Tuesday , 25 September 2018
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हिचकी का इलाज

हिचकी का इलाज – Hichki ka ilaj

कारण :
यह रोग मुख्य रूप से वायु, कफ के कारण उत्पन्न होता है। मुंह में जब वायु ऊपर की ओर बढ़ती है तो हिक-हिक की आवाज होती है। इस तरह वायु रुक-रुककर बाहर निकलती है। यह रोग वायु बढ़ाने वाले पदार्थों को खाने से होता है। कई बार मिर्च-मसाले खाने या गले में अटक जाने के कारण आमाशय से उठने वाली वायु ऊपर की ओर उठती है, जिससे उत्तेजनात्मक स्थिति पैदा होती है जो हिचकी को जन्म देती है।

लक्षण :
इस रोग में बार-बार हिचकी आती है। सांस लेते समय तेज-तीखी आवाज होती है। यह आवाज कंठद्वार और मध्यपट में ऐंठन के साथ-साथ उत्पन्न होती है। आयुर्वेद में पांच प्रकार की ´हिचकी´ बताई गई है-

1. अन्नाजा : यह हिचकी अधिक खाना-खाने से होती है। इस प्रकार की हिचकी कुछ देर में ठीक होती है।
2. यमला : यह हिचकी गर्दन तथा सिर को कंपाती हुई 2-2 बार निकलती है।
3. क्षुद्रा : इस प्रकार की हिचकी देर से धीरे-धीरे उठती है।
4. गम्भीर : हिचकी नाभि के पास से उठती है तथा गम्भीर शब्द करती है। यह हमेशा रोगों के अन्त में उपद्रव के रूप में होती है।
5. महती : इस प्रकार की हिचकी पेडू, हृदय, मस्तिष्क आदि कोमल स्थानों में पीड़ा करती हुई, सब अंगों को कंपाती हुई लगातार चलती है। इसका क्रम नहीं टूटता है। यह प्राय: जीवन के अन्तिम समय में उठती है और मनुष्य के मर जाने पर ही पीछा छोड़ती है।

अगर आपकी हिचकी रुकने का नाम नहीं लेती हैं तो आज हम आपको घरेलु उपचार बताने जा रहे हैं जो इस समस्या से निजात दिलाती हैं |

मयूर (मोर) के पंख को दियासलाई या घी की बत्ती से जलाकर भस्म कर ले, पीस-छान कर रख ले ध्यान रहे पंख का पिछला चन्द्रिका वाला भाग ही विशेष गुणयुक्त होता है अतः उतने ही अंश को भष्म करे |

आधा ग्राम भस्म शहद में मिलाकर चाटने से हिचकियां आनी बन्द हो जाती है।

मयूर (मोर) के पंख की भस्म का सेवन करने से हिचकी, वमन, स्वास और कास रोग नष्ट होते हैं | इस भस्म को पिपली के चूर्ण के साथ मधु मिलाकर चाटने से प्रबल हिचकी श्वास और घोर वमन तथा उपद्र्व युक्त वमन शीघ्र नष्ट होते हैं | मयूर चन्द्रिका में जो सुंनहरा रंग दिखाई पड़ता हैं उसमे अति न्यून अंश में स्वर्ण का भाग रहता हैं | तथा मयूर चन्द्रिका में ताम्र का भाग विशेष होता हैं | इसी कारण इसका चमत्कारिक प्रभाव होता हैं | हिचकी में इसके साथ जहर मोहरा खटाई पिष्टी या भष्म १-२ रत्ती तथा रसादि रस १ गोली मिलाकर देने से अच्छा और शीघ्र लाभ होता हैं | तीव्र हिचकी था हिक्का अत्यंत तृषा के कारण रोगी बेचैन हो तो पिपली के छाल के साथ मयूर चन्द्रिका भस्म को सेवन करना अच्छा रहता हैं |

कुछ अन्य उपचार भी बता रहे हैं ।

प्याज:
•10 मिलीलीटर प्याज के रस में 10 ग्राम शहद को मिलाकर उसे चाटकर खाने से हिचकी जल्द बन्द हो जाती है।
•प्याज काटकर नमक डालकर हर घंटे से खाने से हिचकी नहीं आती है।
•10 मिलीलीटर प्याज के रस में थोड़ा-सा कालानमक और सेंधानमक मिलाकर चाटने से हिचकी आना बन्द हो जाती है।
•30 मिलीलीटर प्याज का रस, 10 ग्राम शहद इन सबको एक साथ बोतल में भर लें। इसे 1-1 बूंद आंखों में टपकाने से हिचकी मिट जाती है।
•हिचकी उठने पर प्याज का रस शहद के साथ सेवन करने से हिचकी में लाभ होता है।
•प्याज का रस एक चम्मच लेकर उसमें शहद को मिलाकर सेवन करें, इससे हिचकी में लाभ होगा।

तुलसी:
तुलसी के पत्तों का रस दो चम्मच और शहद एक चम्मच मिलाकर पीने से हिचकी नष्ट हो जाती है।

राई:
•10 ग्राम राई को 250 मिलीलीटर पानी में डालकर उबालें। थोड़ा ठंड़ा करके पीने से किसी भी कारण से आने वाली हिचकियों में लाभ होता है।
•60 ग्राम पिसी राई को आधा लीटर पानी में उबाल लें। चौथाई पानी रह जाने पर स्वादानुसार सेंधानमक मिलाकर हर घंटे से पिलाने से हिचकी बन्द हो जाती है।

कालीमिर्च :
•कालीमिर्च का चूर्ण, शहद में मिलाकर चाटने से हिचकी मिट जाती है।
•15 पीस कालीमिर्च, 2 पीस छोटी इलायची और 8-10 बताशे को 1 कप पानी के साथ पका लें। आधा शेष रहने पर रात के समय इसे रोगी को पिलायें। यह काढ़ा जुकाम और खांसी में अधिक लाभकारी है। लेकिन यह हिचकी में भी लाभ करता है। इस रोग में इस काढे़ को सुबह-शाम दोनों समय देना चाहिए। इसे रोगी धीरे-धीरे पीयें। इससे सही लाभ होगा।
•सूखी कालीमिर्च और धनियां के कुछ दाने मुंह में रखकर चूसें, इससे हिचकी में लाभ होता है।
•1-2 ग्राम कालीमिर्च का चूर्ण, 5 से 10 ग्राम शर्करा के साथ सुबह-शाम सेवन करने से हिचकी में लाभ होता है।
•कालीमिर्च को तवे पर जलाकर उसका धुआं सूंघने से हिचकियां आना बन्द हो जाती हैं।

अकरकरा :
•1 ग्राम अकरकरा के चूर्ण में 10 ग्राम शहद मिलाकर उसे चाटने से हिचकियां आना बन्द हो जाती हैं।
•एक ग्राम अकरकरा का चूर्ण एक चम्मच शहद के साथ चटाएं।
•हिचकी आने पर एक ग्राम अकरकरा का चूर्ण शहद के साथ चटायें। हिचकी पर यह चमत्कारिक असर दिखाता है।

इलायची:
•2 ग्राम इलायची को पीसकर पानी में डालकर उबालें। जब आधा पानी बचा रह जाए तो गर्म-गर्म ही यह काढ़ा रोगी को पिलाने से हिचकी आना बन्द हो जाती है।
•1-2 ग्राम की मात्रा में सफेद इलायची के चूर्ण को शर्करा के साथ खाने से लम्बे समय से
चली आ रही (असाध्य) हिचकी का रोग मिट जाता है।
•हर 2 घंटे पर इलायची खाने से हिचकी बन्द हो जाती है।
•4 छोटी इलायची छिलका सहित लेकर कूट लें, और उसे 500 मिलीलीटर पानी में डालकर उबालें। जब 200 मिलीलीटर पानी शेष रह जाये तो उतार लें, और किसी साफ कपड़े से छानकर रोगी को गुनगुने रूप में एक ही मात्रा में पिलाने से हिचकी जल्द मिट जाती है।

सोंठ:
•10-10 ग्राम सोंठ, पिप्पली और आंवला को एक साथ कूट-पीसकर इसका चूर्ण बनाकर इसमें 5 ग्राम शहद मिलाकर चाटने से हिचकियां आनी बन्द हो जाती हैं।
•5-5 ग्राम सोंठ, पीपल, आंवला और मिश्री सभी वनौषधियां को लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बना लें, इसका 3 ग्राम चूर्ण शहद के साथ चाटने से हिचकी आना जल्द बन्द हो जाती है।
•सोंठ का चूर्ण गुड़ के साथ सेवन करने से हिचकी बन्द हो जाती है।
• सोंठ का चूर्ण गुड़ के साथ सेवन करने से हिचकी बन्द हो जाती है।
•बकरी के दूध के साथ सोंठ मिलाकर पीने से हिचकी की बीमारी से राहत मिलती है।
•सोंठ को पीसकर दूध में उबालकर पीने से हिचकी बन्द हो जाती है।
•सोंठ को पानी में घिसकर उसे सूंघने से हिचकी में लाभ होता है।
•पिसी हुई सोंठ 1 चम्मच और 1 चुटकी सोडा को पानी में घोलकर पीने से हिचकी नहीं आती है।
•आधा चम्मच सोंठ और पीपल का चूर्ण 1 चुटकी को शहद में मिलाकर चाटने से हिचकी में लाभ होता है।

खजूर:
•3 ग्राम खजूर की गुठली के चूर्ण में 3 ग्राम पिप्पली का चूर्ण मिलाकर शहद के साथ चाटने से हिचकी की बिमारी मिट जाती है।
•1 ग्राम खजूर का चूर्ण शहद के साथ सेवन करने से हिचकी नहीं आती है।

सौंफ:
•सौंफ का रस और गुलाब जल को बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से हिचकी में लाभ होता है।
•10 ग्राम पिसी सौंफ में 10 ग्राम खांड़ मिलाकर आधा-आधा ग्राम दूध या पानी से सुबह-शाम सेवन करने से हिचकी नहीं आती है।

कलौंजी:
•1 ग्राम पिसी कलौंजी को शहद में मिलाकर चाटने से हिचकी आनी बन्द हो जाती है।
•3 ग्राम कलौंजी के चूर्ण को बनाकर मक्खन के साथ खिलाने और काले उड़द चिलम में रखकर तम्बाकू के साथ पीने से हिचकी में लाभ होता है।
•3 ग्राम कलौंजी का चूर्ण मक्खन में मिलाकर खाने से हिचकी का आना बन्द हो जाता है।
•3 ग्राम कलौंजी पीसकर दही के पानी में मिलाकर खाने से हिचकी में लाभ होता है। ताजे दही को कपडे़ मे बांध दें। जब पानी निकल जाये तब इसे प्रयोग में लायें।
•आधा से 1 ग्राम कलौंजी (मंगरैला) मठ्ठे या छाछ के साथ रोजाना 3-4 बार सेवन से हिचकी नहीं आती है।

शहद:
•शहद में उंगली को डुबोकर प्रतिदिन 3 बार चाटने से हिचकी से आराम मिलता है।
•शहद और काले नमक में नींबू का रस मिलाकर सेवन करने से हिचकी से आराम मिलता है।
•प्याज के रस में शहद मिलाकर चाटने से हिचकी बन्द हो जाती है।

आम:
•आम के सूखे पत्तों का बारीक चूर्ण चिलम में भरकर या ताजे पत्तों को कूटकर निकाले गये रस (2-3 ग्राम) में थोड़ा-सा शहद मिलाकर सेवन करने से हिचकी बन्द हो जाती है।
•आम के पत्ते व धनिया दोनों को कूटकर दो से चार ग्राम की मात्रा में लेकर गुनगुने पानी से दिन में दो या तीन बार पियें।
•आम के गिरे हुए सूखे पत्तों को जलाकर उनका धुआं सूंघने से हिचकी आना बन्द हो जाती है।
•कच्चे आम की गुठली की गिरी निकालकर धूप में सुखा लें, फिर इसको पीसकर आधा चम्मच चूर्ण शहद के साथ सेवन करने से हिचकी में लाभ होता है।
•पके हुए आम के रस में दूध मिलाकर सेवन करने से हिचकी में लाभ होता है।

दूध:
गर्म दूध को घूंट-घूंटकर पीने से हिचकी सही हो जाती है।

हींग:
•हींग और उड़द का ध्रूमपान करने से हिचकी में लाभ होता है।
•थोड़ी-सी हींग 10 ग्राम गुड़ में मिलाकर खाने से हिचकियां आना बन्द हो जाती हैं।
•2 ग्राम हींग, 4 पीस बादाम की गिरी दोनों को एक साथ पीसकर पानी के साथ पीने से हिचकी बन्द हो जाती है।
•थोड़ी-सी हींग पानी में घोलकर पीने से हिचकी में लाभ होता है।
•हींग को जलाकर सुंघाने से हिचकी में लाभ होता है।

नारियल:
•नारियल की जटा की भस्म (राख) को पानी में घोलकर रख दें। जब राख बैठ जाये। तब वह पानी पीने से हिचकी मिट जाती है।
•आधा ग्राम नारियल की गिरी में आधा ग्राम मिश्री को मिलाकर खिलाने से बच्चों की हिचकी में आराम होता है।
•नारियल का पानी पीने से हिचकी में लाभ होता है।
•नारियल के डाभ का पानी पीने से हिचकी में लाभ होता है।

देशी घी:
•शुद्ध घी को हल्का गर्म करके पीने से हिचकी नहीं आती है।
•1 चम्मच देशी घी, 1 चम्मच मिश्री और 15 कालीमिर्च को मिलाकर सुबह-शाम यानी 2 बार चाटने से गला बैठना और सूखी खांसी ठीक हो जाती है। इसे चाटने के कुछ घंटे बाद तक पानी नहीं पीना चाहिए।

•एक चम्मच घी में चुटकी भर सेंधानमक डालकर सूंघने से हिचकी नहीं आती है। गाय का घी गुनगुना करके पीने से खुश्की के कारण आने वाली हिचकी बन्द हो जाती है
•गाय का घी गुनगुना करके पीने से खुश्की के कारण आने वाली हिचकी बन्द हो जाती है।

नीम :
•नीम की पत्तियों को इककठा करके उसे जला दें। फिर उसमें कालीमिर्च का चूर्ण डालें, इसका धुआं लेने से हिचकियां आनी बन्द हो जाती हैं।

•2 पीस सींक को 10 मिलीलीटर पानी में पीसकर, मोरपंख के चांद की राख लगभग 1 चौथाई ग्राम मिलाकर सेवन करें।

गाजर:
गाजर के रस की 4-5 बूंदों को दोनों नासाछिद्रों (नाक के छेदों) में डालने से सांस और हिचकी में लाभ होता है। गाजर को पीसकर सूंघने से भी हिचकी में लाभ होता है।

केला:
जंगली केला के पत्तों की राख 1 ग्राम भर 10 ग्राम शहद में मिलाकर चाटने से हिचकी आना तुरन्त ही बन्द हो जाती है।

जायफल:
•तुलसी के रस में जायफल को घिसकर एक चम्मच की मात्रा में, 3 बार खायें। इससे हिचकी बन्द हो जाती है।

•चावल के धुले पानी में जायफल को घिसकर पीने से हिचकी व उल्टी बन्द हो जाती है।

पोदीना:

•पोदीने के पत्तों को चूसने और पत्तों को नारियल (खोपरे) के साथ चबाकर खाने से हिचकी दूर होगी।

•पोदीने के पत्ते या नींबू को चूसने या पोदीने के पत्तों को शक्कर (चीनी) में मिलाकर चबाने से हिचकी का आना बन्द हो जाता है।

आंवला:

•10 मिलीलीटर आंवले के रस में 3 ग्राम पिप्पली का चूर्ण और 5 ग्राम शहद को मिलाकर चाटने से हिचकियों की बीमारी से राहत मिलती है।

•आंवला, सोंठ, छोटी पीपल और शर्करा के चूर्ण का सेवन करने से हिचकी नहीं आती है।

•आंवले के मुरब्बे या मुरब्बे की चाशनी के सेवन से हिचकी की बीमारी में बहुत लाभ होता है।

•आंवले के रस में पीपल का चूर्ण मिलाकर शहद के साथ खाने से हिचकी नहीं आती है।

•पिप्पली, आंवला और सोंठ इनके 2-2 ग्राम चूर्ण में 10 ग्राम खांड़ तथा एक चम्मच शहद मिलाकर बार-बार प्रयोग करने से हिचकी तथा श्वास रोग शान्त होते हैं।

•आंवला का 10-20 मिलीलीटर रस और 2-3 ग्राम पीपल का चूर्ण, 2 चम्मच शहद के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से हिचकी में लाभ होता है।

•सभी प्रकार की हिचकियों में अदरक की साफ की हुई छोटी डली चूसनी चाहिए।

•एक कप दूध को उबालकर उसमें आधा चम्मच सोंठ का चूर्ण डाल दें और ठंड़ा करके पिलाएं।

अनार:
20 ग्राम अनार के शर्बत में छोटी इलायची के बीज, वंशलोचन, सूखा पोदीना, जहरमोहरा खताई और अगुरू एक-एक ग्राम तथा पीपल आधा ग्राम का सूक्ष्म चूर्ण मिलाकर चटनी बना लें। आवश्यकतानुसार थोड़ी-थोड़ी चटनी चाटने से हिचकी शीघ्र दूर होती है।

सावधानी : हिचकी उठते ही पानी की ओर ज्यादा ध्यान दें। पर जब तक स्थिति सामान्य न हो तब तक फल का रस या छेने का पानी ही सेवन में लायें। ठोस पदार्थ न दें।

भोजन तथा परहेज : हरी सब्जियों का रस, फटे दूध का पानी, बर्फ चूसना, फलों के ग्लूकोज का रस पीना, पुराने गेहूं, पुराने सांठी चावल, लहसुन, जौ, नरम मूली, बिजौरा नींबू, शहद, गर्म पानी, गोमूत्र और तुलसी इन सबके सेवन से हिचकी में लाभ होता है।

परहेज :- सरसो, मछली तथा बहुत पानी वाले देशों के पशु-पक्षियों का मांस, तेल में छोंका गया चौलाई का साग, कन्दों का साग, खटाई, गरिष्ठ पदार्थ और सरसों इन सबका सेवन हिचकी रोग में नहीं करना चाहिए।

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