Wednesday , 19 September 2018
Home » Health » arthritis - joint pain » गठिया Arthritis के लिए आयुर्वेद में बताये गए सबसे बेहतरीन तेल- जरूर पढ़ें
गठिया

गठिया Arthritis के लिए आयुर्वेद में बताये गए सबसे बेहतरीन तेल- जरूर पढ़ें

गठिया Arthritis के लिए सरल रामबाण इलाज।

गठिया के रोगी के एक या कई जोड़ों में दर्द, अकड़न या सूजन आ जाती है। इस रोग में जोड़ों में गांठें बन जाती हैं और शूल चुभने जैसी पीड़ा होती है, इसलिए इस रोग को गठिया भी कहते हैं। आधुनिक चिकित्सा के अनुसार खून में यूरिक एसिड की अधिक मात्रा होने से गठिया रोग होता है। भोजन में शामिल खाघ पदार्थों के कारण जब शरीर में यूरिक एसिड अधिक मात्रा में बनता है तब गुर्दे उन्हें खत्म नहीं कर पाते और शरीर  के अलग- अलग जोड़ों में में यूरेट क्रिस्टल जमा हो जाता है। और इसी वजह से जोड़ों में सूजन आने लगती है तथा उस सूजन में दर्द होता है।

ऑस्टियोआर्थराइटिस को आयुर्वेद में संधिगत वात के सामान माना जाता है। यह तब होता है जब असंतुलित वात जोड़ों को अपना घर बना लेते हैं। रजोनिवृत्ति के प्रभाव के कारण यह महिलाओं में अधिक होता है। यह आम तौर पर घुटनों, एड़ियों, रीढ़ की हड्डी और कूल्हों के जोड़ को प्रभावित करता है। ऐसा आमतौर पर तब होता है जब शरीर में कैल्शियम कम होने लगता है या उम्र के प्रभाव के कारण बुढ़ापा आने लगता है।

स्टेज 0 ऑस्टियोअर्थराइटिस

स्टेज 0 में आपके घुटने पूरी तरह “सामान्य” होते हैं। यानि अगर आपको घुटनों में दर्द की समस्या होती है, तो इसका कारण ऑस्टियोअर्थराइटिस नहीं बल्कि घुटनों का ही कोई अन्य रोग हो सकता है।

स्टेज 1 ऑस्टियोअर्थराइटिस

स्टेज 1 होने पर व्यक्ति में बहुत हल्के और सामान्य लक्षण देखे जाते हैं। इसमें आमतौर पर आपको हड्डियों के जोड़ों के पास की हड्डी कुछ बढ़ी हुई लगती है यानि हड्डियों में असामान्य विकास ऑस्टियोअर्थराइटिस का पहला लक्षण है। आमतौर पर स्टेज 1 ऑस्टियोअर्थराइटिस में दर्द नहीं होता है या बहुत कम और कभी-कभी होता है।

स्टेज 2 ऑस्टियोअर्थराइटिस

स्टेज 2 ऑस्टियोअर्थराइटिस में लक्षण और अधिक उभर आते हैं। जब जोड़ों पर कोई हड्डियां या कई हड्डियां ज्यादा बढ़ती हुई दिखाई देती हैं, तो डॉक्टर एक्सरे द्वारा इसका पता लगाते हैं। स्टेज 2 ऑस्टियोअर्थराइटिस में आमतौर पर हड्डियों में उभार देखा जाता है मगर कार्टिलेज इस समय तक स्वस्थ होते हैं। इस स्टेज में आमतौर पर जोड़ों में पाया जाने वाला सिनोवियल फ्लूइड भी पर्याप्त होता है जिससे आपको चलने-फिरने, उठने-बैठने और घुटनों को मोड़ने आदि में परेशानी नहीं होती है।
लेकिन स्टेज 2 के मरीजों को आमतौर पर ज्यादा चलने पर या ज्यादा मेहनत करने पर जोड़ों में दर्द की समस्या हो जाती है या कई बार घंटों एक जगह बैठने के कारण और लेटने के कारण दर्द की शिकायत हो जाती है।

स्टेज 3 ऑस्टियोअर्थराइटिस

ये बीच की यानि “मध्यम” स्टेज है। इस स्टेज में मरीज के कार्टिलेज थोड़ा-थोड़ा प्रभावित होने लगता है और हड्डियों के बीच की जगह सिकुड़ने लगती है। स्टेज 3 ऑस्टियोअर्थराइटिस के मरीजों को चलने-फिरने या झुकने के दौरान अक्सर ही दर्द की शिकायत रहने लगती है। लंबे समय तक बैठे रहने के बाद अक्सर उनकी हड्डियां अकड़ जाती हैं। ज्यादा चलने और मेहनत करने के बाद जोड़ों में सूजन की समस्या भी देखी जा सकती है।

स्टेज 4 ऑस्टियोअर्थराइटिस

स्टेज 4 आते-आते ऑस्टियोअर्थराइटिस “गंभीर” रूप ले लेता है। स्टेज 4 के मरीजों को इस बीमारी में तेज दर्द का सामना करना पड़ता है। इस स्टेज में मरीज के लिए चलना-फिरना बहुत मुश्किल हो जाता है क्योंकि अंगों को इधर-उधर हिलाने-डुलाने से ही तेज दर्द महसूस होता है। इस स्टेज में जोड़ों के बीच हड्डियों के बीच की जगह बहुत ज्यादा सिकुड़ जाती है और कार्टिलेज लगभग पूरी तरह खत्म हो चुके होते हैं। मरीज की हड्डियों के बीच सिनोवियल फ्लूइड भी बहुत कम हो जाता है। जिसके कारण हड्डियों के बीच की चिकनाई खत्म हो जाती है।

बचाव विधि 

बथुआ के ताजा पत्तो का रस पंद्रह ग्राम प्रतिदिन पीने से गठिया दूर होता है। इस रस में नमक चीनी आदि कुछ न मिलाएं। नित्य प्रात: खाली पेट ले या फिर शाम चार बजे। इसके लेने के आगे पीछ दो-दो घंटे कुछ न लें। एक-दो मास लें।

अजवाइन है फायदेमंद

अजवाइन यूरिक एसिड को कम करने के लिए एक प्रभावी तरीका है क्‍योंकि इसके सेवन से शरीर में यूरिन ज्यादा बनता है। यह रक्त में क्षार के स्‍तर को नियंत्रित कर सूजन को कम करने में मदद करता है। अगर आप मोटापे से ग्रस्त हैं, तो यूरिक एसिड के स्तर में वृद्धि को रोकने के लिए अपने वजन को नियंत्रित करना होगा। मोटापा आपको अर्थराइटिस के अलावा अन्य कई गंभीर रोगों का शिकार बना सकता है। पानी की पर्याप्‍त मात्रा से शरीर में मौजूद यूरिक एसिड यूरीन के रास्ते से बाहर निकल जाता है इसलिए थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहना चाहिए।

गठिया का आयुर्वेदिक इलाज है धन्वंतरम तेल –

आयुर्वेदिक तरीके से तैयार किया गया धन्वंतरम तेल एक आयुर्वेदिक औषधीय तेल है जो गठिया रोगियों के इलाज के लिए बहुत फायदेमंद है। इसमें सूजन को कम करने और रुमेटी गठिया की प्रगति को होने से रोकने के गुण हैं। इसलिए यह रूमेटाइड अर्थराइटिस और ओस्टियोआर्थराइटिस के लिए एक प्रभावी मालिश तेल है। यह अन्य प्रकार के गठिया के लिए भी प्रभावी है और आयुर्वेद की दुनिया में व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है ताकि गठिया के दर्द से आराम मिल सके। इस तेल को प्रतिदिन नियमित रूप से मालिश के लिए उपयोग किया जा सकता है। यह आपके जोड़ों को ताकत भी प्रदान करता है। इस तेल का कोई भी दुष्प्रभाव नहीं है इसलिए आप इसका लंबे समय तक उपयोग कर सकते हैं।

अर्थराइटिस का आयुर्वेदिक इलाज है मुरिवेन्ना ऑयल

मुरिवेन्ना ऑयल सर्वश्रेष्ठ आयुर्वेदिक औषधीय तेलों में से एक है जो जोड़ों में दर्द और सूजन से ग्रसित लोगों के लिए तैयार किया जाता है। मुरिवेन्ना ऑयल विशिष्ट रूप से सबसे शक्तिशाली जड़ी-बूटियों का मिश्रण है जो गठिया के दर्द से राहत दिलाता है और वात दोष को संतुलित करके जोड़ों के समग्र स्वास्थ्य में सुधार करता है। आप इसे मालिश में इस्तेमाल कर सकते हैं या गर्म पानी के साथ मौखिक रूप से इसकी 5-10 बूंदों को भी ले सकते हैं। हालांकि इसका बाहरी रूप से उपयोग करने पर कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है लेकिन मधुमेह, हाई बीपी या कोलेस्ट्रॉल के स्तर से परेशान रोगियों को मौखिक रूप से इसका उपयोग डॉक्टर की सलाह के बाद करना चाहिए।

गठिया का आयुर्वेदिक उपचार है कोट्टमचुकादि तेल –

कोट्टमचुकादि तेल आयुर्वेदिक मालिश तेल है जो व्यापक रूप से वात विकारों से संबंधित जोड़ों और स्नायु संबंधी दर्द को कम करने के लिए उपयोग किया जाता है। यह दर्द से राहत प्रदान करने के लिए एक कुशल मालिश तेल है और यह जोड़ों के काम काज में भी सुधार करता है। यह अपने श्रेष्ठ एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों और गठिया के इलाज में प्रभावित होने के कारण जोड़ों के दर्द को कम करने के लिए आयुर्वेदिक मालिश उपचारों में भी प्रयोग किया जाता है। इस तेल का कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है। अपने वात असंतुलन को कम करने और गठिया के उपचार के लिए इस तेल का उपयोग मालिश के रूप में करें।

गठिया की जड़ी बूटी है पुनर्नवादि गुग्गुलु

गुग्गुलु गठिया के उपचार के लिए सर्वश्रेष्ठ जड़ी-बूटियों में से एक है। यह वात रोगों के उपचार में बहुत प्रभावी है। इस आयुर्वेदिक दवा में गुग्गुलु के साथ पुनर्नवा, त्रिकातु, त्रिफला और कुछ अन्य शक्तिशाली जड़ी बूटियां शामिल हैं जो जोड़ों की सूजन को कम करने में मदद करती हैं। पुनर्नवादि गुग्गुलु जोड़ों के दर्द और सूजन से राहत देने के साथ-साथ शरीर के वजन को भी नियंत्रण में रखता है जिससे जोड़ों ( घुटनों पर) पर वजन कम पड़ता है। यह जोड़ों की जकड़न और कठोरता को कम करके उनके कामकाज को बढ़ाता है। यह वात संबंधी विकारों के इलाज में प्रभावी होने के कारण वैसे तो लगभग सभी तरह के गठिया के लिए अच्छा है लेकिन रुमेटी गठिया और गाउट के उपचार के लिए यह विशेष रूप से असरदार है। इसके उपयोग के लिए आप प्रतिदिन दो बार इसकी दो गोलियों का सेवन करें।

गठिया रोग की आयुर्वेदिक दवा है महानारायण तेल

महानारायण तेल जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द से राहत के लिए एक विशेष आयुर्वेदिक दवा है। इस तेल की मालिश से सभी प्रकार के गठिया जैसे रुमेटी या गाउट में राहत मिलती है। यह जोड़ों की कठोरता को कम करके उनके लचीलेपन में सुधार करता है। यह एक दर्द निवारक भी है। आप इसक 3-5 मिलीलीटर का सेवन प्रतिदिन खाने के पहले दिन में दो बार दूध या पानी के साथ मौखिक रूप से कर सकते हैं। यदि आप इसे बाहरी रूप से मालिश करने के लिए प्रयोग कर रहे हैं तो आप इसका लंबे समय तक उपयोग कर सकते हैं। लेकिन मौखिक रूप से सेवन करने के लिए डॉक्टर से परामर्श करें क्योंकि यह 3-4 महीने उपयोग करने के बाद कुछ दुष्प्रभाव पैदा कर सकता है।

अर्थराइटिस के दर्द की आयुर्वेदिक दवा है रसनादि कषायम

रसनादि कषायम गठिया के लिए एक और प्रभावी आयुर्वेदिक औषधि है जो तरल रूप में पाई जाती है। यह गठिया के मूल कारणों पर अपने प्रभाव के लिए जानी जाती है। इसका प्रभावी गुण गठिया रोगियों को गठिया के दर्द और सूजन से राहत पाने में मदद करता है, साथ-साथ उनके जोड़ों की गतिशीलता में सुधार करता है। रसनादि कषायम का उपयोग करने के लिए 12-24 मिलीलीटर रसनादि कषायम में बराबर मात्रा में पानी मिलाकर इसका सेवन करें। प्रभावी परिणामों के लिए दिन में दो बार – एक सुबह 6 बजे, फिर शाम को 6 बजे – इसका सेवन करें या चिकित्सक द्वारा निर्देशित रूप में इसे लें। हालांकि इस दवा का कोई दुष्प्रभाव नहीं है, फिर भी प्रभावी परिणाम के लिए चिकित्सक के निर्देशानुसार इसका सेवन करें।

गठिया की आयुर्वेदिक दवा है योगराज गुग्गुलु –

योगराज गुग्गुलु सभी प्रकार के गठिया के लिए सबसे व्यापक रूप से उपयोगी आयुर्वेदिक उपचारों में से एक है। यह तीनों दोष (वात, पित्त और कफ) को शांत करता है और दर्द और सूजन से राहत देता है। प्रतिदिन भोजन से पहले या बाद में इसकी एक या दो गोलियां 2-3 बार ले सकते हैं या डॉक्टर की सलाह के अनुसार इसका सेवन कर सकते हैं। इस दवा का सेवन करने से पहले आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श करना सबसे अच्छा है।

गठिया रोग का आयुर्वेदिक उपाय है आमवातारि रस

आमवातारि रस रुमेटी गठिया के इलाज के लिए सफल आयुर्वेदिक सूत्र है। इसमें शक्तिशाली आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां जैसे अमृतु, दशमूला, पुनर्नवा, त्रिफला, गुग्गुलु इत्यादि शामिल हैं जो रुमेटी गठिया के मूल कारणों पर अपना प्रभाव डालते हैं और दर्द, सूजन और जकड़न को कम करते हैं। आमवातारि रस जोड़ों की गतिशीलता को भी सुधारता है और इस गंभीर बीमारी से तुरंत राहत पाने में मदद करता है। इसमें भारी धातु पाया जाता है इसलिए इसकी अधिक खपत आपके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। इसलिए इसका सेवन हमेशा डॉक्टर की देखरेख में किया जाना चाहिए।

आर्थराइटिस का आयुर्वेदिक उपचार है ऑस्टिकोट टेबलेट

ऑस्टिकोट टेबलेट ऑस्टियोआर्थराइटिस के उपचार के लिए एक प्रबल आयुर्वेदिक दवा है। लेकिन अमा को पचाने और वात को शांत करने के प्रभावी गुण के कारण यह अन्य प्रकार के गठिया के उपचार के लिए भी बहुत अच्छी है। यह एक शक्तिशाली सूजन को कम करने वाली और दर्द निवारक दवा है जो गठिया के दर्द और लक्षणों को कम करने में मदद करती है। आप प्रतिदिन इसकी 2 गोलियां 2 से 3 बार ले सकते हैं या चिकित्सक द्वारा निर्देशित तरीके से इसका सेवन कर सकते हैं।

कम प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण हो रही जोड़ों की सूजन को गठिया कहा जाता है। आयुर्वेद के अनुसार गठिया मुख्यतः ख़राब वात दोष के कारण होता है और गठिया को इसके मूल कारणों और वात दोषों के आधार पर आयुर्वेद में तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।

courtesy myupchar

विशेष

आटा गूंधते समय उसमे बथुआ पत्ते मिलाकर चपाती बनाये और दिन में एक समय खाएं तो जल्दी लाभ होगा।

अन्य विधि 

नागौरी असगन्ध की जड़ और खांड दोनों संभाग लेकर कूट-पीसकर कपड़े से छानकर बारीक़ चूर्ण बना ले और किसी कांच के पात्र में रख लें। आवश्यकता अनुसार तीन सप्ताह से छ: सप्ताह तक ले। इस योग से गठिया का वह रोगी जिसने खाट पकड़ ली हो वह भी स्वस्थ हो जाता है। कमर-दर्द, हाथ पावं जंघाओं का दर्द एवं दुर्लब्ता मिटती है। यह एक उच्च कोटि का टॉनिक है।

Joint Rebuilder – घुटनों का दर्द, कमर का दर्द, सर्वाइकल, साइटिका या स्लिप डिस्क सबकी रामबाण दवा

विशेष

1. असगन्ध प्रयोग करने से पहले इसे दूध में उबालकर साफ़ कर लेना चाहिए और फिर सुखकर तब बनाना अच्छा रहता है। शीतकाल में इसका प्रयोग उपयुक्त रहता है।

2. उष्ण प्रकृति वाले इसका अधिक सेवन न करे।

3. आँव की शिकायत में इसे न लें।

4.तली हुई वस्तुएं या तेल, खटाई और बदिकारक वस्तुएं न खाएं।

5. जोड़ो का दर्द मिटाने के लिए बेसन की बिना नमक की रोटी देसी घी डालकर खानी चाहिए।

6. असंगंध का चूर्ण दो चम्मच की मात्रा से देसी घी से बनाये गये गुड के हलवे में 15 दिन प्रात: खाली पेट लेने से गठिया ठीक होता है। अन्य

विधि-बारीक़ असगंध का चूर्ण दो भाग, स्कन्थ का चूर्ण एक भाग और पीसी हुई मिश्री तीन भाग मिलाकर रख ले। इसे दो चम्मच (6 ग्राम ) की मात्रा से दिन में दो बार दूध या गर्म पानी या चाय के अनुपान से दो-तीन सप्ताह तक लेने से विभिन्न वात रोग तथा जोड़ो के दर्द नष्ट होते हैं।

[ये भी ज़रूर पढ़ें – यूरिक एसिड, संधिवात (gout)  का सरल घरेलु उपचार ]

13 comments

  1. ICC T20 world cup 2016

    I don’t know whether it’s just me or if everyone else experiencing problems with your blog.
    It appears like some of the text on your content are running off
    the screen. Can someone else please comment and let me know if this is happening
    to them too? This might be a issue with my internet browser because I’ve had this happen previously.

    Appreciate it

  2. Kiya Kairtis ghutno ke dard ko theek kar deta h..istemaal karne ka tareeqa kiya h..iski prize kitni h…kaise mangwaya ja sakta h.

    • Aadhi Adhuri Jankari Likhte Hai Ye Nahi Likha Churan Kitna or Kis Samay Khana hai.
      Kai Post me to esa lagta hai jaise jabardasti post kiya ho.

      • bahan ji isko aap raat ko sote samay garm paani se lijiye… aur agar bhojan kiya hua ho to isko bhojan ke 1 ghante ke baad hi lijiye…

  3. I AM SUFRING FROM ACIDITY PLEASE TELL ME MEDCINE

  4. i am suffering from severe pain in one feet ,my all reports are normal like uric acid,vitamins,calcium,thyroid evertbong is ok ,but pain is untolerable

  5. रमेश सर्राफ

    नमस्कार
    आपने अपने लेख में लिखा है की गठिया रोग के लिए बथुआ का रास पिने के।लिए परन्तु कितना पीना है वो नहीं लिखा है।
    कृपया रस की मात्रा बताये।

    • अरे भाई शुरू तो कीजिये, इसको अगर ज्यादा भी पी लेंगे तो कोई नुकसान नहीं होगा..

  6. Ravikant Prasad

    Joint of knee , leg has been stiffed from more than 3 years. Could you please provide me Soltuion?
    This is very serious problem.

  7. pavan Kumar mishra

    सर जी असगन्ध ये जो उष्ण प्रकृति वाले इसका अधिक सेवन न करे आपने बताया है । उष्ण का मतलब हमारे समझ में नही आ रहा है । प्लीज हेल्प मी
    my Gmail- [email protected]

Leave a Reply

Your email address will not be published.

DMCA.com Protection Status