Friday , 30 October 2020
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प्रमेह के लिए अनुभूत और शीघ्र लाभाकरी नुस्खे –

प्रमेह के लिए अनुभूत और शीघ्र लाभाकरी नुस्खे –

परिचय-

विक्रत मूत्र का बार-बार होना ही प्रमेह का अर्थ है .आयुर्वेद में 20 प्रकार के प्रमेह होते है उनमे से एक प्रकार के                       प्रमेह को ही मधुमेह कहते है .आयुर्वेद का मानना है की प्रमेहो की चिकित्सा में उपेक्षा करने पर सभी प्रमेह                             मधुमेह में बदल जाते है .परन्तु आज कल आहार -विहार और खान -पान की अनियमितता भी मधुमेह का                           कारण बन गयी है .यहा पर 19 प्रमेह पर कुछ टिप्पणी लिख रहे है .

  1. उदक प्रमेह – कफज प्रमेह इस प्रमेह के रोगी अधिक मिलते है .यह जल के समान वर्ण वाला होता है .
  2. इक्षुक – ऐसे रोगी का मूत्र मधुर ,ठंडा ,कुछ चिपचिपा व गन्ने के रस के समान होता है .
  3. सुरामेह सांद्रमेह – इसमें कुछ मिला हुआ ताड़ी के समान या देशी शराब के समान गाढ़ा मूत्र आता है .रात को पात्र में रखने से गाढ़ा हो जाता है .ऐसे रोगी का मूत्र ऊपर स्वच्छ तथा निचे गाढ़ा रहता है .
  4. सर्पिमेह ,पुयेमह – इसमें मूत्र पुय की तरह होने के कारण इसे पुयेमह भी कहते है .यह व्रक्क विद्रधि आदि के हेतु से या वस्ती -दाह ,मूत्र प्रेषक नलिका दाह ,मूत्र मार्ग में कही भी विद्रधि के फूटने से होती है
  5. सिकतामेह – सिस्टीन यूरिया इस रोगी का मूत्र यदि बर्तन में रखे ,तो रेट कणों के समान कण मूत्र में मिलते है जोड़ो के दर्द से पीड़ित रोगियों के पेशाब में भी ये कण अधिकता से पाया जाता है .
  6. शने :मेह – इसमें मूत्र धीरे -धीरे बहुत कम मात्रा में बूंद -बूंद करके उतरता है .
  7. लवण मेह – सुश्रुत के अनुसार यह कफज प्रमेह के अंतर्गत आता है .
  8. पिष्ट्मेह शुक्लमेह – रोगी के पेशाब का रंग पिसे हुए चावल की धोवन के समान होता है .ऐसे रोगी के रक्त की जाँच करने पर रक्त में फालेरिया नामक क्रमी स्पष्ट नजर आता है .
  9. शुक्र मेह -इसमें शुक्र मिला मूत्र होता है .पेशाब में शुक्र के कीटाणु पाए जाते है यह शुक्रमेह बहुत अधिक स्त्री संसर्ग या अधिक ह्स्त्मेथुन के कारण होता है .
  10. फेन मेह – इसमें पेशाब बार- बार व झागदार होता है तथा इसमें लार जेसी तन्तु -युक्त एंव झागदार पेशाब होता है
  11. नील मेह – यह मूत्र अम्लयुक्त नीले रंग का होता है .
  12. हरिद्रा मेह ,पितप्रमेह ,कोल यूरिया – ऐसे रोगी का पेशाब हल्दी के पानी के समान पिला व कडवा होता है .
  13. क्षार मेह – ऐसा पेशाब मूत्र क्षारीयता बढ़ जाने के कारण होता है .रंग ,गंध और स्पर्श में यह पेशाब खारे जल जेसा होता है
  14. अम्ल मेह – यह भी पितज प्रमेह है .
  15. मंजीष्ठा मेह – इसमें पेशाब मन्जिष्ट के क्वाथ जेसा वर्ण तथा दुर्गन्ध युक्त होता है .
  16. शोणित मेह – यह पितज प्रमेह के अंतर्गत आता है तथा पेशाब जलन के साथ होता है .
  17. सर्पी मेह – इसमें मज्जा -मिश्रित पिप जेसा पेशाब होता है .,
  18. वसा मेह – पेशाब में चर्बी मिली होती है और इसका रंग वसा के समान होता है .
  19. हस्ती मेह – यह पेशाब हठी के मद के समान लेसदार .रुक -रुक व बड़े वेग से होता है .
  20. मधुमेह -इसमें पेशाब के साथ शर्करा का बहना और पेशाब मटमैला होता है इसका पूरा लेख आगे लिखा जायेगा

1.रोग – सांद्र मेह पर –

दवा —- हल्दी ,दारुहल्दी ,तगर व बायबिडंग समान भाग ले कर कूट-पिस  कर रख ले .और 20 ग्राम चूर्ण को 200                            ग्राम पानी में क्वाथ करे 50 ग्राम शेष रहने पर उतार कर छान ले तथा पी जाये

2.रोग -सिकता मेह पर काढ़ा –

दवा —- दारुहल्दी ,अरणी ,हरड ,बेहडा ,आंवला व पाठा बराबर -बराबर ले तथा कूट-पिस कर रखे और 20 ग्राम लेकर                        200 ग्राम पानी में क्वाथ बना ले और 50 ग्राम शेष रहने पर छानकर शहद मिलाकर सुबह शाम पिए या फिर                       अशुद हिंग 4 रती ,यवक्षार 4 रती दोनों की एक मात्रा है मिलाकर पेठे की 20-30 ग्राम रस के साथ सुबह शाम ले

3.-शने: मेह पर –

दवा —- अजवायन ,गिलोय ,खस बराबर लेकर कूट पिस ले यह चूर्ण 20 ग्राम लेकर 200 ग्राम पानी में काढ़ा करे                               और 50 ग्राम शेष रहने पर छानकर पी जाये .

4. लाला मेह –

दवा —- स्टोन की छाल ,चित्रक मूल ,हरड , जामुन की छाल को कूट पीसकर क्वाथ बनकर पिए .

5. शीत मेह –

दवा —- पाढ़ ,मुर्वा ,बड़ा गोखरू बराबर -बराबर लेकर क्वाथ करे और सुबह शाम पिलाये .

6. क्षार मेह –

दवा —- पहले रोगी को 4 दिनों तक शीतल चीनी का चूर्ण 2-2 ग्राम मात्रा में एक पाव पानी के साथ दे इससे पेशाब                             खुलकर आएगा और साफ हो जायेगा .

7 .नील मेह –

दवा —-कडवे परवल ,नीम की अंतर छाल ,आमला ,गिलोय इन सबको क्वाथ बनाकर शहद मिलाकर सेवन कराए .

8 .काल मेह –

दवा —- खस, धाय के फुल ,पठानी लोध ,चन्दन सबका क्वाथ बनाकर रोगी को पिलाये .

9 .हरिद्रा मेह -.

दवा —- आमला ,अमलतास ,खस ,नागरमोथा ,छोटी हरड समान मात्रा में  लेकर क्वाथ बनाकर सेवन करे .

10 .वसा मेह –

दवा —-अरणी की जड का क्वाथ दे .

11 .मज्जा मेह .

दवा —- पाढ़ ,कुटकी ,चित्रकमूल ,गिलोय ,कूड़ा छाल कूट -पिस काढ़ा बनाये ,काढ़े में आधा रती हिंग मिला दे .

12 .हस्ती मेह –

दवा —- मुर्वा ,सिरस व्रक्ष की छाल ,तेंदू व्रक्ष की छाल ,केथ के पेड़ की छाल ,पाढ़ ,धमासा ,ढाक की जड                                               बराबर लेकर कूटकर काढ़ा बनाकर शहद मिलाकर सुबह शाम चाटे .

13 .-प्रमेह में जब बार-बार पेशाब आये ,हाथ म्पेरो में तेज जलन हो ,पानी पिने पर प्यास ना बुझे

दवा —- प्रवाल पंचाम्रत दे .

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