Wednesday , 19 September 2018
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गोरखमुंडी

स्त्री पुरुषों के लिए वरदान – तोड़े कमजोरी की मुंडी – इसका नाम ही है गोरखमुंडी

गोरखमुंडी के फायदे, Benefit of Gorakhmundi, gorakhmundi ke fayde, benefit of Sphaeranthus indicus in hindi

गोरखमुंडी का इस्तेमाल आयुर्वेद मतानुसार प्लीहा, पीलिया, पित्त विकार, वातज, कंठमाला, क्षयजनित ग्रंथियां, खुजली, दाद, कुष्ठ, यौन रोग तथा गर्भाशय की वेदना दूर करने के लिए किया जाता है. गोरखमुंडी कटु, तिक्त आदि गुणों के कारण अपची, अपस्मार, गलगंड, एवं शलिपद आदि रोगों का शमन करती है.

आज आपको गोरखमुंडी के कुछ ऐसे ही प्रयोग बताने जा रहें हैं जिनके इस्तेमाल से आप वीर्य विकार, जननेंद्रिय के विकार, शारीरिक कमजोरी, नपुंसकता इत्यादि रोगों से छुटकारा पा सकते हैं. तो आये जाने गोरखमुंडी के फायदे. Gorakhmundi ke fayde

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नपुंसकता में गोरखमुंडी के प्रयोग – Gorakhmundi ke fayde

  1. गोरखमुंडी की ताज़ा मूल (जड़) को पीसकर, किसी कलईदार पीतल की कढाई में रखकर, चार गुना काले तिल का तेल और  16 गुना पानी डालकर धीमी आंच पर पकाएं. केवल तेल शेष रहने पर इसको छान लें. जब आप इसको पकाएंगे तो जैसे जैसे पानी जलेगा तो ये आवाज़ करता रहेगा और जैसे ही पानी जल जायेगा तो तेल बिलकुल शांत हो जायेगा. इस तेल को किसी कांच की बोतल में छान कर रख लीजिये. इस तेल को पुरुष अपने जननांग पर नित्य मालिश करें और 10 – 30 बूँद पान में लगाकर खाने के बाद खाएं. बहुत लाभ मिलेगा.
  2. 1 से 2 ग्राम मुंडी का चूर्ण बराबर मिश्री मिला कर खाने से वीर्य विकारों से मुक्ति मिलती है.

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बल बढाने के लिए गोरखमुंडी का प्रयोग – Gorakhmundi ke fayde

  • गोरखमुंडी के पौधे को छाया में सुखाकर, पीसकर बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर एक चम्मच प्रातः सायं दूध के साथ सेवन करने से दौर्बल्य का नाश हो कर बल बढ़ता है.मनुष्य का यौवन स्थिर रहता है और बाल भी सफ़ेद नहीं होते.
  • गोरखमुंडी के बीजों में बराबर मिश्री मिलाकर खाने से मनुष्य दीर्घायु होता है.
  • 1 से 2 ग्राम चूर्ण को घी के साथ चाटने से शारीरिक बल बढ़ता है.
  • गोरखमुंडी के पौधे को छाया में सुखाकर चूर्ण कर लीजिये, इसमें दुगुना शहद मिलाकर 40 दिन तक एक एक चम्मच दूध के साथ सेवन करने से अपार बल बढ़ता है.

स्त्री रोगों में गोरखमुंडी – Gorakhmundi ke fayde

  1. योनी शूल – 10 ग्राम ताज़े पंचांग (न मिलने पर छाया में सुखाया हुआ) को लेकर जल से पीसकर पिलाने से तीव्र योनिशूल का शमन होता है और प्रदर में लाभ होता है.
  2. मुंडी कलक को अरंड तेल में भूनकर ठंडा होने पर योनी में लेप करने से योनिशूल का शमन होता है.
  3. योनिविकार – बला, गोरखमुंडी, शालपर्णी, क्षीरकाकोली, पीलूपर्णी, मुर्वा आदि द्रव्यों से पकाए हुए बलादी यमक स्नेह को मात्रापुर्वक नियमित सेवन करने से वातज तथा पित्तजयोनी रोगों में लाभ होता है.

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बवासीर, गुदाभ्रंश और भगंदर में गोरखमुंडी के प्रयोग. – Gorakhmundi ke fayde.

  1. 5 मिली गोरखमुंडी के पत्तों का स्वरस और 5 मिली अरंड के पत्तों का स्वरस को मिलाकर पिलाने से तथा इसके पत्तों की लुगदी को मस्सों पर बाँधने से तथा पंचांग की धुनी देने से अर्श में लाभ होता है.
  2. 1 से 2 ग्राम गोरखमुंडी चूर्ण को छाछ या गौ दूध के साथ सेवन करने से बवासीर का शमन होता है.
  3. 1 से 2 ग्राम मुंडी चूर्ण को बासी पानी के साथ सेवन करने से भगंदर में लाभ होता है.
  4. गोरखमुंडी के मूल तेल को गुदा में लगाने से गुदाभ्रंश में लाभ होता है.

पीलिया में गोरखमुंडी – Gorakhmundi ke fayde

  • पीलिया (कामला – पांडू) रोग में 5 से 10 ग्राम इसके पंचांग का स्वरस सेवन करने से लाभ होता है.

किडनी के रोग – Gorakhmundi ke fayde

  • गौ दूध के साथ 1 से २ ग्राम गोरखमुंडी के चूर्ण का सेवन करने से चित्तभ्रम और प्रमेह में लाभ होता है.

गोरखमुंडी की उपलब्धता. – Gorakhmundi ke fayde

गोरखमुंडी आपको ताज़ा मिल जायेगा, अगर आपके ताज़ा ना मिले तो आप इसको पंसारी से मिल जाएगी.

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