Wednesday , 19 September 2018
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गर्भाशय की गांठ Ovarian cyst ( Fibroids ) का इलाज संभव है ओनली आयुर्वेद में

गर्भाशय की गांठ का इलाज Ovarian cyst Treatment in hindi, Ayurvedic Medicine for Fibroids

गर्भाशय की गांठ होना अर्थात Ovarian Cyst इस एक कारण से स्त्री को जीवन में बहुत कठिनाई से गुज़रना पड़ता है, एलोपैथि में डॉक्टर सीधे सीधे कह देते हैं के ऑपरेशन करवा लो, और ओवरी निकलवा दो, ऐसे में स्त्री गर्भवती नहीं हो सकती, और आज बहुत सारी औरतें सिर्फ इसी एक कारण से दर बदर भटक रहीं हैं, जिनके तो संतान हो गयी है वो तो मन मार के ओवरी निकलवा भी देती हैं, मगर जिनको अभी संतान नहीं हुई वो बेचारी क्या करें.

गर्भाशय की गाँठ के कारण Ovarian Cyst in hindi

आयुर्वेद ने गर्भाशय की गांठ Ovarian Cyst के लिए अपने खजाने में बहुत सारी औषधियां दी हुई हैं. ये समस्या पहले भी होती थी, मगर पहले बहुत कम स्त्रियों को होती थी, मगर आज यह समस्या हर दुसरे तीसरे घर में मिल जाती है, इसका कारण आज की बदलती जीवन शैली है. फ़ास्ट फ़ूड, जंक फ़ूड, कोल्ड ड्रिंक्स, धुम्रपान, शराब का सेवन, मांसाहार, उत्तेजक दवाएं, गर्भ निरोधक दवाओं इत्यादि का सेवन इत्यादि अनेक कारण है.

अगर कोई स्त्री गर्भाशय की गांठ से बचना चाहती है तो उसको तुरंत उपरोक्त लिखे हुए कारण बंद करके निमिन्लिखित बताई गयी जानकारी से अपना इलाज शुरू करना चाहिए, सिर्फ 3 महीने में गर्भाशय की गांठ समाप्त हो सकती है.

गर्भाशय की गाँठ क्या है Ovarian Cyst

गर्भाशय की गाँठ – Ovarian Cyst – Fibroid यानी रसौली। इसे ट्यूमर भी कहते हैं। रसौली ऐसी गांठें होती हैं, जो महिलाओं के गर्भाशय में या उसके आसपास पनपती हैं। बच्चेदानी या गर्भाशय में गाँठ (फाइब्रॉएड) एक प्रकार के मांसल ट्यूमर होते हैं जो गर्भाशय (गर्भ) की दीवार में बनते हैं। रसौली को चिकित्सकीय भाषा में लिओम्योमा (Leiomyoma) या म्योमा (Myoma) कहते हैं।  इसके कारण बांझपन का खतरा होने की आशंका रहती है। वैसे तो 16 से 50 साल की महिलाएं कभी भी इस बीमारी की चपेट में आ सकती हैं, लेकिन अक्सर 30 से 50 साल की महिलाओं में ये अधिक देखी जाती है। ये गांठें अलग-अलग आकार की होती हैं। इनका आकार तब बढ़ता है, जब एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ने लगता है, जैसे गर्भावस्था के दौरान। इनका आकर तब घटने लगता है, जब एस्ट्रोजन का स्तर गिरने लगता है, जैसे मेनोपॉज के बाद। बहुत सी महिलाओं को पता ही नहीं होता है कि उन्हें रसौली है क्यों कि उनमें ऐसे कोई लक्षण ही नहीं होते हैं

गर्भाशय की गांठ अर्थात बच्चेदानी में रसौली​

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ द्वारा एक अध्ययन के अनुसार, भारत में प्रजनन समय में 25% महिलाओं में गर्भाशय की गाँठ Ovarian Cyst पायी गयी है। इनके अलावा कई महिलायें ऐसी हैं जो छोटे फाइब्रॉएड से ग्रस्त हैं जिनकी संख्या अभी तक ज्यात नहीं है। देश / क्षेत्र की जनसंख्या विस्तार के आंकड़ों के अनुसार भारत में गर्भाशय रसौली का कुल जनसंख्या में अनुमान 5.3 करोड़ है।

गर्भाशय की गांठ Ovarian Cyst से बचाव – Prevention of Uterine Fibroids in Hindi

स्वस्थ जीवन शैली अपनाकर और उपरोक्त बताये गए कारण दूर करके फलों और सब्जियों का सेवन अधिक करके आप गर्भाशय फाइब्रॉएड से ग्रस्त होने की संभावना कम कर सकती हैं।

गर्भाशय की गांठ Ovarian Cyst का इलाज

आयुर्वेद में सर्वप्रथम स्त्री की माहवारी को सही किया जाता है, जैसे अगर माहवारी के दौरान अधिक खून आता हो, या पीड़ा होती हो या माहवारी आती ही ना हो इन सब कारणों को दूर कर के उसके अन्दर अगर खून की कमी है तो उसको पूरा करने के  पश्चात् ही गांठ का इलाज किया जाता है.

सर्वप्रथम हम इन उपरोक्त कारणों का इलाज आपको बताएँगे.

स्त्री संजीवनी – यह एक बेहतरीन स्त्री टॉनिक है, एलो वेरा – एलो वेरा को स्त्रियों का सच्चा साथी माना गया है, आजकल बाज़ार में एलो वेरा के नाम से बहुत घटिया एलो वेरा भी उपलब्ध हैं, जिनमे क्वालिटी युक्त कुछेक ही है. और पांच तुलसी जो के शरीर को किसी भी वायरल इन्फेक्शन से बचाती है.

गर्भाशय की गांठ Ovarian Cyst के लिए आप सुबह खाली पेट शौच जाने के 15 मिनट के बाद 30 ml स्त्री संजीवनी, 30 ml एलो वेरा, 5 बूँद तुलसी और 100 ml ताज़ा साफ़ पानी, इनको मिलाकर घूँट घूँट कर पियें, पीते समय मन में ये संकल्प रखें के आप स्वस्थ हो रहें हैं. इसके एक घंटे तक कुछ भी खाना पीना नहीं है. यही आप रात्रि के भोजन के एक घंटे बाद या बिलकुल सोते समय लीजिये.

अगर खून की कमी हो तो Haemoglobin booster 30 -30 ml सुबह शाम एक कप पानी में मिलकर खाने के 30 मिनट बाद ताज़े पानी के साथ लेना चाहिए.

जितने दिन दवा चले तो दूध और दूध से बने पदार्थ बंद कर देने चाहिए.

जब दो से तीन महीने में आपकी माहवारी और अन्य कारण बिलकुल सही हो जाएँ तो आप ये निमिन्लिखित प्रयोग करें.

100 ग्राम माजूफल को बारीक़ पीस लो इसमें 150 ग्राम सफ़ेद फिटकरी का फुला बना कर डाल लें और 100 ग्राम अनार के छिलके का पाउडर डालकर तीनो का मिश्रण बना लीजिये. एक मोटा मजबूत सूती धागा, 5 इंच का साफ़ सूती कपडा चोकोर आकर का हो इस में 2 चम्मच ऊपर बनाये हुए मिश्रण का डाल कर के पोटली बना लीजिये. इस पोटली को थोडा ढीला ही रखें और अब इसे मोटे  मजबूत सूती धागे से अच्छे से बांध दीजिये एक हिस्सा धागे का 10 इंच लम्बा रखना है अब इस पोटली को रात में बच्चे दानी के मुह के अन्दर रखना है और धागा बाहर रखें,  सुबह धागा पकड़ कर पोटली को बहार निकाल लीजिये. आप देखेंगे के इस प्रयोग से कुछ सफ़ेद द्रव्य, चर्बी के छिछ्डे, मांस या खून का रिसाव होगा, इस से घबराएँ नहीं इस प्रयोग को निरंतर 5 से 7 दिन करना है , रात को पोटली बना कर अन्दर रखनी है और सुबह निकाल कर फेंक देनी है. इस से आप की गर्भाशय की गांठ धीरे धीरे किसी भी रूप में पिघल कर बहार आ जाएगी. 7 दिन बाद 3 दिन का गैप लीजिये, 3 दिन बाद दोबारा कीजिये, और 15 दिन बाद अपना टेस्ट करवाएं. और टेस्ट में अगर गाँठ का आकार कुछ छोटा हुआ हो या ख़त्म हो गयी हो तो भी ऊपर बताई गयी दवाओं (स्त्री संजीवनी, एलो वेरा, तुलसी) का एक से तीन महीने तक निरंतर इस्तेमाल कीजिये.

यह प्रयोग निमिन्लिखित रोगों में अत्यंत फायदेमंद है.

  • Ovarian Cyst
  • Ovarian Cancer
  • Cervix Cancer

फिटकरी का डूश

इसी प्रयोग काल के दौरान 2 liter पानी को उबाल कर ठंडा होने के बाद उस में एक चौथाई चम्मच फिटकरी का फूला मिला कर उस पानी से जब भी पेशाब करने जाये तो पेशाब करने के बाद इस पानी से योनि को अच्छे से धोएं, इस कार्य को डूश कहा जाता है.

ध्यान रहे जो स्त्री यह प्रयोग कर रही है वह कमजोर न हो यदि कमजोर है तो पहले ऊपर बताये गयी दवाओं का सेवन करके तंदरुस्त हो जाये फिर यह प्रयोग करे क्योकि यह पोटली का प्रयोग करने पर कमजोरी होती है किसी किसी को पैर या पिंडलियों में दर्द भी, घबराहट और बेचेनी भी हो सकती है.

फिटकरी का फूला बनाने की विधि

जब तवे पर फिटकरी सकेंगे तो इसमें से पानी निकलेगा, जब पूरा पानी निकल जायेगा और फिटकरी तवे पर चिपकी रह जाएगी तो इसको खुरच कर रख लीजिये, यही फिटकरी का फूला है. फिर पीस कर तैयार कर लीजिये.

इस नुस्खे के दौरान पति पत्नी को दूरी बनाये रखनी है, एवं साफ सफाई का खास ध्यान रखे इस प्रयोग से किसी किसी को खुजली ( Itching ) भी हो सकती है.

Stri Sanjivani – स्त्री संजीवनी के फायदे.

  • माहवारी का समय पर ना आना
  • कष्टदायक माहवारी
  • अधिक रक्तस्त्राव
  • सफ़ेद पानी – ल्यूकोरिया की शिकायत
  • चिडचिडापन
  • थकान
  • कमरदर्द
  • झाइयाँ
  • शरीर में खून की कमी
  • योनी का ढीलापन
  • गर्भाशय में गाँठ होना
  • सेक्स की इच्छा ना होना इत्यादि गुप्त रोग

स्त्री संजीवनी उपरोक्त रोगों के लिए बेहद उपयोगी है.

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