शिर शूल (सिरदर्द) को दूर करने के अचूक व अनुभव नुस्खे -जरुर प्रयोग करे लाभ होगा
नी:स्संदेह आपने सिर दर्द के सम्बन्ध में अनेक योग देखें ,बनाये और अनुभव कियें होंगे
परन्तु ऐसा सरल और प्रभावोत्पादक योग आपके अनुभव में कदाचित ही आया होगा |
परिश्रम से बनाये और प्रक्रति का चमत्कार देखें | आपको आश्चर्य होगा की साधारण
सी वस्तु में इतना विचित्र प्रभाव ”
इसलिए निचे केवल ऐसे योग लिखे गये है जो साधारणतया देखने में आते है
अपनी आवश्यकता के अनुसार नुस्खा तेयार करे और अपना अनुभव शेयर करे
1 .- शिरशुलारी-
विधि –
10 ग्राम नोशादर को खूब बारीक़ पीसकर 20 ग्राम पानी में भली-भांति घोल ले और सावधानी से शीशी
में डाल ले | सिर दर्द से ग्रस्त रोगी के कान में एक या दो बूंद लपका दे | ईश्वर क्रपा से सिरदर्द उसी
समय मिट जायेगा | इसके साथ यह नुस्खा कान और दांत के रोगियों के दूसरी तरफ के कान में दो बूंद
टपकाए उसी समय दर्द मिट जायेगा |
2.- दालचीनी का काढ़ा –
विधि –
3 ग्राम दालचीनी को 250 ग्राम पानी में पकाए जब आधा पानो शेष रह उतारकर जाये तो थोडा गर्म-गर्म
सा रोगी को पिला दे यदि इसके साथ एक रती एस्प्रीन दी जाये तो अधिक अच्छा है
3.-धनिये का लेप –
विधि –
15 ग्राम धनिये को खूब पीसकर पानी के साथ लेप सा तेयार करे और मस्तिष्क पर लेप करे तुरंत
आराम आएगा | यह लेप गर्मी के सिरदर्द के लिए बड़ा गुणकारक है
4.- बनफशा का योग –
विधि –
बनफशा के 15 ग्राम पत्तो को बारीक़ पीसकर कुछ गर्म कर मष्तिस्क पर लेप करे | इश्वर क्रपा
से पहले दिन ही आराम हो जायेगा अन्यथा तीन दिनों में तो सिरदर्द बिल्कुल नहीं रहेगा
5 .-कपुर्री नस्य –
विधि –
नोसादर 5 ग्राम , कपूर एक ग्राम | पहले नोशादर को बारीक़ पिस ले और फिर कपूर में मिला ले
इसे शीशी में भरकर रखे और आवश्यकतानुसार काम में लायें | नस्य की भांति रोगी को सुंघावे |
उसी समय आराम होगा |
6 .-सिरदर्द नाशक –
विधि –
सांप की केंचुली 10 ग्राम को खूब बारीक़ पीसकर 10 ग्राम कुजा मिश्री के साथ मिलाकर खूब अच्छी
तरह से घुटाई करे और सावधानी से शीशी में भर दे यथा समय इस ओषधि की केवल एक रती की
मात्रा में लेकर बताशे में डालकर निगलवा ऊपर से तीन चार घूंट पिला दे | यदि केप्सूल में डालकर
सेवन कराए तो अधिक अच्छा है आसानी से ले सकते है | पुराने से पुराने सिरदर्द केवल एक दो मात्राओ
से भी दूर हो जायेगा और सदा के लिए छुटकारा मिलेगा
Only Ayurved आयुर्वेद जीवन जीने की कला हैं, हम बिना दवा के सिर्फ अपने खान पान और जीवन शैली में थोड़ा बदलाव कर के आरोग्य प्राप्त कर सकते हैं।

















