Monday , 19 November 2018
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पादपश्चिमोत्तानासन विधि और लाभ।

पादपश्चिमोत्तानासन विधि और लाभ।

पादपश्चिमोत्तानासन

इस आसन से नाड़ियों की विशेष शुद्धि होकर हमारी कार्यक्षमता बढ़ती है और शरीर की बीमारियाँ दूर होती हैं। बदहजमी, कब्ज जैसे पेट के सभी रोग, सर्दी-जुकाम, कफ गिरना, कमर का दर्द, हिचकी, सफेद कोढ़, पेशाब की बीमारियाँ, स्वप्नदोष, वीर्य-विकार, अपेन्डिक्स, साईटिका, नलों की सुजन, पाण्डुरोग (पीलिया), अनिद्रा, दमा, खट्टी ड्कारें, ज्ञानतंतुओं की कमजोरी, गर्भाशय के रोग, मासिकधर्म की अनियमितता व अन्य तकलीफें, नपुंसकता, रक्त-विकार, ठिंगनापन व अन्य कई प्रकार की बीमारियाँ यह आसन करने से दूर होती हैं।

इस आसन से शरीर का कद लम्बा होता है। यदि शरीर में मोटापन है तो वह दूर होता है और यदि दुबलापन है तो वह दूर होकर शरीर सुडौल, तन्दुरुस्त अवस्था में आ जाता है। ब्रह्मचर्य पालनेवालों के लिए यह आसन भगवान शिव का प्रसाद है। इसका प्रचार पहले शिवजी ने और बाद में जोगी गोरखनाथ ने किया था।

आइये जाने इसकी विधि।

जमीन पर आसन बिछाकर दोनों पैर सीधे करके बैठ जाओ। फिर दोनों हाथों से पैरों के अगूँठे पकड़कर झुकते हुए सिर को दोनों घुटनों से मिलाने का प्रयास करो। घुटने जमीन पर सीधे रहें। प्रारंभ में घुटने जमीन पर न टिकें तो कोई हर्ज नहीं। सतत अभ्यास से यह आसन सिद्ध हो जायेगा। यह आसन करने के 15 मिनट बाद एक-दो कच्ची भिण्डी खानी चाहिए। मगर भिन्डी अगर घर पर लगायी हो और बिना केमिकल्स के प्रभाव से हो तो ही उत्तम हैं। सेव या आंवला का सेवन भी फायदा करता है।

समयाविधि

प्रारंभ में यह आसन आधा मिनट से शुरु करके प्रतिदिन थोड़ा बढ़ाते हुए 15 मिनट तक कर सकते हैं। पहले 2-3 दिन तकलीफ होती है, फिर सरल हो जाता है।

2 comments

  1. V nice mujhe gas problem hai,Perth me dard rehta hai

  2. Good knowledge

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