Wednesday , 14 November 2018
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मूसली पाक ( Musli Pak ) पुरुषों के लिए एक आयुर्वेदिक कामोद्दीपक, बल्य व पौष्टिक औषधि !!

मूसली पाक ( Musli Pak ) एक आयुर्वेदिक कामोद्दीपक, बल्य व पौष्टिक औषधि है। पुरुषों में यह शारीरिक शक्ति को बहाल करने के लिए प्रयोग की जाती है। यह एक पौष्टिक टॉनिक के रूप में कार्य करती है और शरीर को बल देती है। यह अपने कामोद्दीपक लाभ के लिए प्रसिद्ध है और पुरुषों की स्वास्थ्य समस्याओं के लिए बहुत लोकप्रिय है। यह पुरुषों में सहन-शक्ति, ताकत, समय और प्रदर्शन में सुधार करता है। इन लाभों के अतिरिक्त, यह सामान्य दुर्बलता और शरीर के वजन को बढानें के लिए भी प्रयोग किया जाता है। भारत में खिलाडी इसे व्यायाम सहनशक्ति और क्षमता को सुधारने के लिए भी प्रयोग करते है।

घटक द्रव्य एवं निर्माण विधि

मूसली पाक ( Musli Pak ) में मुख्य घटक सफेद मूसली है। यह शारीरिक शक्ति सुधारने के अति हितकारी सिद्ध हुई है। योग चिंतामणि के अनुसार मूसली पाक में निम्नलिखित घटक द्रव्यों है:

घटक द्रव्यों के नाम मात्रा

सफेद मूसली 16 भाग, गाय का दूध 200 भाग,गाय का घी 16 भाग, चीनी 50, सेमल गोंद या मोचरस 8 भाग, नारियल 2 भाग, बादाम 2, ग
चिरोंजी 2 भाग, जायफल 2 भाग, लौंग 2 भाग, केसर 2 भाग, तुम्बरू 2 भाग ,जटामांसी 2 भाग, कौंच बीज 2 भाग, दालचीनी 2 भाग, इलायची 2 भाग, तेजपात 2 भाग, नागकेसर 2 भाग, सोंठ 2 भाग, काली मिर्च 2 भाग, पिप्पली 2 भाग, जावित्री 2 भाग,

source : योग चिंतामणि, अध्याय 1 और भारत भैषज्य रत्नाकर 5207

मूसली पाक  ( Musli Pak ) के निर्माण की विधि

सफेद मूसली और गाय का दूध मिलाएं।
मिश्रण को खोए (मावा) जैसा अर्द्ध ठोस बनाने के लिए उबालें।
फिर मावा में गाय का घी मिलाएँ। इसे तबतक पकाएं जब तक यह भूरे रंग का ना हो जाए।
पानी और चीनी का उपयोग कर चाशनी तैयार करें।
अब, चाशनी को मिश्रण में मिलाएँ, मिश्रण को अच्छी तरह मिलाने के लिए इसे उबालें।
अब, अन्य सामग्रियां मिलाएँ और कांच के बर्तन या मर्तबान में सुरक्षित रखें।

नोट: योग चिंतामणि में बताये गए फॉर्मूले में भस्म और रस औषधि जैसे अभ्रक भस्म, लोह भस्म, और रस सिंदूर आदि का वर्णन नहीं किया गया। बाजार में उपलब्ध होने वाले मूसली पाक के योगो में इनका मिश्रण भी किया जाता है। आप खरींदे से पहले घटक द्रव्यों की जाँच आवश्य करें।

आमतौर पर बाजार में उपलब्ध मूसली पाक ( Musli Pak ) में निम्नलिखित घटक द्रव्य भी पाए जा सकते है:

अकरकरा, अभ्रक भस्म, अश्वगंधा, कमल गट्टा, गोक्षुर, चित्रकमूल, तल मखाना, बाला बीज, मकरध्वज, लोह भस्म, वंग भस्म, वंशलोचन
शतावरी, हरीतकी

मूसली पाक  ( Musli Pak ) में घटक द्रव्य या उनके अनुपात विभिन्न ब्रांडों या निर्माताओं के अनुसार भिन्न हो सकते हैं। यह परिवर्तन विभिन्न शास्त्रीय ग्रंथों में से फॉर्मूले चुनने के कारण है। हालांकि, सभी ब्रांडों के मूसली पाक ( Musli Pak ) में मुख्य घटक द्रव्यों में कुछ ख़ास अंतर नहीं है और सब एक से स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते हैं।

औषधीय कर्म (Medicinal Actions) मूसली पाक ( Musli Pak ) में निम्नलिखित औषधीय गुण है:

प्रतिउपचायक – एंटीऑक्सीडेंट, पौष्टिक – पोषण करने वाला, बल्य – शारीर और मन को ताकत देने वाला, वाजीकरण,शुक्रजनन, शुक्रस्तम्भन, वीर्यवर्धक, शुक्रवर्धन, कामोद्दीपक, बृहण, गर्भाशय-बल्य, श्वेतप्रदरहर ।

आयुर्वेद के अनुसार, मूसली पाक ( Musli Pak ) मुख्य रूप से वात दोष शमन करता है और कफ दोष को बढ़ा सकता है। अधिकांश रोगों में जिनमें इसको दिया जाता है उन में मुख्यतः वात दोष प्रदान कारण होता है। यह आहारनली में स्निग्ध या स्नेह गुण बढ़ा सकता है।

श्री कामदेव रस – कामी पुरुषों का अमृत – स्त्री के गर्व को हरने वाला कामिनी गर्वहारी रस

चिकित्सकीय संकेत (Indications)
मूसली पाक ( Musli Pak ) निम्नलिखित व्याधियों में लाभकारी है :

  • शीघ्रपतन
  • शारीरिक कमजोरी
  • क्षीण कामेच्छा
  • व्यसन या बुढ़ापे के माध्यम से पुरुष शक्ति कम होने पर
  • मर्दाना कमजोरी या दुर्बलता
  • इरेक्टाइल डिसफंक्शन
  • नपुंसकता
  • शुक्रक्षय – अल्पशुक्राणुता
  • मांसपेशी में कमज़ोरी
  • शारीरिक थकान
  • प्रदर रोग

मूसली पाक ( Musli Pak ) के औषधीय लाभ एवं प्रयोग (Benefits & Uses of Musli Pak )

आयुर्वेद में मूसली पाक  ( Musli Pak ) वाजीकरण चिकित्सा (आयुर्वेदिक कामोद्दीपक थेरेपी) के लिए एक लोकप्रिय शास्त्रीय औषधि है। यह पुरुष बांझपन या अल्पशुक्राणुता और पुरुष प्रजनन प्रणाली के अन्य विकारों के उपचार में उपयोगी है। मूसली पाक ( Musli Pak ) शारीरिक शक्ति में सुधार लाता है और शरीर को पोषण प्रदान करता है।

मूसली पाक में पुरुषों में हार्मोन की क्रिया को ठीक करता है और टेस्टोस्टेरोन के स्तर में सुधार करता है। पुरुषों में यह नपुंसकता दूर करने में भी सहायक सिद्ध होता है।

मूसली पाक  ( Musli Pak ) की समग्र क्रिया प्रजनन प्रणाली को शक्ति प्रदान करना है और उसके प्राकृतिक कार्यों को बनाए रखना है। यह शुक्रजनन का कार्य करता है और यह शुक्राणुओं की गुणवत्ता में सुधार लाता है।

यह आयुर्वेद में बृहन चिकित्सा के लिए भी एक अच्छी दवा है। यह शरीर का वजन बढ़ा सकता है। इसलिए इसका प्रयोग शरीरिक वजन बढ़ाने के लिए भी किया जाता है।

मांसपेशियों में कमजोरी और थकान

मूसली पाक  ( Musli Pak ) मांसपेशियों की ताकत बढ़ाता है। वास्तव में, यह मांसपेशियों की थकान को कम करने में मदद करता है। यह मांसपेशियों को पोषण प्रदान करता है। जिन रोगियों को थोड़ा सा काम करते ही मांसपेशियों की थकान हो जाती है, यह उन सब के लिए एक उत्तम औषधि है।

दुर्बलता और अल्प-भार

मूसली पाक  ( Musli Pak ) को कुपोषण से पीड़ित लोगो में क पोषक आहार की तरह प्रयोग किया जा सकता है। हालांकि, इसके साथ भूख बढ़ाने वाली औषधि का भी प्रयोग करना चाहिए। आरम्भ में, इसका प्रयोग कम मात्रा खुराक (अर्थात 1 से 2 ग्राम) में करना चाहिए। धीरे-धीरे इसकी मात्रा भूख के अनुसार बढ़ानी चाहिए।

उच्छायी शिथिलता (इरेक्टाइल डिसफंक्शन)

मूसली पाक ( Musli Pak ) शिश्न-मांसलता को शक्ति प्रदान करता है और कड़ेपन में सुधार करता है, जो स्तंभन ऊतकों को देर तक स्तंभन के लिए मदद करता है। मूसली पाक ( Musli Pak ) के कुछ फार्मूले में बंग भस्म और अकरकरा होती है, जो उत्तेजक और इरेक्टजनिक प्रभाव भी डालती है।

 

प्रदर रोग

मूसली पाक ( Musli Pak ) प्रदर से ग्रसित महिलाओं को प्रदर से राहत दिलाने के लिए प्रयोग किया जाता है। यह अप्राकृतिक स्राव को कम करता है। यह इसके कारण महिलाओं आने वाली शारीरिक कमजोरी को दूर करता है। यह उन महिलाओं के लिए भी उपयोगी है, जिन्हें प्रदर के साथ-साथ पीठ के निचले हिस्से में दर्द रहता है।

पुरुष बांझपन व अल्पशुक्राणुता

मूसली पाक  ( Musli Pak ) को सामान्यतः अल्पशुक्राणुता के कारण होने वाले पुरुष बांझपन के उपचार के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह शुक्रजनन, शुक्रवर्धन और वीर्यवर्धक औषधि है। इसमें उपस्थित सफेद मूसली टेस्टोस्टेरोन स्तर में सुधार करता है और वृषण कार्यों को बढ़ाता है।

मात्रा एवं सेवन विधि (Dosage)
मूसली पाक ( Musli Pak ) की सामान्य औषधीय मात्रा व खुराक इस प्रकार है:

औषधीय मात्रा (Dosage)
वयस्क को मुसली पाक ( Musli Pak ) 3 से 24 ग्राम और वृद्धावस्था यानि के 60 वर्ष से ऊपर वाले व्यक्ति को  3 से 6 ग्राम

सेवन विधि
मुसली पाक लेने का उचित समय भोजन के 2 से 3 घंटे बाद दिन में 2 बार – सुबह और शाम दूध के साथ ले ।
आप के स्वास्थ्य अनुकूल मूसली पाक ( Musli Pak ) की उचित मात्रा के लिए आप अपने चिकित्सक की सलाह लें।

मूसली पाक के दुष्प्रभाव (Side Effects)

हालांकि, मूसली पाक ( Musli Pak ) में कुछ सामग्री ऐपेटाइज़र (पाचन वर्धक) और पाचन उत्तेजक हैं, लेकिन फिर भी मूसली पाक पचाने के लिए भारी है। इसलिए इसे ठीक से पचाने में लंबा समय लग सकता है। कमजोर पाचन शक्ति वाले कुछ लोगों में, इससे भोजन की जल्दी संतुष्टता या भूख की हानि या भोजन करने की इच्छा की हानि हो सकती है।

कुछ मामलों में जो मूसली पाक ( Musli Pak ) को आसानी से हजम नहीं कर सकते हैं, यह भी कब्ज का कारण भी बन सकता है।

नोट: मूसली पाक ( Musli Pak ) के कुछ ब्रांडों में हरबोमिनरल तत्व होते हैं। इसका अर्थ यह है कि इसमें भारी धातुओं सहित कुछ खनिज तत्व भी होते हैं। इसलिए, आपको इसे खरीदने से पहले इसके घटकों के लेबल को पढ़ना चाहिए।

कई आयुर्वेदिक डॉक्टरों के अनुभव और रोगविषयक उपयोग के अनुसार, इससे किसी भी गंभीर अंग क्षति होने की कोई संभावना नहीं है। फिर भी सतर्कता प्रयोजन के लिए, मूसली पाक को अधिकतम 6 सप्ताह से अधिक लगातार नहीं लेना चाहिए।

 

मूसली पाक के बारे में कुछ आम सवालों के जवाब जो आप जानना चाहेंगे ।

यदि मूसली पाक ( Musli Pak ) के कारण भूख में कमी आए तो क्या करना चाहिए?
आम तौर पर कम क्षुधा का कारण इसका भरी मात्रा में शुरू से ही मूसली पाक का सेवन करना है। यदि ऐसा हो तो आपको इसका प्रयोग कुछ दिनों के लिए (3 से 5 दिन) बंद कर देना चाहिए और कुछ दिनों के बाद इसको कम मात्रा में फिर से शुरू करना चाहिए। फिर धीरे-धीरे इसकी खुराक में वृद्धि करें।

यदि फिर भी यह आप की भूख कम करती है, तो आपको कुछ हर्बल ऐपेटाइज़र या लीवर एंजाइम लेने की आवश्यकता है, जो भूख और पाचन क्रिया में सुधार के लिए मदद कर सकते हैं।

अगर यह कब्ज का कारण बनता है तो मुझे क्या करना चाहिए?
मूसली पाक ( Musli Pak ) में सफेद मूसली की स्निग्ध गुणवत्ता होने के कारण कब्ज हो सकता है। आम तौर पर, कब्ज को कम करने के लिए त्रिकटु चूर्ण, पंचकोल चूर्ण, आरोग्यवर्धिनी वटी या कोई अन्य दवा को यकृत के सुचारू कार्य करने के लिए प्रयोग किया जाता है।

आपको ऐसा भोजन करना चाहिए जिसमें फाइबर अधिक हों। इसके अतिरिक्त इसबगोल को भी लिया जा सकता है। अन्य हल्के जुलाब जैसे मुनक्का (किशमिश), त्रिफला, स्वादिष्ट विरेचन चूर्ण आदि भी लाभ देते हैं। यदि मूसली पाक ( Musli Pak ) से गंभीर कब्ज हो जाए तो आपको इसे तुरंत बंद कर देना चाहिए।

क्या एक महिला मूसली पाक ( Musli Pak ) ले सकती है?
हाँ, महिलायें भी प्रदर रोग के लिए और साथ ही साथ शक्ति में सुधार और दुर्बलता को कम करने के लिए मूसली पाक ( Musli Pak ) ले सकती हैं। प्रदर रोग में यह उपयोगी है। जब स्राव सफ़ेद, पतला और गंधहीन ह, तो यह अधिक लाभ करता है।

मुझे मूसली पाक कैसे लेना चाहिए?

इसे इसकी प्रस्तावित खुराक (5 से 10 ग्राम) को गर्म दूध के साथ लिया जा सकता है।

क्या मैं इसे पानी के साथ भी ले सकता हूँ? क्या फर्क है, अगर मैं इसे दूध या पानी के साथ लूँ?
हाँ, मूसली पाक ( Musli Pak ) को पानी के साथ भी लिया जा सकता है। आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुसार, दूध औषधि की शरीर को मजबूत बनाने की क्रिया को उत्तेजित करता है और पोषण में मदद करता है। पानी इस लाभ को प्रदान नहीं करता है।

 

श्री कामदेव रस – कामी पुरुषों का अमृत – स्त्री के गर्व को हरने वाला कामिनी गर्वहारी रस

श्री कामदेव रस, श्री कामदेव

श्री कामदेव रस – कामी पुरुषों के लिए अमृत – स्त्री के गर्व को हरने वाला कामिनी गर्वहारी रस

श्री कामदेव रस – जिस पुरुष के पास प्यारी और सुंदर स्त्री होने के बावजूद भी वो मैथुन ना कर सके, अगर मैथुन की चेष्टा करे भी और पास जाते ही पसीने पसीने हो जाए, इच्छा पूरी ना हो पाए, हांफने लगे, लिंग ढीला हो जाए, और वीर्य पहले ही निकल जाए वह व्यक्ति नपुंसक या नामर्द कहलाता है. शादी ब्याह में लाखों करोड़ों खर्च करने के साथ में आजीवन वाजीकरण औषधियों का इस्तेमाल करें, अन्यथा शादी में लगायें हुए पैसे भी बर्बाद हो जायेंगे.

जब तक गृहस्थी जीवन है तब तक व्यक्ति मैथुन करेगा, अगर मैथुन के समय पुरुष स्त्री को संतुष्ट ना करवा सके तो ऐसा पुरुष स्त्री के नज़रों से गिर जाता है. आजकल के माहौल में ना तो कोई पुरुष वाजीकरण औषधियां सेवन करता है और ना ही उसके द्वारा खाए जाना वाला भोजन इतना गुणकारी है के उसके शरीर में वीर्य के भण्डार को भर पाए.

स्त्री के स्खलित होने के बाद ही पुरुष का स्खलित होना यही पुरुष का धर्म है, जो पुरुष स्त्री को स्खलित नहीं कर सकता, वो स्त्री को खुश नहीं कर सकता, ऐसे ही लोगों की औरतें अपना दिल खुश करने दुसरे पुरुषों की चाहना करने लगती है.

वीर्य का महत्व

साद्रक्तं ततो मांसं मांसान्मेदः प्रजायते।
मेदस्यास्थिः ततो मज्जा मज्जायाः शुक्र संभवः।।

अर्थात जो भोजन पचता है, उसका पहले रस बनता है। पाँच दिन तक उसका पाचन होकर रक्त बनता है। पाँच दिन बाद रक्त से मांस, उसमें से 5-5 दिन के अंतर से मेद, मेद से हड्डी, हड्डी से मज्जा और मज्जा से अंत में वीर्य बनता है। स्त्री में जो यह धातु बनती है उसे ‘रज’ कहते हैं। इस प्रकार वीर्य बनने में करीब 30 दिन व 4 घण्टे लग जाते हैं। वैज्ञानिक बताते हैं कि 32 किलो भोजन से 800 ग्राम रक्त बनता है और 800 ग्राम रक्त से लगभग 20 ग्राम वीर्य बनता है।

जो लोग मैथुन तो दिन रात करते हैं, पर शक्ति वर्धक, धातु पौष्टिक, वाजीकरण पदार्थों का सेवन करने की जगह गर्म चीजों का सेवन करते हैं, उनका वीर्य भण्डार तो कम होता ही है, अपितु नवीन वीर्य नहीं बन पाता, ऐसे लोगों का गृहस्थी जीवन बहुत जल्दी ख़राब हो जाता है. आयुर्वेद में 80 साल की आयु में वीर्य का बनना बंद होना लिखा गया है, मगर आजीवन जीवन शैली में तो लोगों को इतनी आयु ही भोगने को मिल जाए वो ही काफी है, आज 60 वर्ष की औसत बिमारियों से घिरी हुई आयु में 30 साल का नौजवान भी वीर्य की कमी से जूझ रहा है.

वीर्य बढाने का महत्व

लोग शादी में तो लाखों खर्च कर लेते हैं, मगर जिस वीर्य से शादी और गृहस्थी जीवन का आनन्द है उसके लिए कोई प्रयास नहीं करते. जिस तरह शरीर में वीर्य की कमी के कारण पुरुष नामर्द हो जाता है, उसी प्रकार वीर्य में विकार या दोष होने पर भी नामर्दी होती है. ऐसे नामर्द का वीर्य एकदम पानी की तरह पतला होता है.

जिस शरीर से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है, उस शरीर की रक्षा की कोई प्रयास नहीं कर रहा, लोग जाने अनजाने में नाना प्रकार के प्रकृति विरुद्ध, नियम विरुद्ध या शास्त्र विरुद्ध कर्म करके, अपने शरीर, पुंसत्व, अपने वीर्य का नाश कर रहें हैं. सृष्टि के नियम के विरुद्ध हस्त मैथुन का प्रचलन बढ़ रहा है, गुदा मैथुन, अयोनि मैथुन और मुख मैथुन भी तेज़ी से बढ़ रहा है, इन्ही कुकर्मो के कारण से ही आज प्रायः 75 फीसदी भारतीय पुरुष बल वीर्यविहीन नपुंसक हो रहें हैं.

जिस तरह कीड़े मकोड़ों का खाया हुआ, आग से जला हुआ, काला और जलसे दूषित हुआ बीज हरा नहीं होता, उसी तरह दूषित वीर्य से गर्भ नहीं ठहरता, और अगर रह भी जाए तो संतान रोगी हो कर अल्पायु होती है. जिस प्रकार से अच्छी ज़मीन और उत्तम बीज से उत्तम फल देने वाला वृक्ष लगता है, उसी तरह उत्तम और शुद्ध रज वीर्य से उत्तम संतान होती है, दूषित रज वीर्य से दूषित या ख़राब औलाद होती है.

वीर्य बढाने वाली चीजें.

  • वीर्य बढाने के लिए दूध, घी, रबड़ी, मोहनभोग, उडद की दाल के लड्डू, उडद की खीर, आम्रपाक, असगंध पाक, गोखरू पाक, बादाम का हलवा, मलाई का हलवा, मूसली पाक इत्यादि का सेवन करना चाहिए.
  • पका मीठा आम, दूध मिला हुआ आमरस, पका केला, नारियल की गिरी, कच्चे नारियल का पानी, पके अंगूर, दाख, खजूर, बादाम, सेब, नाशपाती, खरबूजा, पका हुआ ताडफल, मीठा बेर, चिरौंजी, खिरनी, सिंघाड़ा, फालसा, मीठा अनार, इत्यादि.
  • दालचीनी, तेजपात, इलायची, काली मिर्च, प्याज, घी, शहद, मूंग और चावल की खिचड़ी, ताज़ा जलेबी, सूजी का हलवा, पेठे की मिठाई, परवल इत्यादि.
  • श्रृंगार रस की पुस्तक, गाना बजाना, बाग़ की सैर, फूलों की मालाएँ पहनना, सुगन्धित द्रव्यों का इस्तेमाल, सुंदर स्त्रियों से बात करना. चुम्बन करना इत्यादि.

मैथुन करते समय सावधानी.

मैथुन करते समय पुरुष को मन में किसी भी प्रकार का भय(पता नहीं मै कर पाउँगा या नहीं, मुझसे होगा या नहीं, पहले तो नहीं छूट जाऊंगा इत्यादि विचार), लज्जा, शोक अथवा क्रोध नहीं होना चाहिए. स्त्रियों को चाहिए के सम्भोग के बाद वो अपने पुरुषों की तारीफ करें. जिस से उनको मानसिक शक्ति मिलती है. अगर इसके विपरीत वो उनको कहेंगे के वो उनको संतुष्ट नहीं कर पाए, या “जाओ तुम तो किसी काम के नहीं” “तुमसे कुछ नहीं हो पायेगा” इत्यादि तो ऐसे में पुरुष के मन में मानसिक नपुंसकता के विचार आ जायेंगे और वो अच्छे से मैथुन नहीं कर पायेगा.

स्त्री प्रसंग करते ही शीतल जल पीना, शीतल जल से लिंगेन्द्रिय को धोना और स्नान करना हानिकारक है. प्रसंग के समय शरीर गर्म हो जाता है, उस दशा में शीतल जल या शरबत पीने से जुकाम, कंपरोग या जलोदर हो जाता है या बदन दुखने या ज्वर चढ़ जाता है.शीतल पानी से लिंग को धोने से वो निकम्मा हो जाता है. इसकी गर्मी मारी जाती है और ढीलापन हो जाता है.

रसायन और वाजीकरण

जिन औषधियों का सेवन करने से मनुष्य मृत्यु और बुढापे से बच सकता है उन्हें रसायन कहते हैं और जिन औषधियों या आहार विहार का सेवन करने से मनुष्य स्त्रियों के साथ, बिना हारे, घोड़े की तरह मैथुन कर सकता है उनको वाजीकरण कहते हैं. अतः व्यक्ति को आजीवन रसायण का सेवन करते रहना चाहिए और जब तक सम्भोग सुख भोगना चाहे तब तक वाजीकरण औषधियों का सेवन करना चाहिए.

श्री कामदेव रस क्या है – shri kamdev ras kya hai?

श्री कामदेव 33 जड़ी बूटियों को मिला कर बना गया एक बहुपयोगी दवा है, इसमें उत्तम किस्म की औषधियां जैसे अकरकरा, अश्वगंधा, केसर, जावित्री, जायफल, मालकांगनी, सफ़ेद मुस्ली, कृष्ण मुस्ली, कौंच बीज, उटंगन, शतावरी, विधारिकंद, सेमल की मूसली, कबाबचीनी, गोखरू, सालमपंजा, मकरध्वज, अभ्रक भस्म इत्यादि हैं. इसके सेवन से नपुंसक भी कामदेव के समान रतिक्रिया करेगा.

स्त्री भोग का आनंद अधिक स्तम्भन शक्ति में है, और अधिक स्तम्भन तभी हो सकता है जब के वीर्य निर्दोष, पुष्ट, बलवान और अधिक हो. इसलिए जो लोग इस आनंद को भोगना चाहते हैं वो यह कामदेव रस ज़रूर इस्तेमाल करें.

श्री कामदेव के फायदे. shri kamdev ke fayde

  • श्री कामदेव के निरंतर सेवन से रति शक्ति बढ़कर पुरुष कामदेव हो जाता है. जिस प्रकार से मदोन्मत घोडा सैंकड़ों घोड़ियों पर दौड़ता है, उसी तरह कामदेव का निरंतर सेवन करने से व्यक्ति मदोन्मत होकर अच्छे से गृहस्थी भोग करता है.
  • श्री कामदेव के निरंतर सेवन करने से व्यक्ति में वाजीकारक ताक़त आती है, वाजीकरण देह में अत्यंत बल पराक्रम करता है, निर्बल या कमज़ोर पुरुषों के दुःख दूर करने, उनका प्रेम निबाहने और उनके शरीर की रक्षा करता है. यह संतान पैदा करने और तत्काल आनंद देने वाला है.
  • श्री कामदेव रस का सेवन करने वाले व्यक्ति की स्त्री सदैव दासी बन कर रहेगी. कभी गलती से भी दुसरे पुरुष की तरफ मुंह नहीं करेगी.
  • श्री कामदेव का सेवन करने से होने वाली संतान रूपवती, बलवती और बुद्धिमती होगी.
  • श्री कामदेव के सेवन करने से शरीर निरोगी रहेगा और गाहे बगाहे डॉक्टर या वैद्य का मुंह भी देखना नहीं पड़ेगा.

आपको श्री कामदेव की ज़रूरत क्यों है ? shri kamdev

  • कामोत्तेजना और वीर्य बढाने के लिए..
  • सम्भोग में समय बढाने और आनंद बढाने के लिए..
  • अगर आपका सम्भोग समय एक मिनट तक भी नहीं रहता..
  • संतान पैदा करने की शक्ति लाने के लिए…
  • स्त्री को संतुष्ट और तृप्त करने के लिए..
  • अगर आप मैथुन करने से पहले ही ढीले पड़ जाते हैं तो आपको कामदेव की ज़रूरत है…
  • अगर आपका वीर्य पतला हो गया हो तो.
  • अगर वीर्य कम हो गया हो तो..
  • अगर रुकावट ना रहती हो तो..
  • स्वप्न दोष होता हो तो…
  • जिन लोगों में वीर्य तो बहुत है, मगर वीर्य में गर्मी अधिक होने से स्त्री की योनी देखने मात्र से वीर्य निकल जाए ऐसे रोगियों को श्री कामदेव की बहुत ज़रूरत है.

श्री कामदेव इस्तेमाल करने की विधि. Shri kamdev

अगर आपको कब्ज़ रहती हो तो यह दवा लेने से पहले कब्ज़ का यथा संभव इलाज कीजिये, अन्यथा आप जितनी भी दवा करवा लो कोई भी दवा आपके काम नहीं आएगी. जब कब्ज़ ख़त्म हो कर शरीर से सारा मल निकल जायेगा तो उसके बाद आपका लीवर बलशाली होना चाहिए, अन्यथा यह दवा आपको हज़म नहीं होगी और सब व्यर्थ चला जायेगा. इसलिए पहली बार आप श्री कामदेव के साथ में लीवर के लिए आप Only Ayurved का Liver Reactivator 15 से 20 दिन तक अवश्य पियें. सुबह खाली पेट शौच से मुक्त हो कर श्री कामदेव रस 15 ml लीजिये, और इसके 1 घंटे तक कुछ भी सेवन नहीं करें. और सुबह शाम 15 – 15 ml Liver Reactivator खाने के आधा घंटा पहले लीजिये. और पेट साफ़ करने की दवा रात्रि को सोते समय लीजिये. श्री कामदेव को रात्रि को सोने से कम से कम घंटा पहले और खाने के कम से कम एक घंटा बाद में लेना है.

नोट – अगर कमजोरी अधिक हो तो दवा सेवन करने के 5 दिन तक स्त्री संसर्ग ना करे.

दवा सेवन करते समय परहेज – shri kamdev

जिस रोगी का पित्त बढ़ा हुआ हो ऐसे कामी पुरुषों को सदैव चरपरे, खट्टे, लाल मिर्च, गरम और खारे पित्त बढाने वाले अधिक पदार्थ सेवन नहीं करने चाहिए. बढ़ा हुआ पित्त वीर्य पैदा करने वाली धातुओं को कुपित कर देता है, जिस कारण से वीर्य नहीं बन पाता. ऐसे रोगी को किसी मुर्ख की बातों में आकर कच्ची पक्की वंग भस्म, सीसा भस्म, लोहा भस्म आदि ना खाएं, अथवा तेज़ी लाने को अफीम, भांग और कुचला सेवन नहीं करना चाहिए. नशे से जल्दी चेतना तो आ जायेगा, मगर फिर जल्दी ही नामर्दी आ जाएगी.

कब तक करें श्री कामदेव रस का सेवन. shri kamdev

कामी और कमज़ोर पुरुषों को इसका सेवन 12 महीने करना चाहिए, अगर 12 महीने सेवन ना कर सकें तो उपरोक्त लिखी हुई वीर्य बढाने की चीजें निरंतर इस्तेमाल करते हुए इसको साल में कम से कम 4 महीने ज़रूर इस्तेमाल करें.

तुरंत असर के लिए क्या करें.

वैसे इस दवा से हफ्ते दस दिन में असर दिख जाता है, मगर आप इसका जल्दी नतीजा पाना चाहते हैं तो इसके साथ में Only Ayurved की Wonder Berry का सेवन करे. यह कामदेव रस के आधे घंटे के बाद में रात्रि को सोते समय लीजिये. ध्यान रहे सम्भोग इसके कम से कम आधे घंटे के बाद ही करना है. wonder berry दुनिया की सर्वश्रेष्ठ बेरियों से निर्मित है, जैसे अकाई बेरी, ब्लूबेरी,मल्बेरी, रसबेरी, ब्लैकबेरी इत्यादि. इसके सेवन से शरीर में ऐसे मिनरल और विटामिन की पूर्ति होती है जो शरीर को भोजन से नहीं मिल पाते, यह एंटी ऑक्सीडेंट का भरपूर खजाना है. इसलिए श्री कामदेव रस के साथ लेने से यह दोनों तुरंत प्रभाव दिखाते हैं.

श्री कामदेव का मूल्य – shri kamdev

श्री कामदेव का मूल्य 970 रुपैये हैं, यह 500 ml की पैकिंग में आता है. वंडर बेरी भी 970 रुपैये की है और यह भी 500 ml की पैकिंग में आती है. Liver Reactivator भी 500 ml में आता है, इसका मूल्य सिर्फ 380 रुपैये है.

आपके नजदीकी Only Ayurved Dealer list और उनकी Location

बिहार

पटना – 7677551854, 7480099296

छपरा – 9473221039

छत्तीसगढ़

बिलासपुर – 9584891808, 9926758959, 9300333438

रायपुर – 9644133772

दुर्ग भिलाई – 9691305217

झारखण्ड

मनिका – लातेहार – 9801290105

पश्चिम बंगाल – West Bengal

कोलकाता –  7003386968

असम

सिलचर – 9954000321

महाराष्ट्र

मालेगांव (नासिक) – डॉ. फरीद शेख 9860785490

धुले – 9860704470

नासिक – 9270928077

पुणे – 9209211786

अकोला – 7020579564

वर्धा – 9579997503

नागपुर – 8830998853

शोलापुर – 8308604642

कल्याण – 8454050864

टिटवाला – 9821315415

मलाड – 9967293444

घाटकोपर – 07738350032

बोरीवली – 9004316923

भंडारा – 9422174853

औरंगाबाद – 8208266068

विरार – 9892967369

अमरावती – 9765332255

कर्नाटक – Karnataka

धारवाड़ (Dharwad) – 9844984103

बैंगलोर (Bangalore) – 7019098485

तामिलनाडू

चेन्नई – 9884164854

तेलंगाना

हैदराबाद – 08374457775

गुजरात

अहमदाबाद – 9974019763

अहमदाबाद घाटलोडिया – 9974019763

पालनपुर ( डॉ. हिदायत मेमन )  –  9428371583

द्वारिका – 9033790000

चिकली – 9427869061

अमरेली – 9427888387

अंकलेश्वर – भरूच – 8460090090

बड़ोदा – 9725245318

सूरत –  8866181846, 9879157588

भुज / मुंद्रा  – 9974576143

मध्यप्रदेश

भोपाल – 7987552689

इटारसी – 6260342004

इंदौर – 9713500239

विदिशा – 9131055585

जबलपुर – 9039868554

ग्वालियर – 9229239248

कटनी – 9074901083

उत्तर प्रदेश

मेरठ – 8449471767

हाथरस ( U. P. ) –  9997397043, 7017840020

मथुरा ( वैध रविकांत जी ) – 9259883028

अलीगढ – 9027021056

आगरा – 8923234014

कासगंज – 7409463111

फ़िरोज़ाबाद – 8445222786 वैध रविन्द्र सिंह

मैनपुरी – 8449601801

फ़र्रुख़ाबाद – 9839196374

रायबरेली – 9236038215

वाराणसी – 9125349199

इलाहाबाद ( डॉ.  सी. पी. सिंह ) – 9520303303

गोरखपुर – 9792960999

सिद्धार्थ नगर – 9936404080

महाराजगंज – 9455426806

लखनऊ – 8417856005

इटावा – 9557463131 डॉ. कौशलेन्द्र सिंह

दिल्ली –  NCR

सराय कालें खां –  9015439622, 9871490307

सुभाष नगर – 9911006202

गाज़ियाबाद – 9719077555

Greater Noida – 9310299100

गुडगाँव – 9310330050

फ़रीदाबाद – 9315154682

हरियाणा

हिसार – 9518884444

हसनपुर पलवल – 9050272757

पानीपत – 9812126662

बाढ़डा ( चरखी दादरी ) – 9813210584

फ़रीदाबाद – 9315154682

चंडीगढ़ – 9877330702

डबवाली – 9416218182

पंजाब

मोगा – 9988009713

बठिंडा – 9779566697

डबवाली – 9416218182

कोट कपूरा – 9872320227

मलोट – 9878100518

मलेर कोटला – 9872439723

लुधियाणा – 9803772304

जालंधर – 9814832828

अमृतसर – 8872295800

होशियारपुर उड़मुड टांडा – 9803208718

गुरदासपुर – 9815483791

मोहाली – 09216411342

मुकेरियां – 9815296322

चंडीगढ़ – 9877330702

राजस्थान

जयपुर – 8290706173, 8005648255

दौसा – 7737497140

जोधपुर – 8005724956

बीकानेर – 7062169968

अजमेर – 7976779225

सिरोही – 9875238595

उदयपुर – 9875238595

टोंक – 9509392472

अजीतगढ़ – 8005648255

फतेहपुर शेखावाटी – 9636648998

उदयपुर वाटी (झुंझुनू)  डॉ राकेश कुमार – 9351606755

संगरिया – 7597714736

हिमाचल प्रदेश

नालागढ़ – 9816022153

कुल्लू – 8219500630

चिन्तपुरणी – 9816414561

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महाराष्ट्र – 9860758490

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बिहार – 7677551854

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