Tuesday , 21 November 2017
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Moringo के नाम से कंपनियां मूर्ख बना रही हैं जनता को – हो रहा है अरबों का कारोबार

सहजन मोरिंगो क्या एक ही है ? Sahjan Aur moringo kya ek hi hai ?

नमस्कार मित्रो – आज हम आपको एक ऐसी चीज बता रहें हैं जो बड़ी बड़ी कंपनियां आपकी आँखों पर पर्दा डालकर आपको सर्वसुलभ मिलने वाली चीज को हजारों रुपैये किलो के हिसाब से बेच रहीं हैं. इसका कारण यही है के हम लोग अपने आस पास मिलने वाली जड़ी बूटियों, पेड़ पौधों के औषधीय गुणों  को ना जानते हुए उनको गौण समझ कर इसका तिरस्कार कर देते हैं और वही चीज जब बड़ी बड़ी कंपनियां हमको अच्छे से पैकेट में बंद करके उसका इंग्लिश नाम बता कर हमको महंगे दामो में बेचती हैं तो हमको लगता है के वाह ये है कोई चीज…

यहाँ हम इस पोस्ट में मोरिंगो सहजन को एक ही कह कर संबोधित करेंगे.

तो आइये अपनी संस्कृति अपने पेड़ पौधों को पहचाने और इनके गुणों को जानिए. ऐसा ही एक पौधा जिसकी हम चर्चा करने जा रहें हैं वो है सहजन जिसका इंग्लिश नाम है Moringa Pterygosperma Gaertn. अभी इसको Drum Stick Tree भी कहते हैं. इस पेड़ के बारे में एक बात विशेष है के ये Multi Vitamin का भण्डार है. इसमें पाए जाने वाले गुण इस पौधे को धरती पर संजीवनी बनाते हैं. और यही कारण है के कुछ देशी और विदेशी कंपनियां इसका धड़ल्ले से व्यापार कर रहीं हैं. इसका रासायनिक संगठन देखने के बाद अनेक पढ़े लिखे लोग आश्चर्यचकित होते हैं. आपको भी बता देते हैं इसका रासायनिक संगठन.

इस पेड़ के विभिन्न अंगो से हमको Alfa Amyrin, beta Amyrin Acetate, campesterol, phytosterol, alpha spinasterol,  uteolin,  isoorientin,  chrysoeriol,  palmitic acid, behenic acid, arachidic acid, Myristic acid,  linoleic acid, oleic acid, Stearic acid, glycolide E, Beta Sitosterol, stigmasterol, lupeol नामक Acids और प्राकृतिक Steroids पाए जाते हैं..

आयुर्वेद में 300 रोगों का सहजन से उपचार बताया गया है। इसकी फली, हरी पत्तियों व सूखी पत्तियों में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन-ए, सी और बी कॉम्पलैक्स प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

Moringo Hi sahjan hai

सहजन को साउथ में बनने वाली साम्भर में डाला जाता है. इसकी सब्जी बनाकर अक्सर घरों में खायी जाती है. मौसम में इसकी सब्जी बना कर खाने से बहुत सारे मिनरल्स शरीर को मिल जाते हैं. और एक बात आपको बता दें के शरीर का कोई भी रोग सिर्फ और सिर्फ किसी न किसी मिनरल्स की कमी के कारण होता है. और सहजन से आपको बहुत सारे मिनरल्स मिल जाते हैं जो आपके शरीर की पूर्ति करते हैं और आपका शरीर रोग मुक्त हो जाता है.

Moringo – sahjan

आपको सहजन के फायदे बताएं उस से पहले आपको यही कहना चाहेंगे के आप Moringo नाम से मूर्ख मत बनिए, ये सहजन का इंग्लिश नाम है. इसकी सब्जी खाइए, या इसका काढ़ा बना कर पियें, या इसके पंचांग को सुखा कर इसका एक एक चम्मच चूर्ण हर रोज़ सेवन करें. सब कुछ मिल जायेगा.

 

मोरिंगो – सहजन के फायदे – Moring sahjan ke fayde

इसके फूल उदर रोगों व कफ रोगों में, इसकी फली वात व उदरशूल में, पत्ती नेत्ररोग, मोच, शियाटिका,गठिया आदि में उपयोगी है|

जड़ दमा, जलोधर, पथरी,प्लीहा रोग आदि के लिए उपयोगी है तथा छाल का उपयोग शियाटिका ,गठिया, यकृत आदि रोगों के लिए श्रेयष्कर है|

सहजन के विभिन्न अंगों के रस को मधुर,वातघ्न,रुचिकारक, वेदनाशक,पाचक आदि गुणों के रूप में जाना जाता है|

सहजन के छाल में शहद मिलाकर पीने से वात, व कफ रोग शांत हो जाते है| इसकी पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया,शियाटिका ,पक्षाघात,वायु विकार में शीघ्र लाभ पहुंचता है| शियाटिका के तीव्र वेग में इसकी जड़ का काढ़ा तीव्र गति से चमत्कारी प्रभाव दिखता है,

मोच इत्यादि आने पर सहजन की पत्ती की लुगदी बनाकर सरसों तेल डालकर आंच पर पकाएं तथा मोच के स्थान पर लगाने से शीघ्र ही लाभ मिलने लगता है |

सहजन को अस्सी प्रकार के दर्द व बहत्तर प्रकार के वायु विकारों का शमन करने वाला बताया गया है|

इसकी सब्जी खाने से पुराने गठिया , जोड़ों के दर्द, वायु संचय , वात रोगों में लाभ होता है.

सहजन के ताज़े पत्तों का रस कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है.

सहजन की सब्जी खाने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी कटकर निकल जाती है.

इसकी जड़ की छाल का काढा सेंधा नमक और हिंग डालकर पिने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता है.

इसके पत्तों का रस बच्चों के पेट के किडें निकालता है और उलटी दस्त भी रोकता है.

इसका रस सुबह शाम पीने से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है.

इसकी पत्तियों के रस के सेवन से मोटापा धीरे धीरे कम होने लगता है.

इसकी छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़ें नष्ट होते है और दर्द में आराम मिलता है.

इसके कोमल पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होती है.

इसकी जड़ का काढे को सेंधा नमक और हिंग के साथ पिने से मिर्गी के दौरों में लाभ होता है.

इसकी पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव और सुजन ठीक होते है.

सर दर्द में इसके पत्तों को पीसकर गर्म कर सिर में लेप लगाए या इसके बीज घीसकर सूंघे.

इसमें दूध की तुलना में ४ गुना कैलशियम और दुगना प्रोटीन पाया जाता है।

सहजन के बीज से पानी को काफी हद तक शुद्ध करके पेयजल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसके बीज को चूर्ण के रूप में पीस कर पानी में मिलाया जाता है। पानी में घुल कर यह एक प्रभावी नेचुरल क्लैरीफिकेशन एजेंट बन जाता है। यह न सिर्फ पानी को बैक्टीरिया रहित बनाता है बल्कि यह पानी की सांद्रता को भी बढ़ाता है जिससे जीवविज्ञान के नजरिए से मानवीय उपभोग के लिए अधिक योग्य बन जाता है।

कैन्सर व पेट आदि शरीर के आभ्यान्तर में उत्पन्न गांठ, फोड़ा आदि में सहजन की जड़ का अजवाइन, हींग और सौंठ के साथ काढ़ा बनाकर पीने का प्रचलन है। यह भी पाया गया है कि यह काढ़ा साइटिका (पैरों में दर्द), जोड़ो में दर्द, लकवा, दमा, सूजन, पथरी आदि में लाभकारी है।

सहजन के गोंद को जोड़ों के दर्द और शहद को दमा आदि रोगों में लाभदायक माना जाता है।

आज भी ग्रामीणों की ऐसी मान्यता है कि सहजन के प्रयोग से विषाणु जनित रोग चेचक के होने का खतरा टल जाता है।

सहजन में हाई मात्रा में ओलिक एसिड होता है जो कि एक प्रकार का मोनोसैच्युरेटेड फैट है और यह शरीर के लिये अति आवश्यक है।

सहजन में विटामिन सी की मात्रा बहुत होती है। विटामिन सी शीर के कई रोगों से लड़ता है, खासतौर पर सर्दी जुखाम से। अगर सर्दी की वजह से नाक कान बंद हो चुके हैं तो, आप सहजन को पानी में उबाल कर उस पानी का भाप लें। इससे जकड़न कम होगी।

इसमें कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है जिससे हड्डियां मजबूत बनती है। इसके अलावा इसमें आइरन, मैग्नीशियम और सीलियम होता है।

इसका जूस गर्भवती को देने की सलाह दी जाती है। इससे डिलवरी में होने वाली समस्या से राहत मिलती है और डिलवरी के बाद भी मां को तकलीफ कम होती है।

सहजन में विटामिन ए होता है जो कि पुराने समय से ही सौंदर्य के लिये प्रयोग किया आता जा रहा है। इस हरी सब्जी को अक्सर खाने से बुढापा दूर रहता है। इससे आंखों की रौशनी भी अच्छी होती है।

आप सहजन को सूप के रूप में पी सकते हैं, इससे शरीर का रक्त साफ होता है। पिंपल जैसी समस्याएं तभी सही होंगी जब खून अंदर से साफ होगा।

कैसे करें सहजन का प्रयोग – sahjang ka prayo

इसका प्रयोग आप इसकी फली की सब्जी बना कर, इसकी छाल का काढ़ा बना कर, इसकी पत्तियों और फूलों को छाया में सुखा कर इसका चूर्ण कर लीजिये और इसको रोजाना 1 चम्मच खाएं, इसके पत्तों को सब्जी में डालकर खा सकते हैं.

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