Friday , 15 December 2017
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ह्रदय को स्वस्थ रखने के लिए और यदि कोई समस्या है भी तो दवाओ के साथ ये जरुर करें !!

हथेली में ह्रदय को स्वस्थ रखने के लिए पॉइंट होता है जिस पर नियमित प्रेशर देने से ह्रदय को लाभ मिलता है (acupressure points for heart problems) ! प्रेशर देने के लिए उंगली या लकड़ी का इस्तेमाल किया जा सकता है ! दिल को स्‍वस्‍थ रखने के लिए हथेली के मध्य में बिंदु होता हैं अतः उस जगह पर दूसरे हाथ से दबाव डालना होता है !

पुराने ज़माने में लोग खुद अपने हाथों से घरेलू और खेती के कई कठिन मेहनत के काम करते थे जिससे अपने आप उनके हाथ के सारे एक्यूप्रेशर पॉइंट्स दब जाते थे और शरीर का बहुत भला होता था ! अब तो गाँव के लोग भी शहर के लोगों की तरह, सुविधा भोगी होकर आराम की जिंदगी जीना पसन्द करते हैं जिससे अब गावों में भी डायबिटिज, हर्ट आदि के मरीज अक्सर दिखने लगे हैं !
 हृदय लाल रंग के थैले जैसा और चार खण्डों वाला अंग होता है जो शरीर दोनाें फेफड़ों के बीच और छाती की बांयी तरफ होता है।इंसान के जीवन से मृत्यु तक हृदय अपना काम करता रहता है।  महिलाओं की उपेक्षा पुरूषों का हृदय का आकार बड़ा होता है।

हृदय को रोग से बचाना बहुत जरूरी है। हृदय की मुख्य समस्या जैसे हृदय घात, ब्ल्डपे्रशर और सीने में जलन आदि।
इसलिए हम आपको बता रहे हैं कैसे एक्यूपे्रशर के जरिए आप दिल की बीमारी से बच सकते हो।

एक्यूप्रेशर से हृदय रोग का उपचार:acupressure points for heart problems

ह्रदय से संबंधित प्रतिबिम्ब केंद्र बायें तलवे तथा बायीं हथेली में ऊँगलियों से थोडा नीचे होते हैं | जहाँ दबाने से अपेक्षाकृत अधिक दर्द हो अर्थात काँटे जैसी चुभन हो, उन केन्द्रों पर विशेष रूप से दबाव दें | ( देखें चित्र -१ ) 

ह्रदयरोगों (heart problem)के निवारण के लिए स्नायु संस्थान, गुर्दों तथा फेफड़ों का स्वस्थ होना बहुत जरूरी है | अत: इनसे संबंधित प्रतिबिम्ब केन्द्रों पर भी दबाव देना चाहिए | ( देखें चित्र – २ तथा ३ )

ह्रदयरोगों के निवारण तथा ह्रदय को सशक्त बनाने के लिए अंत:स्त्रावी ग्रंथियों ( पिट्युटरी, पीनियल, थायराँइड आदि ) की कार्यप्रणाली को अधिक प्रबल बनाने की आवश्यकता होती है |
अत: इनसे संबंधित प्रतिबिम्ब केन्द्रों पर भी दबाव देना चाहिए |
वर्तमान समय में अनियमित दिनचर्या, अप्राकृतिक खान-पान, व्यायाम तथा शारीरिक परिश्रम न करना, दवाइयों का अधिक सेवन करना, अपर्याप्त निद्रा, मानसिक तनाव, चिंता, ईर्ष्या, नशा करना आदि कारणों ह्रदयरोग बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं |

स्त्रोत : ऋषिप्रसाद

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