Friday , 20 September 2019
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कर्ण रोगो (कान के रोग)के अचूक और रामबाण घरेलू आयुर्वेदिक नुस्खे -एक बार अवश्य आजमाएं

कर्ण रोगो (कान के रोग)के अचूक और रामबाण घरेलू आयुर्वेदिक नुस्खे -एक बार अवश्य आजमाएं

1. विधि

मुली का पानी 50 ग्राम और तिल का तेल 20 ग्राम |दोनों को मंद मंद आग पर रखकर पकायें |जब पानी

जलकर केवल तेल शेष रह जाये तब उतार ले और शीशी में भर ले |कान में दो बूंद डाले बहुत जल्दी

बहरापन,झनझनाहट में लाभ मिलेगा

2.-कान से पिप निकलना –

विधि

अंजरुत (लाही ) को थोडा बारीक़ करके इसमें थोडा सा मधु मिलाये |इसमें रुई की एक बत्ती तर करके

कान में रखे |एक दो बार के लगाने से कान का सारा मल निकल जायेगा और कान बिल्कुल साफ हो जायेगा |

बड़ा विचित्र और विस्मयकारी योग है

3. कर्ण स्राव-

विधि

नीम के हरे पत्ते बारीक़ करके शहद मिला करके खूब अच्छी तरह पिस ले | इसे किसी कपड़े से छानकर

सावधानी से शीशी में भर ले |आवश्यकता के समय दिन में तीन बार दवाई डाले | तीन चार दिन प्रयोग

से ही पूर्ण आराम हो जायेगा

4 .कर्ण के कीड़े

विधि

एलवा 5 ग्राम , पण्डालू का रस 10 ग्राम | एलवा पण्डालू के रस में अच्छी तरह घोल ले |आवश्यकता के समय

थोडा सा कान में डाले सारे कीड़े मरकर बाहर गिर पड़ेंगे | यह बड़ा प्रभाव दिखाता है इससे कीड़ो के सात

कान की पीड़ा भी मिटती है

5 . सर्व कर्ण पीड़ा नाशक

विधि

12 ग्राम गाय के घी में लहसुन की तीन पोथिया जलाये | जब लहसुन काले पड़ जाये तो बाहर निकालकर

फेंक दे |और घी को शीशी में भर ले | सदा दो से तीन बूंद कानो में डाला करे | इससे सर्व प्रकार की कर्ण पीड़ा

मिट जाती है | पीप निकलना इत्यादि बंद हो जाती है | यह बहुत बार अजमाया और अचूक दवा है

 

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