पेट के अनेक विकार जैसे मंदाग्नि, अजीर्ण, उदरशूल आदि में राहत मिलती है।

कील-मुँहासे

सोने से पूर्व इसका 1 चम्मच चूर्ण 3 चम्मच शहद में मिलाकर मुँह की कीलों पर अच्छी तरह से मसलें। सुबह चने का आटा अथवा उबटन लगाकर गरम पानी से चेहरा साफ कर लें। इससे कील-मुँहासे मिटते हैं।

बालों का झड़नाः

दालचीनी का चूर्ण, शहद और गरम ऑलिव्ह तेल 1-1 चम्मच लेकर मिश्रित करें और उसे बालों की जड़ों में धीरे-धीरे मालिश करें। 5 मिनट के बाद सिर को पानी से धो लें। इस प्रयोग से बालों का झड़ना कम होता है।

सर्दी, खाँसी, जुकामः

दालचीनी का 1 ग्राम चूर्ण एवं 1 ग्राम सितोपलादि चूर्ण 1 चम्मच शहद के साथ लेने से सर्दी और खाँसी में तुरंत राहत मिलती है।

क्षयरोग(टी.बी.)-

इसका 1 ग्राम चूर्ण 1 चम्मच शहद में मिलाकर सेवन करने से कफ आसानी से छूटने लगता है एवं खाँसी से राहत मिलती है। दालचीनी का यह सबसे महत्त्वपूर्ण उपयोग है।

वृद्धावस्थाः

बुढ़ापे में रक्तवाहिनियाँ कड़क और रुक्ष होने लगती हैं तथा उनका लचीलापन कम होने लगता है। एक चने जितना दालचीनी का चूर्ण शहद में मिलाकर नियमित सेवन करने से इन लक्षणों से राहत मिलती है। इस प्रयोग से त्वचा पर झुर्रियाँ नहीं पड़तीं, शरीर में स्फूर्ति बढ़ती है और श्रम से जल्दी थकान नहीं आती।

मोटापाः

1.5 ग्राम चूर्ण का काढ़ा बना लें। उसमें 1 चम्मच शहद मिलाकर सुबह खाली पेट तथा सोने से पहले पियें। इससे मेद कम होता है।

रक्तविकार एवं हृदयरोगः

दालचीनी रक्त की शुद्धि करने वाली है। इसका 1 ग्राम चूर्ण 1 ग्राम शहद में मिलाकर सेवन करने से अथवा दूध में मिलाकर पीने से रक्त में उपस्थित कोलेस्ट्रोल की अतिरिक्त मात्रा घटने लगती है। अथवा इसका आधा से एक ग्राम चूर्ण 200 मि.ली. पानी में धीमी आँच पर उबालें। 100 मि.ली. पानी शेष रहने पर उसे छानकर पी लें। इससे भी कोलेस्ट्रोल की अतिरिक्त मात्रा घटती है।

गर्म प्रकृति वाले लोग पानी व दूध मिश्रित कर इसका उपयोग कर सकते हैं। इस प्रयोग से रक्त की शुद्धि होती है एवं हृदय को बल मिलता है।

सामान्य वेदनाः

इसका एक चम्मच (छोटा) चूर्ण 20 ग्राम शहद एवं 40 ग्राम पानी में मिलाकर स्थानिक मालिश करने से वात के कारण होने वाले दर्द से कुछ ही मिनटों में छुटकारा मिलता है।

संधिशूल

इसका एक ग्राम चूर्ण और 2 चम्मच शहद व 1 कप गुनगुने पानी में मिलाकर नित्य सुबह-शाम पीने से संधिशूल में राहत मिलती है।

वेदनायुक्त सूज तथा सिरदर्द

वेदनायुक्त सूज तथा सिरदर्द में इसका चूर्ण गरण पानी में मिलाकर लेप करें।

बिच्छू का दंश

बिच्छू के दंशवाली जगह पर इसका तेल लगाने से दर्द कम होता है।

त्वचा विकारः

दालचीनी का चूर्ण और शहद समभाग में लेकर मिला लें। दाद, खाज तथा खुजलीवाले स्थान पर उसका लेप करने से कुछ ही दिनों में त्वचा के ये विकार मिट जाते हैं।

मधुमेह:

दालचीनी मधुमेह को सन्तुलित करने के लिए एक प्रभावी ओषधि है, इसलिए इसे गरीब आदमी का इंसुलिन भी कहते हैं।

सेवन विधि:-

1 कप पानी में दालचीनी पाउडर को उबालकर, छानकर रोजाना सुबह पियें। इसे कॉफी में भी मिलाकर पी सकते हैं। इसे सेवन करने से मधुमेह में लाभ होगा। साथ ही इस बात का भी ख्याल रखें कि इसको बताई गई अल्प मात्रा में लें, इसे अधिक मात्रा में लेने से हानि हो सकती है।

रोज तीन ग्राम दालचीनी लेने से न केवल रक्त शर्करा की मात्रा कम होती है, बल्कि सही से भूख भी लगती है।
दालचीनी को पीसकर चाय में चुटकी भर मिलाकर रोज दिन में दो तीन बार पीएं। इससे मधुमेह की बीमारी में आराम मिलेगा। इसका ज्यादा सेवन करना उचित नहीं होता, इसलिए रोजाना थोड़ा-थोड़ा हीं सेवन करें।

दालचीनी का सेवन करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें। ऐसे लोग जिनका लीवर कमजोर है उन्हें ज्यादा मात्रा में दालचीनी नहीं खानी चाहिये।

इस गुणकारी घटक का इस्तेमाल घर में साफ सफाई से लेकर मच्छर भगाने सहित ढरों चीजों में भी किया जा सकता है।

एयरफ्रेशनर

एयरफ्रेशनर स्प्रे बोतल में पानी के साथ दालचीनी तेल का कुछ बूंद मिला लें। इससे आपको एक ऐसा एयरफ्रेशनर मिलेगा जो कम खर्चीला होने के साथ-साथ नेचुरल भी होगा।

पतंगे को भगाए

पतंगा भगाने वाले बदबूदार दवाइयों के बजाय आप सुगंधित दालचीनी से बनी चीज का प्रयोग करें। एक मुठ्ठी दालचीनी को लौंग और तेजपत्ता जैसे मसाले के साथ घर को पतंगामुक्त और खूशबूदार भी रख सकते हैं।

चींटी को रखे दूर

क्या चींटियों ने आपके घर पर धावा बोल दिया है? आप दालचीनी का इस्तेमाल कर चीटियों को दूर रख सकते हैं। इसके पाउडर को आप उन जगहों पर छिड़क दें जहां से चीटियां आपके घर में प्रवेश कर रही हैं। चीटियां आपके घर के तरफ आंख उठाकर भी नहीं देखेंगी।

मच्छर के लारवा को मारे

2004 में किए गए एक सर्वे में यह बात सामने आई कि दालचीनी में पाए जाने वाले अवयव मच्छर के लारवा को मारने में सक्षम होते हैं। साथ ही पर्यावरण के नजरिए से भी यह काफी अच्छा होता है। हालांकि आज भी लोग इस बात पर पूरी तरह से यकीन नहीं करते हैं।

कोकटेल, चाय और आफ्टरशेव

एक मुठ्ठी दालचीनी और एक कप वोदका को मिलाकर आप एक मजेदार और शक्तिशाली टिंचर तैयार कर सकते हैं। कोकटेल को थोड़ा और मजेदार बनाने के लिए आप इसमें दालचीनी टिंचर मिला सकते हैं। साथ ही आप दोपहर बाद की चाय का फ्लेवर बढ़ाने के लिए इसमें इस टिंचर के कुछ बूंद मिला सकते हैं। पुरुष इस पेय पदार्थ का एक और तरह से इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें थोड़ा वोदका मिलाकर इसे पतला करके सुगंधित आफ्टरशेव तैयार किया जा सकता है।

माउथवॉश

माउथवॉश उन उत्पादों में से है, जिन्हें हम आसानी से बना सकते हैं। हैरत की बात है कि हम फिर भी इसे खरीदते हैं। दालचीनी के फ्लेवर वाला माउथवॉश बनाने के लिए आप 9 चम्मच दालचीनी को एक कप वोदका में मिला दें। इसे दो हफ्ते तक ऐसे ही रहने दें और फिर कॉफी फिल्टर के जरिए इसे छान लें।

[Read. आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर हींग।]

3 comments

  1. Good very nice

  2. Bhut Ashee Jankriyan He
    Thanks All

  3. Sir , tinnitus Ke liye ayurvedic me kuch ilaj HAI kya?

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