Friday , 26 May 2017
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जमालगोटा कि शान्ति के उपाय, इसके शोधन कि विधि और प्रयोग

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जमालगोटा  विष नहीं होता है किन्तु कभी कभी यह विष जैसा काम करता है।इसे अंग्रेजी में क्रोटन  कहते हैं ।यह दो प्रकार का होता है ।एक को छोटी दंती और  दुसरे को बड़ी दंती कहते हैं ।इसके फल  अरंडी के छोटे बीजो  जैसे  होते  हैं ,जो बहुत ही तेज दस्तावर होते है ।इसे बिना शोधे  सेवन करने से भयानक हानी होती है और ऐसी स्थिति में भयानक वमन और विरेचन दोनों होते हैं ।अतः बिना सोधे  इसका सेवन कदापि  नहीं करना  चाहिए ।इसके फलों के बिच में एक दो परती जीभी सी होती है , उसी से परेशानी होती है । मिन्गियो में  तेल  जैसा पदार्थ होता है ।इसी से वैध लोग शोधकर उस चिकनाई को दूर कर देते हैं । जब जीभी निकल  जाती है और चिकनाई दूर हो जाती है ,तब जमालगोटा सेवन के लायक होता है।इसके प्रयोग और फायदों के बारे में बताने से पहले हम आपको इसके शोधने कि विधि बता रहे हैं।जमालगोटा भारी,चिकना,दस्तावर तथा कफ और पित नाशक होता है।एक वैध ने इसके बारे में लिखा है कि जमालगोटा गर्म,तीक्ष्ण,कफ नाशक,क्लेद्कारक और दस्तावर होता है । जमालगोटे का तेल अत्यंत रेचक होता है।इससे आफरा,उदररोग,संन्यास,शिरोरोग,धनुस्थंभ,ज्वर,उन्माद,अकांग वात रोग,सुजन नष्ट होती है ।इससे खांसी भी नष्ट होती है ।एलोपैथी में इसके का प्रयोग अधिक होता है ।वैधगण जमालगोटे को शोध कर,उचित औषधियों के साथ -एक रति  अनुमान से देते  हैं।इसके द्वारा दस्त करने से उदार रोग और ज्वर आदि  रोग नष्ट होते हैं ।

जमालगोटा कि शोधन विधि

इसके शोधने कि बहुत सारी तरकीबे आयुर्वेदिक शास्त्रों में लिखी हैं किन्तु हम यहाँ आपको दो सरल विधियाँ बता रहें हैं,आइये जाने :-

जमालगोटे के बिच में जो दो परती जीभी -सी होती है उसे निकालकर फैंक दीजिए । तदुपरांत उसे दूध में दोलायंत्र कि विधि से पका लीजिए ।बस जमालगोटा शुद्ध हो जायेगा ।जमालगोटे को ताजे भैंस के गोबर में डालकर 6 घन्टे तक पकाएं । इसके बाद जमालगोटे के छिलके उतारकर भीतर कि जीभी निकालकर फैंक दीजिए । शेष बचे हुए भाग को निम्बू के रस में दो दिन तक घोंटे।इस प्रकार अब जमालगोटा शुद्ध हो जायेगा ।

जमालगोटे कि हानियाँ

जमालगोटे से हानी – इसके ज्यादा मात्रा में सेवन कर लैने से मुंह और गले में बहुत जलन होकर ,बहूत ही दस्त लगते हैं ।मल टूट जाता है ।पीड़ा होती है ।ऐंठन होती है ।आंतो में घाव हो जाते हैं ।खून के दस्त होने लगते हैं और रोगी के पट्ठे खीचने लगते हैं ।

जमालगोटा के शमन के उपाय

जमालगोटे का असर ख़त्म करने के लिए आप यह उपाय अपनाइए जरुर फायदा होगा।धनिया ,मिश्री,और दही -इन तीनो को मिलाकर खाने से जमालगोटा के उपद्रव शांत हो जाते हैं ।यदि कुछ भी ना हो तो रोगी को थोडा सा गर्म पानी पिलाएं ।फ़ौरन दस्त बंध हो जाएंगे ।यदि फिर भी लाभ ना हो तो दो या चार चावल भर अफीम मिलाकर ऊपर से घी मिश्रित दुग्धपान कराए । बिना घी निकाली छाछ सेवन कराने से भी जमालगोटे के उपद्रव शान्त हो जाते हैं ।

जमालगोटा के फायदे Jamalgota(Purging crouton) in Hindi

जमालगोटा दस्तावर, उग्रविराचक, शोथनाशक, कफ नाशक और विषैला है। इसका गलत प्रयोग जान तक ले सकता है। इसका कोई भी उपयोग करने से पहले ऊपर बताई विधि  अनुसार इसका शोधन कर लें ।यह कटु रस औषधि है। कटु रस तीखा होता है और इसमें गर्मी के गुण होते हैं। गर्म गुण के कारण यह शरीर में पित्त बढ़ाता है, कफ को पतला करता है। यह पाचन और अवशोषण को सही करता है। इसमें खून साफ़ करने और त्वचा रोगों में लाभ करने के भी गुण हैं। कटु रस गर्म, हल्का, पसीना लाना वाला, कमजोरी लाने वाला, और प्यास बढ़ाने वाला होता है। यह रस कफ रोगों में बहुत लाभप्रद होता है। पित्त के असंतुलन होने पर कटु रस पदार्थों को सेवन नहीं करना चाहिए।

जमालगोटे के उपयोग

जमालगोटा की झाड़ की जड़, पत्ते, छाल, और बीजों में तीव्र विरेचक drastic purgative गुण होते हैं।इसकी जड़ को नासूर/विस्फोटॅ और कैंसर घावों पर लगाया जाता है।बीज विषैले होते हैं और शक्तिशाली व कठोर विरेचन कराते है।बीजो से निकाला तेल, लेप के रूप में गठिया, सूजन, क्रोनिक ब्रोंकाइटिस और अन्य फेफड़े के रोगों में बाहरी रूप में ही प्रयोग किया जाता है।बीजों और पत्तों को मछलियों के जहर की तरह भी प्रयोग किया जाता है।तेल का प्रयोग मोशन को जल्दी और तेजी से लाने के लिए प्रयोग किया जाता है। The croton oil expressed from the seeds of Croton tiglium is most violent of all cathartics।पुराने कब्ज़ के लिए, विरेचन के लिए जमालगोटे के बीजों का पाउडर प्रयोग किया जाता है। आंतरिक प्रयोग के लिए केवल शुद्ध (शोधित) बीजों का ही प्रयोग किया जाना चाहिए। इसके आंतरिक प्रयोग की मात्रा बहुत कम है।आयुर्वेद में अकेले ही इसका प्रयोग विरेचन के लिए नहीं किया जाता।

औषधीय मात्रा:

शोधित बीजों को 6-12 mg की मात्रा में लिया जा सकता है।तेल को एक बूँद की मात्रा में लिया जा सकता है।

जमालगोटे के विषैले प्रभाव को शांत करने के उपाय

गर्म पानी पियें।मिश्री, धनिया, दही खाने से आराम होता है।बिना घी निकाला छाछ पियें।

सावधनियाँ/ साइड-इफेक्ट्स/ कब प्रयोग न करें Cautions/Side-effects/Contraindications

इसके तेल और बिना शुद्ध किये बीजों का प्रयोग कदापि न करें। इसे गर्भावस्था में कभी प्रयोग न करें।इसका तेल उत्यंत उत्तेजक है। चमड़ी पर लग जाने पर यह फोड़े करता है।मित्रो यह पोस्ट आपको कैसी लगी हमें कमेंट करके जरुर बताइए।इस जानकारी को अपने  मित्रो को  शेयर करके  जरुर बताइए।

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