Tuesday , 25 September 2018
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जिगर के रोगो को ठीक करने के Acupuncture Point.

जानिये जिगर के रोगो को ठीक करने के Acupuncture Point.

आइये पहले समझे के जिगर क्या हैं और क्या काम करता हैं।

जिगर, लिवर या यकृत हमारे शरीर में सबसे बड़ी ग्रंथि है। यह पेट में दायी तरफ ऊपर भाग में होता है और इसका काफी भाग पसलियों से ढका रहता है। जिगर जिगर का वजन व्यक्ति के शरीर के वजन का दो प्रतिशत होता है। जिगर हमारे शरीर में जितना खून परवाह करता है उसका लगभग चौथाई हिस्सा जिगर में संचित रहता है।

पाचन क्रिया में जिगर का महत्वपूर्ण योगदान है। जो भोजन हम खाते हैं उसको अन्य अंगों के लिए शक्तिवर्धक रूप जिगर की प्रक्रिया से ही मिलता है।

1. जिगर कर्बोहाड्रेट, वसा, प्रोटीन, लोहा तथा विटामिन को शरीर के लिए उपयोगी बनाने का कार्य करता है। अपने में संचित की हुई वसा को जिगर ऐसा रूप देता है वह शरीर तंतुओं को शक्ति तथा उष्णता प्रदान कर सके।

2. जिगर का महत्वपूर्ण कार्य एक तरल घने क्षार पदार्थ पित्त को बनाना है। ऐसा अनुमान लगाया गया है की 24 घंटे में जिगर से लगभग 500 से 1000 मिलीलीटर पित्त निकलता है। अपनी इस किर्या द्वारा जिगर कब्ज नही होने देता। पित्त लाभकारी है पर नुकसदायक सिद्ध हो सकता है। अगर पित्त का निकास न हो और यह रक्त परवाह में मिल जाय तो पीलिया भी हो सकता है।

3. पित्त का एक लाभ यह है की यह आंत में दुर्गन्ध पैदा होने से रोकता है।

4. जिगर रक्त को घने करने वाले तत्व पैदा करता है। अगर यह तत्व रक्त में न हो तो मामूली सी चोट लगने से भी शरीर का सारा रक्त बह जाये और मृत्यु हो जाए।

5. पाचन क्रिया में योगदान के अतिरिक्त जिगर रक्त प्रवाह में प्रकट होने वाले हानिकारक तत्वों को भी नष्ट और लाल रक्त कणिकानो के निर्माण और विनाश में भी सहायता करता हैं।

जिगर के रोग

जिगर खराब होने की वजे से रक्त में कमी, जल्दी साँस फूलना, हिचकी, खट्टी डकार आना, मुंह में पानी भर आना, तथा छाती में जलन होना। इसके इलावा कमजोरी के कारण मानसिक संतुलन ठीक न रहना, दाढ़ी-मुछ के बाल गिरने, स्मरण शक्ति कम होना, जिगर का कैंसर आदि रोग हो जाते है।

एक्यूप्रेशर द्वारा जिगर के रोगो का इलाज

जिगर से संबंधित प्रतिबम्ब केंद्र केवल दायें पैर और केवल दायें हाथ में होते है जैस कि चित्र में दर्शाया गया है।

जिगर के रोगो की स्थिति में सख्त चारपाई या भूमि पर लेट कर पेट के दायी तरफ पसलियों के निचे चित्र के अनुसार दोनों हाथों की अंगुलियों से प्रेशर स्वयं भी दे सकते है या फिर किसी से दिलवा सकते है।

जिगर को हमेशा स्वस्थ रखने के लिए ऊपर बताये गए प्रतिबिम्ब केन्द्रो पर नियमित रूप से प्रेशर देना चाहिए और जहा तक हो सके निम्बू, प्याज, अदरक, ककड़ी, मूली, मौसमी तथा संतरा लें। खुली हवा में सैर तथा हल्का व्यायाम करें। मैदा व खोया की वस्तुएं, चीनी, आलू, तथा तली हुई चीजें बिलकुल न खाएं।

[Read. नाक से संंबंधित रोग, एक्यूप्रेशर द्वारा करें ठीक।]

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  1. GREAT THANKS FOR GOOD INFORMATIONS.

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