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Thursday , 27 July 2017
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बलवीर्य स्तम्भन बढाने और पुरुष रोगों में ग़ज़ब है सेमल का स्वरस

सेमल का स्वरस बनाने की विधि.

जिस सेमल के वृक्ष में फल ना आयें हो अर्थात सेमल का नया वृक्ष उस सेमल के वृक्ष की नयी या कच्ची मूली या मूसली को खोद कर धुलाई कर लीजिये. इसको सिल पर खूब कूटो और महीन पीसो. पिस जाने पर रेजी या मलमल के कपड़े में रख कर, किसी मिटटी या कांच के बर्तन में निचोड़ लें. बस, यही सेमल का स्वरस है.

इसके स्वरस में थोड़ी मिश्री मिला कर पीने से इसका नित्य सेवन करने से अपार बल वीर्य बढ़ता है, स्तम्भन शक्ति बढती है शरीर की कान्ति निखरती और शरीर पुष्टि अर्थात कमज़ोर शरीर वाले हट्टे कट्टे हो जातें है. सेमल की मूसली के स्वरस की मात्रा 1 से 2 तोले तक है. अर्थात रोगी को अपने रोग अनुसार 10 से 25 ग्राम तक इसका सेवन करना चाहिए. यह सूजाक जैसे रोगों में भी अत्यंत प्रभावकारी है.

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