Thursday , 23 November 2017
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धतुरा – धतूरे के आयुर्वेदिक औषिधियाँ उपयोग।

धतुरा – धतूरे के आयुर्वेदिक औषिधियाँ उपयोग।

धतूरा हिन्दू धर्म में शिवजी भगवान पर चढ़ाया जाने वाला अति साधारण सा पौधा हैं। धतूरे के फल, फूल और पत्ते सभी शिवजी पर चढ़ाये जाते हैं। ये धार्मिक कारणों से तो पूजनीय है ही इसके साथ साथ इसका प्रयोग आयुर्वेद में अनेक दवाये बनाने के रूप में भी किया जाता हैं। यह लगभग 1 मीटर तक ऊँचा होता है। यह काला-सफेद दो रंग का होता है। और काले का फूल नीली चित्तियों वाला होता है। आचार्य चरक ने इसे ‘कनक’ और सुश्रुत ने ‘उन्मत्त’ नाम से संबोधित किया है। आयुर्वेद के ग्रथों में इसे विष वर्ग में रखा गया है। अल्प मात्रा में इसके विभिन्न भागों के उपयोग से अनेक रोग ठीक हो जाते हैं।

दमा, शरीर में सूजन, गर्भधारण, मिर्गी, बवासीर और भगन्दर, यौन कमज़ोरी जैसी अनेक बीमारियो में इसका उपयोग किया जाता हैं। आइये जानते हैं किन किन बीमारियो में ये लाभप्रद हैं।

संस्कृत – धतूर, मदन, उन्मत्त, मातुल

हिन्दी – धतूरा, बंगला – धुतुरा

मराठी – धोत्रा, धोधरा, गुजराती – धंतर्रा

अंग्रेजी – धोर्न एप्पल स्ट्रामोनियम।

1. जूएं मिटाने के लिए

आधा लीटर सरसों के तेल में ढाई सौ ग्राम धतूरे के पत्तों का रस निकालकर तथा इतनी ही मात्रा में पत्तियों का कल्क बनाकर धीमी आंच पर पकाकर जब केवल तेल बच जाय तब बोतल में भरकर रख लें। यह जूएं मिटाने के लिए श्रेष्ठ औषधि है।

2. सूजन

यदि शरीर के किसी भी हिस्से में सूजन हो तो बस धतूरे के पत्तों को हल्का गुनगुना कर सूजन वाले स्थान पर बाँध दें निश्चित लाभ मिलेगा।-इसके फल,मूल ,पत्र,त्वक ,काण्ड अर्थात पंचांग का रस निकालकर। तिल के तेल में पका लें,जब केवल तेल बचे तब इसकी मालिश जोड़ों में करें तथा पत्तों को बांध दें, इससे गठिया के कारण होनेवाले जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है।

3. सेक्स पॉवर 

  • धतूरा के बीज को अकरकरा और लौंग के साथ मिलाकर छोटी-छोटी गुटिका बना लें। यह सेक्स पॉवर को बढ़ाता है।
  • धतूरे के बीजों के तेल की मालिश पैर के तलवों पर करने से यह उत्तेजक प्रभाव दर्शाता है। 
  • धतूरा, कपूर, शहद और पारे को बराबर मात्रा में मिलाकर और बारीक पीसकर इसके लेप को लिंग के आगे के भाग (सुपारी) को छोड़कर बाकी भाग पर लेप करने से संभोग शक्ति तेज हो जाती है। 
  • धतूरे की फल को बीच से तरास कर उसमें लौंग रखे फिर कपड मिट्टी कर भूमर में भूने जब भून जावे तब पीस कर उसका उडद बराबर गोलीयाँ बनाये सबेरे साँझ एक -एक गोली खाने से ताप और तिजारी रोग दूर हो जाय और वीर्य का बंधेज होता हैं।

4. कान दर्द

सरसों का तेल 250 मिली ,60 मिलीग्राम गंधक और 500 ग्राम धतूरे के पत्तों का स्वरस इनसबको एक साथ धीमी आंच पर पकाएं। जब तेल बचा रहे तब उसे इक्कठा कर कान में एक या दो बूँद टपका दें। इससे कान दर्द में तुरंत लाभ मिलेगा।

5. ज्वर

बीजों की राख को 125 -250 मिलीग्राम की मात्रा में देने पर ज्वर में भी लाभ मिलता है।

6. गर्भधारण

धतूरे के फलों का चूर्ण 2 .5 ग्राम की मात्रा में बनाकर इसमें आधा चम्मच गाय का घी और शहद मिलकर रोजाना चटाने से स्त्रियों को जल्द गर्भधारण करने में भी मदद मिलती है।

7. दमा

धतूरे के पत्तों का धूँआ दमा शांत करता है।

8. मिर्गी रोग

धतूरे की जड सूंघे तो मिर्गी रोग शाँत हो जाता है।

9. आँख का दुखना

धतूरे के पत्तों का अर्क कान में डालने से आँख का दुखना बंद हो जाता है।

10. बवासीर और भगन्दर

बवासीर और भगन्दर पर धतूरे के पत्ते सेंक कर बाँधे स्त्री के प्रसूती रोग अथवा गठिया रोग होने से धतूरे के बीजों तेल मला जाता है।

11. बालको के रोग

धतूरे के कोमल पत्तो पर तेल चुपडे और आग पर सेंक कर बालक के पेट पर बाँधे इससे बालक की सर्दी दूर हो जाती है। और फोडा पर बाँधने से फोडा अच्छा हो जाता है।

विशेष :- 

ये तो रही इसके औषधीय गुणों की बात लेकिन धतूरा जहर है और अधिक मात्रा में सेवन शरीर में रूखापन ला देता है। मात्रा से अधिक प्रयोग करने पर सिरदर्द ,पागलपन और संज्ञानाश (बेहोशी ) जैसे लक्षण उत्पन्न करता है और मृत्यु का कारण भी बन सकता है।

अत: इसका प्रयोग चिकित्सक के निर्देशन में योग्य वैद्य के परामर्श से सावधानीपूर्वक करें तो बेहतर होगा।

[Read. मीठा नीम – कढीपत्ता के 8 चमत्कारिक फायदे। http://onlyayurved.com/tree/curry-leaves/8-amazing-benefit-of-curry-leaves/]

एक बार में इसके चूर्ण का 50 से 100 मिलिग्राम (1 ग्राम का 10 वां या 20 वां हिस्सा), इसके सत्त की 1 से 3 बूंद तथा ‘धतूरा-सुरा’ की 0.5 से 2 मिलिलीटर मात्रा का ही सेवन करना चाहिए।

 

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