Saturday , 24 June 2017
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औषिधय गुणों से भरपूर सौंफ।

औषिधय गुणों से भरपूर सौंफ।  

सौंफ पेट साफ करने वाला, हृदय को शक्ति देने वाला, घाव, उल्टी, दस्त, खांसी, जुकाम, बुखार, अफारा, वायु विकार, रतौंधी, बवासीर (अर्श), पित्त, रक्तविकार, ज्वर, वमन (उल्टी), अनिंद्रा और अतिनिंद्रा, पेट के सभी रोग (अपच, कब्ज (अजीर्ण) दस्त, खाने के बाद तुरंत दस्त लग जाना, आंव आना, पेट का दर्द, खूनी बवासीर, पाचन, मासिक स्राव, संग्रहणी, बच्चो के दांत निकलना, खाज-खुजली, आंखों की रोशनी के लिए, दिन में दिखाई न देना, मोतियाबिन्द, बांझपन व गर्भपात, धूम्रपान, मुंह के छाले, याददास्त का कमजोर होना, अधिक भूख लगना, हिचकी आना, कान का दर्द, मुंह की दुर्गन्ध, मूत्ररोग, हकलाना, तुतलाना, बहरापन, मासिकधर्म सम्बंधी परेशानियां, प्यास अधिक लगना, गर्मी अधिक लगना, सिर का दर्द, माइग्रेन, स्तनों में दूध की कमी, नकसीरी, बेहोशी, हैजा, हृदय सम्बंधी परेशानियां, मानसिक पागलपन, नाभि का हटना (धरण) पसीना लाने के लिए शारीरिक शक्ति आदि के लिए प्रयोग किया जाता है।

सौंफ को मसालों का राजा कहा जाता है। सौंफ के औषधीय गुणों को हर कोई जानता है। इसमें अनेक चमत्कारी औषिधीय गुण मौजूद होते हैं जो कि स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होते है। सोंफ के रस से कई प्रकार के एन्जाईम भी बनाये जाते हैं। भोजन के बाद माउथ फ्रैशनर के तौर पर भी इसका प्रयोग किया जाता हैं। सौंफ का अचार में, मसालो में, पान में, आम की चटनी में, शरबत में, चाय में, इत्र और विभिन्न घरेलु नुस्खों आदि में पाचक के रूप में, औषधीयों में और सुगंघ के लिए, खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए कढ़ी एवं सूप में भी प्रयोग किया जाता है। और इन सब में सौंफ को विशेष स्थान हैं। सौंफ की तासीर ठंडी होती है। सौंफ का तेल भी कई प्रकार के रोगों का उपचार के लिए काम में आता है। सौंफ में कैल्शियम, सोडियम, फॉस्फोरस, आयरन और पोटेशियम जैसे महत्वपूर्ण तत्व होते हैं पेट के कई विकारों जैसे मरोड़, दर्द और गैस्ट्रो विकार, अस्थमा, कफ और खाँसी का इलाज हो सकता है और कॉलेस्ट्रोल भी काबू में रहता है। लीवर और आँखों की ज्योति ठीक रहती है। गुड़ के साथ सौंफ खाने से मासिक धर्म नियमित होता है। तवे पर भुनी हुई सौंफ से अपच के मामले में बहुत लाभ होता है।

सौंफ की उपयोगिता:-

सौंफ का रस दही के साथ मिलाकर हर रोज 2-3 बार सेवन करने अधिक भूख पर रोक लगती है।
सौंफ पीसकर प्रतिदिन सुबह पानी के साथ सेवन से पेट सम्बंधित सभी रोगो के लिए लाभकारी हैं।
बदहजमी होने पर सौंफ को उबालकर छान कर गुनगुना ठंडा करके पीने से गैस एवं बदहजमी दूर होती है।
सौंफ को पीसकर सिर पर लेप कने से सिर दर्द, गर्मी व चक्कर आना शांत होता है।
सौंफ के पत्तों का रस पानी में मिलाकर रोगी को पिलाने से पसीना आने लगता है।
सौंफ का शरबत बनाकर पीने से जी का मिचलाना बंद हो जाता है और पेट की गर्मी भी शांत हो जाती है।
पेट में वायु की शिकायत हो तो कुछ दिनों तक दाल अथवा सब्जी में सौंफ का छोंक लगा कर प्रयोग करे।
सामान मात्रा में सौंफ का रस और गुलाबजल मिलाकर पीने से हिचकी आना रुक जाती है।
सौंफ और थोड़े से पुदीने के पत्ते आधा रह जाने तक पानी में उबालें। इस पानी को ठंडा करके दिन में तीन बार सेवन करने से उल्टी होने पर या जी घबराने पर आराम आता है।
सौंफ में लौंग डालकर पानी में उबालकर काढ़ा बनाए इसे छानकर देशी बूरा या खांड मिलकर पीने से जुकाम शीघ्र ही ठीक हो जाता है।
सौंफ को घी में सेंक कर रख लें। जब भी धूम्रपान की तलब लगे तो इसे चबाये इससे धुम्रपान की लत धीरे धीरे छूट जाएगी।

सौंफ और मिश्री का समान मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना कर रख ले। खाने के बाद इस मिश्रण के दो चम्मच सुबह शाम दो महीने तक सेवन करने से दिमागी कमजोरी दूर हो जाती है तथा मंदाग्नि भी दूर होती है।

सौंफ, धनिया व मिश्री समान मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर भोजन के बाद एक चम्मच लेने से हाथ-पाँव और पेशाब की जलन, एसिडिटी व सिरदर्द का उपचार हो जाता है।

सौंफ ,धनिया और मिश्री मिलाकर दिन में दो तीन बार पानी के साथ लेंने से माइग्रेन दर्द (आधे सिर का दर्द) दूर होता है।

बच्चों के पेट के रोगों में दो चम्मच सौंफ का चूर्ण एक गिलास पानी में एक चौथाई पानी शेष रहने तक अच्छी तरह उबाल कर काढ़ा बना ले और छानकर ठण्डा कर लें। इसे दिन में तीन-चार बार एक-एक चम्मच पिलाने से पेट का अफारा, अपच, उलटी ,प्यास, जी मिचलाना, पित्त-विकार, जलन, पेट दर्द, भूख में कमी, पेचिश मरोड़ आदि शिकायतें दूर होती हैं।

सौंफ, जीरा और धनिये को बराबर मात्रा मिलाकर काढ़ा बनाये इसे सुबह-शाम सेवन से या सौंफ और मिश्री को पीसकर चूर्ण बना ले प्रतिदिन सुबह-शाम दूध के साथ सेवन से बवासीर के रोगो में लाभ होता है।

सौंफ और मिश्री को पीसकर प्रतिदिन दूध के साथ सेवन से खूनी बवासीर से छुटकारा मिलता है। या सौंफ, जीरा और धनियां को मिलाकर काढ़ा बनाये इसमें देशी घी मिलाकर नियमित सेवन करने से खूनी बवासीर से निजात मिलती है।
सौंफ रक्तशोधक एवं चर्मरोग नाशक है। खालिस सौंफ (बिना कुछ मिलाए) एक एक चम्मच सुबह शाम रोजना चबाने से या ठंडे पानी से नियमित सेवन करने से खून साफ हो जाता है और त्वचा भी साफ हो जाती है। प्यास उल्टी जी मिचलाना अजीर्ण पेट में दर्द और जलन पित्त विकार मरोडे आंव आदि में भी सौफ का सेवन बेहद लाभकारी होता है।

बुखार में रोगी यदि बार-बार उल्टी करता हो तो हरी सौंफ को पीसकर उसका रस निकालकर थोड़ी-थोड़ी देर बाद रोगी को पिलाएं। या सौंफ का काढ़ा बनाकर, छानकर इसमें थोड़ी सी मिश्री मिलाकर रोगी को पिलाएं तथा सौंफ के चूर्ण का सेवन करने से भी उल्टी बंद हो जाती है।

सौंफ, कालानमक और कालीमिर्च को 10 : 2 : 1 के अनुपात में लेकर पीस ले और सुबह-शाम खाना खाने के बाद एक चम्मच गर्म पानी के साथ लेने से कब्ज और कब्ज से उत्पन्न गैस, मरोड़ व पेट दर्द भी ठीक होता है। सौंफ और हरड़ को बारीक पीसकर चूर्ण बना लें। रात को खाना खाने के बाद यह चूर्ण सेवन करने से कब्ज दूर हो जाती है। अथवा बराबर का जीरा और सौंफ ले और दो दो गुना मात्रा में एलोवेरा का गूदा और सोंठ को मिलाकर पीस ले और छोटी-छोटी गोलियां बना लें और कब्ज के लिए एक गोली सुबह-शाम पानी के साथ ले। सौंफ की जड़ को सुबह-शाम सलाद के रूप में सेवन करने से कब्ज नष्ट होता है।

सौंफ को घी में भून कर इसमें मिश्री मिलाकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण हर रोज एक चम्मच 3 बार ठंडे पानी के साथ सेवन से आंव दस्त में आराम होता है। सौंफ का तेल, मिश्री में मिलाकर हर रोज तीन चार बार सेवन करने से दस्त में आंव आना बंद होता है। अथवा 4 : 2 :1 के अनुपात में सौंफ, बेलगिरी और ईसबगोल का मिश्रण बना ले इस चूर्ण के सेवन करने से आंव दस्त बंद हो जाता है। या सौंफ, धनिया और भुना हुआ जीरा ये सब बराबर मात्रा में लेकर खूब पीस ले थोड़ी-थोड़ी मात्रा में दिन में तीन बार मट्ठे के साथ सेवन करे आंव दस्त में आराम मिलेगा ।

सौंफ और छोटी हरड़ सामान मात्रा में लेकर घी में भून लें और कुल मात्रा के बराबर मिश्री मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण का सेवन करने से दस्तो में आराम आता है। और लस्सी, दही या रस के साथ सौंफ का चूर्ण पीने से दस्त में आंव व खून आना बंद होता है।

सौंफ, अजवायन और जायफल इन सब के चूर्ण को थोड़े सौंफ के रस के साथ दस्त वाले रोगी को पिलाएं आराम मिलेगा ।
सौंफ एक चम्मच धनिया एक चम्मच, जीरा आधा चम्मच और बराबर मात्रा में एक कलि वाला लहसुन लेकर बारीख पीस लें इच्छानुसार सेंधा नमक मिलाकर एक-एक चम्मच दिन में तीन चार बार मट्ठा के साथ सेवन से बार-बार का दस्त आना ठीक हो जाता है। और शरीर में पानी की कमी भी नहीं आएगी।

सौंफ को थोड़ा भूनकर मिश्री या शक्कर के साथ मिलाकर पीने से अथवा भुनी सौंफ, भुनी सोंठ और भुनी हरड़ 3 : 3 : 1 के अनुपात में मिलाकर खूब पीस ले। इसमें खण्ड या बूरा मिलाकर दो चम्मच दिन में 3 बार सेवन करने से दस्तो में आराम मिलता है।

यदि जिगर या प्लीहा रोग हो जाएं तो सौंफ से काबू में लाए जा सकते हैं। पेशाब जलन के साथ आता हो तो सौंफ का चूर्ण ठंडे पानी से, दिन में दो बार लेना फायदेमंद रहता है।
धनिया, सौंफ और मिश्री समान मात्रा में मिलाकर पीस लें इस चूर्ण का खाना खाने के बाद एक चम्मच हर रोज लगभग दो माह तक सेवन करने से हाथ परों में जलन छाती की जलन, नेत्रों की जलन, पेशाब की जलन व सिरदर्द की शिकायत दूर हो जाती है। चक्कर आना, अफरा, एसिडिटी व कमज़ोरी दूर होती है नींद नियमित होती है, नेत्र की ज्योति व याददस्त भी बढ़ती है

सौंफ में कॉलेस्ट्रोल को नियंत्रित करने की क्षमता होती है अत: भोजन के बाद सौंफ और मिश्री अवश्य चबाये जिससे हाजमा भी दुरूस्त रहता है। लीवर और आंखों की ज्योति भी ठीक रहती है। प्रतिदिन दो से पांच ग्राम सौंफ नियमित सेवन से मोतियाबिन्द ठीक हो जाता है।

आँखों की रोशनी की बेहतरी के लिए सौंफ, बादाम और मिश्री बराबर मात्रा में लेकर पीस लें। सुबह-शाम इस चूर्ण का एक चम्मच पानी के साथ दो महीने तक लगातार सेवन करने से आंखों की कमजोरी दूर हो जाती है।
हरी सौंफ का रस गाजर के रस में मिलाकर तीन माह तक सेवन करने से आंखों की रोशनी तेज होती है तथा रात को न दिखाई देने (रतौंधी) वाले को भी दिखाई देने लगता है।

कच्ची व भुनी सौंफ बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना ले दो चम्मच चूर्ण मठ्‌ठे के साथ सेवन करने से अतिसार (दस्तो) में लाभ होता है। तथा इस सौंफ चूर्ण को सुबह शाम भोजन के बाद पानी के साथ दो माह तक नियमित सेवन करने से नेत्र ज्योति में भी वृद्धि होती है।

सौंफ और मिश्री समान भाग लेकर पीस लें। इसकी एक चम्मच मात्रा सुबह-शाम पानी के साथ दो माह तक लें। इससे आँखों की कमजोरी दूर होती है तथा नेत्र द्रष्टि मजबूत होती है।
सौंफ का चूर्ण बनाकर रात को सोते समय मिश्री मिले दूध या पानी के साथ लेने से आंखों की रोशनी बढ़ती हैं। भोजन के बाद नियमित सौंफ खाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है। पाचन क्रिया में सुधार आता है और मूत्र रोग भी दूर होते है।

तवे पर भुनी हुई सौंफ के मिश्रण से अपच, एसिडिटी और दस्तो में भी बहुत लाभ होता है।
अच्छी उबली हुई एक चम्मच सौंफ को दिन में तीन बार लेने से अपच, अस्थमा, कफ और खांसी के इलाज के लिए काफी फायदेमंद है।

सौंफ और धनिया बराबर मात्रा में कूट-छानकर मिश्री मिलाकर खाना खाने के बाद एक चम्मच लेने से कुछ ही दिनों में हाथ-पाँव की जलन में आराम आता है।
सौंफ के चूर्ण को शकर के साथ बराबर मिलाकर लेने से हाथों और पैरों की जलन दूर होती है।

सोंफ एक अच्छा माउथ फरसनर भी है। सौंफ खाने से मुंह की दुर्गंध दूर होती है। सांसो को तरोताजा रखने के लिए भोजन के बाद सौंफ चबाइए। इससे पाचन क्रिया भी दुरुस्त रहती है।
सौंफ को पानी में उबालकर मिश्री डालकर ठंडा करके दिन में दो-तीन बार पीने से प्रयोग से खट्टी डकार में भी आराम मिलता है ।

दूध में सौंफ उबालकर, छान ले और मीठा मिलाकर सेवन से उल्टी आना बंध हो जाती है।
सौंफ तथा मिश्री को एक साथ पीसकर एक चम्मच चूर्ण दिन में दो तीन बार पानी के साथ सेवन से खूनी दस्तो में लाभ होता है।

सौंफ को उबालकर तथा मिश्री मिलाकर दिन में दो तीन बार सेवन करने से खट्टी डकारें आना बंद हो जाता है। तथा पेट दर्द के लिए भुनी हुई सौंफ चबाने से शीघ्र फायदा मिलता है।
बच्चे के जन्म के बाद यदि माता के स्तनों में दूध न उतरे तो सौंफ, सफेद जीरा व मिश्री को बराबर मात्रा में लेकर पीस ले इस का एक चम्मच चूर्ण दूध के साथ दिन में तीन बार सेवन करने से स्तनों में दूध उतरने लगता है।

सौंफ के पत्ते का काढ़ा बनाकर सेवन करने से स्त्रियों के स्तनों में दूध की कमी दूर होती है और पाचन क्रिया भी तेज होती है।
सौंफ, मिश्री और शतावर को मिलाकर चूर्ण बना लें और गर्म दूध में डालकर दिन में 4 बार पीने से स्त्री के स्तनों में दूध की कमी नहीं रहती। तथा सौंफ में पिसी हुई मिश्री मिलाकर सुबह-शाम नियमित गुनगुने दूध के साथ सेवन करने से भी स्त्री के स्तनों में दूध बढ़ जाता है।

गोरा व सुंदर बच्चे की चाह रखने वाली गर्भवती माता को गर्भावस्था के बाद से प्रतिदिन भोजन के बाद सुबह शाम सौंफ चबाना चाहिए। प्रतिदिन सौंफ और मिश्री नियमित रूप से चबा चबाकर खाने से खून और रंग दोनों साफ होते हैं।

सौंफ को उबालकर काढ़ा बना लें। इसमें थोडा सेंधा या कालानमक मिलाकर छान लें। और इसका प्रतिदिन सेवन करने से पेट की गैस, अफारा, मरोड और दर्द सब ठीक हो जाता है। यह बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए भी बहुत लाभदायक है।

बेल पत्थर का गूदा और सौंफ का सुबह शाम सेवन से अजीर्ण मिटता है तथा अतिसार (दस्तों) में लाभ होता है।
ग़ुड में पिसी सौंफ, मिलाकर एक सप्ताह तक रोज खाने से पेट की नाभि का अपनी जगह से खिसकना रुक जाता है।

बारबार मुंह में छाले होने पर सौंफ का काढ़ा बना कर इसमें चुटकी भर भुनी फिटकरी मिलाकर दिन में दो तीन बार गरारे करें। सौंफ को मुंह में चबाते रहने से भी बैठा गला साफ हो जाता है और गले में खारिश ठीक हो जाती है। सौंफ का चूर्ण बनाकर प्रतिदिन भोजन के बाद चबाने से और मुंह के छालों पर लगाने से भी छाले ठीक होते हैं।

रात्रि को कब्ज की शिकायत को दूर करने के लिए सोते समय गुनगुने पानी के साथ पिसी सौंफ का सेवन करने से कब्ज की शिकायत दूर होती है। या सौंफ को पीसकर इस को गुलकंद के साथ मिला कर सुबह-शाम भोजन के बाद खाएँ।
गले में खराश होने पर सौंफ को मुँह में डाल कर दिन में कई बार चबाने से बैठा गला धीरे धीरे साफ हो जाता है। मुँह की दुर्गंध भी दूर हो जाती है। और पाचन क्रिया भी सुधरती है।

सौंफ का रस और शहद मिलाकर दिन में दो तीन बार इसे चाटने से खांसी ठीक हो जाती है। या सौंफ में दुगनी मात्रा में अजवायन मिलकर पानी में उबाल लें और इसमें शहद मिलाकर छान लें। यह काढ़ा दो तीन चम्मच की मात्रा में हर घंटे के अंतर से रोगी को देने से खांसी में लाभ मिलता है। सौंफ के चूर्ण को भी शहद में मिलाकर लेंने से खाँसी में तुरंत आराम मिलता है।

पेट में वायु की शिकायत हो तो कुछ दिनों तक दाल अथवा सब्जी में सौंफ का छोंक लगा कर अवश्य प्रयोग करे लाभ मिलेगा।
सौंफ को पानी में उबालकर मिश्री डालकर ठंडा करके दिन में दो-तीन बार पीने से प्रयोग से खट्टी डकार में आराम मिल आता है।
सौंफ और जीरा सामान मात्रा में लेकर हल्का हल्का भूनले और स्वादानुसार काला नमक मिलाकर चूर्ण बना लें। यह प्रभाव शाली पाचक चूर्ण है। भोजन के बाद इसे गुनगुने पानी से लें।

सौंफ एक चम्मच, दो-दो चम्मच छोटी हरड़ और मिश्री लेकर बारीक चूर्ण बना लें। सोते समय 5 ग्राम गुनगुने पानी से लेंने से कब्ज, मंदाग्नि, गैस व आफरा में आराम मिलता है।
यदि माहवारी स्राव अधिक हो रहा हो तो सौंफ का सेवन करने से मासिक धर्म नियमित हो जाता है।

सौंफ की गीरी और बराबर की मिश्री मिलाकर बारीक पीसकर चूर्ण बना कर सुबह शाम ताजा पानी या गर्म दूध से फंकी लें। इसके सेवन से दिमाग ठंडा और स्मरण शक्ति तेज होती है।
सौंफ और बादाम की गिरी को पीसकर चूर्ण बना लें। रात को सोते समय गुनगुने दूध या पानी के साथ सेवन से भूलने वालो की समरण शक्ति तीव्र हो जाती है।

घमोरियों को दूर करने के लिए एक घडे़ में रात को आधा कप सौंफ भिगों कर सुबह उसी पानी से नहाएं। इससे शरीर की गर्मी और घमोरियां ठीक हो जाती हैं।
बुखार में कभी कभी तेज प्यास लगती है तो सौंफ को पानी में उबालकर ठंडा करके रोगी को थोडा थोडा करके पिलाए तेज प्यास शांत हो जाएगी।
सूखी खांसी होने पर खांसी आते ही मुंह में सौंफ रखकर चबाते रहना चाहिए इससे निश्चित तोर से आराम होता है।

सौंफ के चूर्ण का काढ़ा बना कर एक गिलास दूध और मिश्री मिलाकर रात को सोने से पहले कुछ महीनों तक नियमित सेवन से हकलाने का रोग ठीक हो जाता है।
सौंफ के चूर्ण का काढ़ा बना कर इसको दो तीन चम्मच घी और एक गिलास गाय के दूध में मिलाकर पीने से बहरापन ठीक हो कर कानो से ठीक से सुनाई देने लगता है।

सौंफ का काढ़ा बना लें और काढ़े को छानकर खांड मिलाकर सेवन करें। इससे पित्त बुखार ठीक होता है।
सौंफ और पोदीना, तीन चार लौंग तथा गुलाब का गुलकन्द मिलाकर बना काढ़ा हैजा से पीड़ित रोगी को सेवन कराने से हैजे में आराम मिलता है।
बदहजमी में बच्चे को प्रतिदिन सौंफ व पोदीना पीसकर शहद में मिलाकर चटाने से बदहजमी दूर हो जाती है।

सौंफ को रात को पानी में भिगो दें। सुबह सौंफ को इसी पानी में हल्का पीस कर छाल लें और मिश्री मिलाकर नियमित सेवन करने से हृदय रोग दूर होता है। तथा सौंफ और सूखा धनिया मोटा-मोटा कूटकर रात को एक कप गुलाब जल में भिगो दें। सुबह सौंफ व धनियां को इसी पानी में रगड़ मसल कर छान लें और किसमिस खाकर ऊपर से इस पानी को पीने से हृदय शूल में आराम आ जाता है।

सौंफ को नीबू के रस में मिलाकर भोजन के बाद थोड़ा-थोड़ा खाने से भोजन पचाने में आसानी होती है और पेट का भारीपन तथा बेचैनी भी दूर होती है।
एक गिलास पानी में दस ग्राम सौंफ में पुरानी ईमली और कालानमक मिलाकर शर्बत बनाकर पीएं। इससे पाचन शक्ति, मन्दाग्नि और कब्ज के रोग दूर होते है।
सौंफ के रस में थोड़ी हींग डालकर पीने से पेशाब खुल कर आता है। बताशे में सौंफ के तेल की दस पंद्रह बूंदे डालकर कर सेवन करने से भी पेशाब खुलकर आने लगता है।

रात को सौंफ पानी में भिगोकर रख दें सुबह सौंफ को छानकर चबा ले ऊपर से सोंफ के पानी को घूंट घूंट करके पीने से सभी मूत्ररोग रोग दूर होते हैं।
सौंफ और मिश्री को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना कर सुबह-शाम भोजन के बाद सेवन करने से शरीर को शक्ति व सफुर्ति मिलती है। इससे बुखार में भी फायदा होता है ।

सौंफ के पत्तों का काढ़ा प्रसूता स्त्री को पिलाने से खून साफ होता है गर्भाशय की शुद्धि होती है और सभी रक्तविकार दूर होते हैं।

सौंफ का काढ़ा बनाकर दूध में मिलाकर पीने से नींद न आना (अनिंद्रा) दूर होता है। अथवा सौंफ का काढ़ा बना कर दस पंद्रह ग्राम घी व इच्छानुसार मिश्री मिलाकर रात को सोते समय सेवन करें। इससे नींद अच्छी आती है। अथवा जब रोगी हर समय नींद में या सुस्ती में रहता है, ऐसे रोगी को सौंफ का काढ़ा बना कर थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर सुबह-शाम हफ्ते तक पिलाएं। इससे सुस्ती दूर होती है तथा जरुरत से अधिक नींद भी नहीं आती।

सौंफ, कालानमक और कालीमिर्च को 10 : 2 : 1 के अनुपात में लेकर पीस ले और सुबह-शाम खाना खाने के बाद एक चम्मच गर्म पानी के साथ लेने से कब्ज और कब्जसे उत्पन्न गैस, मरोड़ व दर्द भी ठीक होता है। सौंफ और हरड़ को बारीक पीसकर चूर्ण बना लें। रात को खाना खाने के बाद यह चूर्ण सेवन करने से कब्ज दूर हो जाती है। अथवा बराबर का जीरा और सौंफ ले और दो दो गुना मात्रा में एलोवेरा का गूदा और सोंठ को मिलाकर पीस ले और छोटी-छोटी गोलियां बना लें और कब्ज के लिए एक गोली सुबह-शाम पानी के साथ ले। सौंफ की जड़ को सुबह-शाम सलाद के रूप में सेवन करने से कब्ज नष्ट होता है।

सौंफ को घी में भून कर इसमें मिश्री मिलाकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण हर रोज एक चम्मच 3 बार ठंडे पानी के साथ सेवन से आंव दस्त में आराम होता है। सौंफ का तेल, मिश्री में मिलाकर हर रोज तीन चार बार सेवन करने से दस्त में आंव आना बंद होता है। अथवा 4 : 2 :1 के अनुपात में सौंफ, बेलगिरी और ईसबगोल का मिश्रण बना ले इस चूर्ण के सेवन करने से आंव दस्त बंद हो जाता है। या सौंफ, धनिया और भुना हुआ जीरा ये सब बराबर मात्रा में लेकर खूब पीस ले थोड़ी-थोड़ी मात्रा में दिन में तीन बार मट्ठे के साथ सेवन करे आंव दस्त में आराम मिलेगा ।

सौंफ और छोटी हरड़ सामान मात्रा में लेकर घी में भून लें और कुल मात्रा के बराबर मिश्री मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण का सेवन करने से दस्तो में आराम आता है। और लस्सी, दही या रस के साथ सौंफ का चूर्ण पीने से दस्त में आंव व खून आना बंद होता है।

सौंफ, अजवायन और जायफल इन सब के चूर्ण को थोड़े सौंफ के रस के साथ दस्त वाले रोगी को पिलाएं आराम मिलेगा ।
सौंफ एक चम्मच धनिया एक चम्मच, जीरा आधा चम्मच और बराबर मात्रा में एक कलि वाला लहसुन लेकर बारीख पीस लें इच्छानुसार सेंधा नमक मिलाकर एक-एक चम्मच दिन में तीन चार बार मट्ठा के साथ सेवन से बार-बार का दस्त आना ठीक हो जाता है। और शरीर में पानी की कमी भी नहीं आएगी।

सौंफ को थोड़ा भूनकर मिश्री या शक्कर के साथ मिलाकर पीने से अथवा भुनी सौंफ, भुनी सोंठ और भुनी हरड़ 3 : 3 : 1 के अनुपात में मिलाकर खूब पीस ले। इसमें खण्ड या बूरा मिलाकर दो चम्मच दिन में 3 बार सेवन करने से दस्तो में आराम मिलता है।

देसी गाय के दूध में थोड़ा सौंफ उबालकर प्रतिदिन तीन चार बार पिलाने से दांत आसानी से निकल आते हैं। अथवा सौंफ को पानी में उबालकर भी दिन में 3 से 4 बार बच्चे को पिलाने से दांत आसानी से निकल आते है।
बराबर का सौंफ व धनियां मिलाकर पीस लें और इसमें डेढ़ गुना घी और दो गुना मिश्री या खांड मिलाकर सुबह-शाम 25-30 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से हर प्रकार की खुजली में आराम आता है।

बांझ स्त्रियों को सौंफ का चूर्ण घी के साथ तीन माह तक सेवन करायें। इससे स्त्री गर्भ धारण करके माँ बनती है। और मोटापा भी समाप्त होता है। कमजोर स्त्री को सौंफ और शतावरी का चूर्ण बनाकर घी के साथ तीन माह तक सेवन करायें कमजोरी के साथ साथ बाँझपन भी दूर होता है।

गर्भपात का अंदेशा होने वाली गर्भवती महिला को सौंफ और गुलाब का गुलकन्द को 2 :1 के अनुपात में मिलाकर पानी के साथ पीसकर हर रोज नियमित पिलाने से गर्भपात की सम्भावना समाप्त हो जाती है। गर्भधारण करने के बाद से ही बच्चे के जन्म तक सौंफ का रस नियमित पीने से भी गर्भ सुरक्षित रहता है।

सावधानी : सौफ की तासीर ठंडी होती है इसलिए इसका अधिक या लगातार सेवन से शरीर में जकडन हो सकती है। इसके लिए सौंफ को गर्म तव्वे पर हल्का हल्का भुन लेते है या सोंठ मिलकर सेवन करने सी इस समस्या का समाधान हो जाता है अच्छा होगा कि इस विषय पर किसी जानकर चिकित्सक से राय ले ।

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