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चंद्र ग्रहण 2018: ग्रहण के समय भूलकर भी ना करें ये काम, बरतें ये सावधानी

Chandra Grahan 2018 Sutak

साल 2018 के माघ महीने की 31 तारीख को चंद्र ग्रहण हो रहा है। इस दिन किसी भी शुभ कार्य करने की मनाही होती है। चंद्रग्रहण दिखाई देने से सूतक काल भी शुरू हो जाएगा। बुधवार को सूतक काल सुबह 07 बजकर 07 मिनट पर शुरू होकर रात 08 बजकर 41 मिनट पर खत्म हो जाएगा। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद हो जाएंगे। सूतक काल में शुभ कार्य करना अशुभ माना जाता है।

क्या होता है सूतक काल – जब बच्चा जन्म लेता है या किसी की मृत्यु होने पर उस घर में सूतक काल शुरू हो जाता है। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। हिंदू समाज में सूतक से जुड़े कई विश्वास या अंधविश्वास मौजूद है। सूतक के दौरान परिवार को कोई भी सदस्य ना तो किसी धार्मिक कार्य में भाग ले सकता है और ना ही मंदिर जा सकता है। सूतक काल मुख्यत: 10 दिनों तक चलता है।

इस दौरान घर या मंदिर में पूजा पाठ करना वर्जित होता है। जब तक घर में हवन नहीं किया जाता तब तक सूतक काल समाप्त नहीं होता है। सूतक काल में दान तथा जपादि का महत्व होता है। इस दौरान पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए। इस दौरान मंत्रों का जाप करना चाहिए। इस दौरान किये जाने वाले हवन कल्याणकारी माने जाते हैं।

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चंद्र ग्रहण समय: भारतीय ज्योर्तिविज्ञान परिषद के मुताबिक,पृथ्वी चंद्र ग्रहण के प्रभाव वाले क्षेत्र में 04 बजकर 22 मिनट में दाखिल होगी। दरअसल, इस दौरान पृथ्वी की एक आंशिक बाहरी छाया चंद्रमा पर पड़ेगी। आंशिक चंद्रग्रहण शाम 5 बजकर 18 मिनट से शुरू होगा। पूर्ण चंद्रग्रहण शाम 06:22 बजे से लेकर 07:38 बजे तक चलेगा। आंशिक चंद्रगहण 8 बजकर 41 मिनट पर खत्म होगा। चंद्रमा पृथ्वी की छाया से पूरी तरह रात 9 बजकर 39 मिनट पर बाहर निकलेगा।

चंद्र ग्रहण 2018 समय: जानिए भारत में कब से कब तक रहेगा ग्रहण का प्रभाव

चंद्रमा के उदय का समय: कोलकाता में 5:17 बजे, दिल्ली में 6:04 बजे, चेन्नई में 6:04 बजे, मुंबई में 6:26 बजे

चंद्र ग्रहण 2018: ग्रहण के समय भूलकर भी ना करें ये काम, बरतें ये सावधानी

ग्रहण काल के दौरान आलस्य ना करें। ग्रहण काल से पहले स्नान कर लें। इसमें ध्यान, पूजा उपासना और मंत्र जप विशेष शुभ होता है। अगर आप बीमार नहीं है तो ग्रहण काल में भोजन और भौतिक कार्य ना करें। गर्भवती महिलाओं को ग्रहणकाल में सोना नहीं चाहिए। चंद्रग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं के घर से बाहर निकलने को भी सही नहीं माना जाता है। ऐसे में इस समय भगवान का भजन-कीर्तन करना चाहिए और मन में किसी भी तरह का शक-संदेह नहीं रखना चाहिए।

ग्रहणकाल के पहले बने हुए भोजन में तुलसी के पत्ते डालें। तुलसी के पत्तों में पारा होता है जो नेगेटिव एनर्जी को दूर करता है। घर के तमाम कोनों को गोबर से लीप दें। क्योंकि गोबर के अंदर रेडिऐशन अवशोषित करता है। यदि घर में कोई व्यक्ति बीमार है तो उसे भोजन करवा सकते हैं। ग्रहण काल के दौरान चाकू या तेज धार का इस्तेमाल ना करें। क्योंकि इस दौरान इसका प्रयोग करने से नुकसान हो सकता है। इस दौरान चंद्रमा प्रभावित रहेगा और मन का स्वामी चंद्रमा होता है इसलिए इस दौरान आपका मन प्रभावी हो सकता है, जिससे मन पर इसका नेगेटिव प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए कहा जाता है इस दौरान तेज धार वाले हथियारों से दूरी बनाए रखें। ग्रहण काल के दौरान भगवान शिव का ध्यान करें।

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