Tuesday , 18 September 2018
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धरन या नाभिचक्र ठीक करना के लिए- पेट में धरण का इलाज

धरन या नाभिचक्र ठीक करना के लिए
शरीर को रोग मुक्त रखने में नाभिचक्र का विशेष महत्व है। अगर नाभिचक्र ठीक न रहे अर्थात धरन पड़ जाए तो भी कई रोग लग जाते है जैसे गैस, जी मचलना, भूख न लगना, कब्ज या फिर दस्त लग जाना, सुस्ती, थकावट तथा पेट में दर्द इत्यादि। पाचन अंगो में कोई विकार होने, अधिक बोझ उठाने और गैस आदि की लगातार शिकायत रहने से प्राय: नाभिचक्र अपने स्थान से हिल जाता है जिसे आम तोर पर धरण पड़ना कहते है। धरण ठीक न रहने के कारण कई अन्य रोग भी लग जाते है या बड़ जाते है।

धरण अपने स्थान पर है या नही, यह जानने के लिए सुबह बिना खाए-पिए पीठ के बल सीधा लेट जाना चाहिए हाथ बगल में शरीर के साथ सीधे रखे .कोई अन्य व्यक्ति एक धागा लेकर नाभि से छाती की एक तरफ की निपल तक पैमाइश करे, नाभि पर एक हाथ रखे धागा दूसरी तरफ की निपल तक ले जाएँ, अगर दोनों तरफ का नाप एक जैसा है तो नाभिचक्र अपने स्थान पर है, नही तो जिस स्थान पर हिल कर गयी हो वह अंगुलियां रखने से स्पंदन का आभास होगा।

नाभि टलने के कु प्रभाव।

नाभि अर्थात हमारे शरीर की धुरी अर्थात केंद्र। यदि ये खिसक जाए या टल जाए तो सारे शरीर की किर्याएँ अपने मार्ग से विचलित हो जाती हैं। आइये जाने कैसे करे नाभि टलने का इलाज।

नाभि टलने को परखिये।

आमतौर पर पुरुषों की नाभि बाईं ओर तथा स्त्रियों की नाभि दाईं ओर टला करती है।

ऊपर की तरफ

यदि नाभि का स्पंदन ऊपर की तरफ चल रहा है याने छाती की तरफ तो यकृत प्लीहा आमाशय अग्नाशय की क्रिया हीनता होने लगती है ! इससे फेफड़ों-ह्रदय पर गलत प्रभाव होता है। मधुमेह, अस्थमा,ब्रोंकाइटिस -थायराइड मोटापा -वायु विकार घबराहट जैसी बीमारियाँ होने लगती हैं।

नीचे की तरफ

यही नाभि मध्यमा स्तर से खिसककर नीचे अधो अंगों की तरफ चली जाए तो मलाशय-मूत्राशय -गर्भाशय आदि अंगों की क्रिया विकृत हो अतिसार-प्रमेह प्रदर -दुबलापन जैसे कई कष्ट साध्य रोग हो जाते है। फैलोपियन ट्यूब नहीं खुलती और इस कारण स्त्रियाँ गर्भधारण नहीं कर सकतीं। स्त्रियों के उपचार में नाभि को मध्यमा स्तर पर लाया जाये। इससे कई वंध्या स्त्रियाँ भी गर्भधारण योग्य हो जाती है ।

बाईं ओर

बाईं ओर खिसकने से सर्दी-जुकाम, खाँसी,कफजनित रोग जल्दी-जल्दी होते हैं।

दाहिनी ओर

दाहिनी तरफ हटने पर अग्नाशय -यकृत -प्लीहा क्रिया हीनता -पैत्तिक विकार श्लेष्म कला प्रदाह -क्षोभ -जलन छाले एसिडिटी (अम्लपित्त) अपच अफारा हो सकती है।

नाभि टलने पर क्या करे।

नाभि खिसक जाने पर व्यक्ति को हल्का सुपाच्य पथ्य देना चाहिए । नाभि खिसक जाने पर व्यक्ति को मूँगदाल की खिचड़ी के सिवाय कुछ न दें। दिन में एक-दो बार अदरक का 2 से 5 मिलिलीटर रस बराबर शहद मिलाकर पिलाने से लाभ होता है।

नाभि कैसे स्थान पर लाये।

  1. ज़मीन पर दरी या कम्बल बिछा ले। अभी बच्चो के खेलने वाली प्लास्टिक की गेंद ले लीजिये। अब उल्टा लेट जाए और इस गेंद को नाभि के मध्य रख लीजिये। पांच मिनट तक ऐसे ही लेटे रहे। खिसकी हुई नाभि (धरण) सही होगी। फिर धीरे से करवट ले कर उठ जाए, और ओकडू बैठ जाए और एक आंवला का मुरब्बा खा लीजिये या फिर 2 आटे के बिस्कुट खा लीजिये। फिर धीरे धीरे खड़े हो जाए।
  2. कमर के बल लेट जाएं और पादांगुष्ठनासास्पर्शासन कर लें। इसके लिए लेटकर बाएं पैर को घुटने से मोड़कर हाथों से पैर को पकड़ लें व पैर को खींचकर मुंह तक लाएं। सिर उठा लें व पैर का अंगूठा नाक से लगाने का प्रयास करें। जैसे छोटा बच्चा अपना पैर का अंगूठा मुंह में डालता है। कुछ देर इस आसन में रुकें फिर दूसरे पैर से भी यही करें। फिर दोनों पैरों से एक साथ यही अभ्यास कर लें। 3-3 बार करने के बाद नाभि सेट हो जाएगी।
  3. सीधा (चित्त) सुलाकर उसकी नाभि के चारों ओर सूखे आँवले का आटा बनाकर उसमें अदरक का रस मिलाकर बाँध दें एवं उसे दो घण्टे चित्त ही सुलाकर रखें। दिन में दो बार यह प्रयोग करने से नाभि अपने स्थान पर आ जाती है हैं।

 

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दूसरा तरीका :
इसे ठीक करने के लिए , छोटे पैर की टांग को धीरे-२ ऊपर उठायें ६,७,८,९, इंच तक उठायें,फिर धीरे-२ ही नीचे रखकर लम्बा सांस लें ,यही क्रिया दो बार और करें,
ये क्रिया सुबह शाम ख़ाली पेट करनी चाहिए .पैरों को फिर मिलाकर देखें दोनों अंगूठे बराबर दिखेंगे .यानी आपकी नाभि सही जगह पर बैठ गयी है.फिर उठकर २० ग्राम गुड, २० ग्राम सौफ का बनाया चूरन फांक लें पानी से .इससे पुराणी से पुराणी धरण आप खुद महिना दो महीने में ठीक कर सकतें है पेट को कभी भी मसल वाना नहीं चाहिए

भि के टलने पर और दर्द होने पर 20 ग्राम सोंफ, गुड समभाग के साथ मिलाकर प्रात: खाली पेट खायें। अपने स्थान से हटी हुई नाभि ठीक होगी। और भविष्य में नाभि टलने की समस्या नहीं होगी।

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