Wednesday , 11 December 2019
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हमारे अनुभव -लकवा रोग में जो अनेक रोगियों पे आजमाएं हुए है बनाकर लाभ ले |

हमारे अनुभव -लकवा रोग में जो अनेक रोगियों पे आजमाएं हुए है बनाकर लाभ ले |

लकवा वायु रोग के अंर्तगत आता है लकवा स्नायुमंडल के अवसाद से उत्पन होता है. तथा यह शरीर के आधे                           अंग में होता है. मस्तिष्क की नाडिया निष्क्रिय हो जाने के कारण वे निर्जीव हो गये अंगो को संदेश देने में असमर्थ                  हो जाती है. लकवे में शरीर का आधा अंग बेकार हो जाता है .रोगी के मुह में जड़ता आ जाती है .रोगी की एक टांग                   और एक बाजु बेकार हो जाते है .रोगी की स्थति ऐसी हो जाती है की वह न तो जीने में रहता है न ही मरने मे |                         लकवे के कई कारण है —                                                                                                                                               खून पुरे शरीर में वायु के साथ -साथ दोड़ता रहता है .जब रोगी अपथ्य करता है, वायुकारक तथा आम बनाने वाली           चीजे अधिक मात्रा में खाता है ,तब वे पदार्थ खून की नशों का रास्ता जाम कर देते है .इसी प्रकार वे अंग निर्जीव हो             जाते है |साथ में निम्न कारण है |आहार -विहार में लापरवाह ,उच्च या निम्न रक्तचाप ,मानसिक दबाव ,                             सिर के विभिन्न रोगों के कारण ,ओषधि की प्रतिकिर्या स्वरूप ,मधुमेह के कारण |

1 .-बायसुरई  ,छोटा गोखरू ,एरंड मूल ,देवदारु की लकड़ी ,विषखपरे की जड ,नीम गिलोय ,अमलतास का गुदा ,                         छोटी हरड ,सोंठ प्रत्येक 15 -15 ग्राम ले .इन्हें अलग -अलग मोटा मोटा कूट ले .अब प्रत्येक दवाई में से 2-2                         ग्राम लेकर 9 पुडिया बना ले .एक खुराक रात को कोरी मिटटी की हांड़ी में डाल दे तथा उसमे 700 ग्राम पानी                          डाल रात को रख दे सुबह उस मटकी को आग पे चढ़ा दे .जब लगभग 150 ग्राम शेष रह जाये तो दुसरे बर्तन                            में छान ले तथा उसमे लगभग 6 ग्राम शहद मिलाकर गुनगुना पिला दे .उसके बाद कपड़ा ओढा कर रोगी को                          लिटा दे तथा हवा से बचाए .अब शेष बचे हुए फोक में 700 ग्राम पानी मिलाकर रख दे तथा रात को क्वाथ बनाये                    150 ग्राम शेष रहने पर छान ले उसमे 6 ग्राम शहद मिला गुनगुना पिला दे तथा चादर ओढाकर 1 घंटे तक सुला दे                  अब जो ओषधि बची है ,उसे फेंक दे और नई खुराक भिगोकर रख दे |

2 .-लकवे का तेल -धतूरे के पत्ते (ताजा) 25 ग्राम ,श्वेत गूंजा 25 ग्राम ,तिल का तेल 250 ग्राम ले और धतूरे व                         गूंजा को पीस कल्क बना तेल में डाल मंद -मंद आंच पर पकाए |इसी की मालिश पीड़ित स्थान पर करे

3 .-रसराज रस 100 mg ,एकांगवीर रस 125 mg ,सिंघनाद गूगल 375 mg ,पुन्नर्र्वा मंडूर 250 mg ,शुद्ध कुचला                      50 mg शहद से सुबह शाम देना शुरू करे और भोजन के बाद -अस्वगंधारिष्ट 20 ml बराबर जल में मिलाकर दे                    क्षीरबला तेल (नागार्जुन ) को पीड़ित अंगो पर मालिश करे |

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