आलू के गुण और लाभ
ऐसा माना जाता है कि अंग्रेज अपने साथ आलू भारत में लाये। इसको अनेकानेक प्रकार से पकाया और खाया जाता है। इसका हलुआ बेहद लजीज और स्वाद से भरपूर होता है। इसकी सब्जियाँ-कचौड़ियाँ ऐसी होती हैं खाने वाला उँगलियाँ चाटता रह जाये। इसको खाने और पकाने के तरीकों का तो कहना ही क्या ! छिलके वाले छोटे-छोटे आलू मेथी की भूजी बनाने में प्रयुक्त होते हैं। इसको छिलके सहित पानी में उबालें और गल जाने पर ही खाएं। भारत मैं यह बारहों मास मिलता है काफी सस्ता भी है। MNC’s चिप्स बना-बना कर इसके दामों को बढ़ाना शुरू कर दिया है।
* भुना हुआ आलू पुरानी कब्ज और अंतड़ियों की सड़ांध दूर करता है। आलू में पोटेशियम होता है जो अम्ल-पित्त को घटाता है।
* चार आलू सेंक लें और फिर उनका छिलका उतार कर नमक, मिर्च डालकर नित्य खाने से से गठिया ठीक हो सकता है।
* आलू में 8.5 प्रतिशत प्रोटीन होता है। आलू का प्रोटीन बूढ़ों के लिए बहुत ही शक्ति देने वाला और बुढ़ापे की कमजोरी दूर करने वाला होता है।
* आलू में कैल्शियम, लोहा, विटामिन-बी तथा फास्फोरस बहुतायत में होता है। आलू खाते रहने से रक्त वाहिनियां बड़ी आयु तक लचकदार बनी रहती हैं तथा कठोर नहीं होने पातीं।
* दो-तीन आलू उबालकर छिलके सहित थोड़े से दही के साथ खा लिए जाएं, तो ये एक संपूर्ण आहार का काम करते हैं।
* चोट लगने पर नील पड़ी जगह पर कच्चा आलू पीसकर लगाने से फायदा होता है।
* जलना, तेज धूप से त्वचा झुलसना, त्वचा पर झुर्रियां या त्वचा रोग होने पर कच्चे आलू का रस निकालकर लगाने से फायदा होता है।
* गुर्दे की पथरी में केवल आलू खाते रहने पर लाभ होता है। पथरी के रोगी को केवल आलू खिलाकर, बार-बार अधिक पानी पिलाते रहने से, गुर्दे की पथरियाँ और रेत आसानी से निकल जाता हैं।
* उच्च रक्तचाप के रोगी भी आलू खाएँ तो रक्तचाप को सामान्य बनाने में आसानी होती है।
* आलू को पीसकर त्वचा पर मलने से रंग गोरा होता है।
सावधानी:
हरा भाग सोलेनाइन नामक विषैला पदार्थ होने से खतरनाक बन जाता है। इसके अंकुरित हिस्से का भी प्रयोग नहीं करना चाहिए।
Only Ayurved आयुर्वेद जीवन जीने की कला हैं, हम बिना दवा के सिर्फ अपने खान पान और जीवन शैली में थोड़ा बदलाव कर के आरोग्य प्राप्त कर सकते हैं।


















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