Friday , 20 September 2019
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सन्निपात (मस्तिष्क पर सुजन ) के लिए गुणकारक,अनुभूत व अचूक नुस्खे-प्रयोग में लेकर लाभ ले |

सन्निपात (मस्तिष्क पर सुजन ) के लिए गुणकारक,अनुभूत व अचूक नुस्खे-प्रयोग में लेकर लाभ ले |

यह बड़ा भयंकर रोग है | इससे मस्तिष्क पर या मस्तिष्क के पर्दों के अंदर एक प्रकार की सुजन सी आ जाती है |

यदि सुजन विशेषत: मस्तिष्क पर अधिक हो तो तापांश अधिक होता है और आँखों में बड़ा भारी दर्द होता है |

यदि मस्तिष्क के अगले भाग पर सुजन हो तो रोगी की आँखे खुली रहती है और वह मुख पर बार -बार हाथ मारता है

यदि सुजन सिर के मध्य भाग में हो तो रोगी प्रलाप करता है | और यदि सिर के पिछले भाग में हो तो रोगी जो बात

कहता है उसे तुरंत भूल जाता है |

निचे कुछ ऐसे योग लिखे जाते है जो सब प्रकार के सन्निपात के लिए लाभप्रद और गुणकारक है |

1 .- सन्निपात हारी पोटली –

निम्नलिखित पोटली सन्निपात के लिए अत्यधिक हितकर है | यह कई बार अनुभव में आ चुकी है और सदा

बड़ी प्रभावोत्पादक रही है |बनाकर लाभान्विंत हो |

विधि –

इन्द्रायण का गुदा और फरफ्यून दोनों को आवश्यकतानुसार लेकर एक पोटली बना ले | रोगी के सिर पर

गर्म-गर्म टकोर करे | सर्द सन्निपात के लिए अनेक बार की अनुभूत और अचूक ओषधि है |

2.- अनुभूत वटी –

यह वटी सब प्रकार के सन्निपातो के लिए गुणकारक है |अनेक बार इसका अनुभव किया जा चूका है |

इसका विवरण निचे लिख रहे है |

विधि –

माष के आटे की एक ऐसी रोटी तेयार करवाएं जो की रोगी के सिर पर अच्छी तरह आ जावे |फिर उसे तवे

पर डाले |एक तरफ पकने के बाद कच्ची तरफ को तिलों के और सरसों के तेल से चुपड़ कर गर्म-गर्म

रोगी के सिर पर बांधे |प्रत्येक तीन घंटे बाद नई रोटी उपरोक्त विधि से बनाकर बदलते रहे | इश्वर क्रपा

से केवल एक दो बार के प्रयोग से ही पूर्ण आराम हो जायेगा |परन्तु ध्यान रखे की रोटी रोगी के सिर से उतर

न जाये | बेहोशी की दशा में रोटी को सर से उतार कर फेंकने की कोशिश करता है |

3 .-सन्निपात  के लिए तरेड़ा –

विधि –

हर प्रकार के सन्निपात के रोगी के लिए तरेड़ा करना बड़ा लाभप्रद होता है और सिर के बालो को नमक

के पानी और गेंहू की भूसी से धोना भी बढ़ा लाभप्रद सिद्ध होता है या बकरी के सिर की ताजा-ताजा

खाल रोगी के सिर पर बंधना भी बहुत गुनदायी है | पांच-दस प्रकार के वक्षो के पत्ते लाकर खूब पकाए

और रोगी को तरेड़ा करे |

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