Tuesday , 22 August 2017
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आंवला – स्नायु संस्थान (मस्तिष्क) की कमज़ोरी में अमृत।

आंवला – स्नायु संस्थान (मस्तिष्क) की कमज़ोरी में अमृत ।

Increase Mind and memory Power With Anwla (Amla).

आंवले का मुरब्बा शीतल और तर होता हैं, आंवला नेत्रों के लिए हितकारी, रक शोधक, दाहशामक तथा हृदय, मस्तिष्क, यकृत, आंते, आमाशय को शक्ति प्रदान करने वाला होता हैं। इसके सेवन से स्मरण शक्ति तेज़ होती हैं। मानसिक एकाग्रता बढ़ती हैं। मानसिक दुर्लब्ता के कारण चक्कर आने की शिकायत दूर हो जाती हैं। सवेरे उठते ही सर दर्द और चक्कर आते हो तो इस से लाभ मिलता हैं।

आइये जाने इस मुरब्बे को घर पर बनाने का तरीका।

बनारसी आंवले का मुरब्बा एक नग अथवा नीचे लिखी विधि से बनाया गया 12 ग्राम (बच्चो के लिए आधी मात्रा) ले। प्रात खाली पेट खूब चबा चबा कर खाने और उसके एक घंट के बाद तक कुछ भी ना लेने से मस्तिष्क के ज्ञान तंतुओ को बल मिलता हैं। और स्नायु संस्थान शक्तिशाली बनता हैं।

विशेष –

गर्मी के मौसम में इसका सेवन अधिक लाभकारी हैं। इस मुरब्बे को यदि चांदी के वर्क में लपेट कर खाया जाए तो दाह, कमज़ोरी तथा चक्कर आने की शिकायत दूर हो जाती हैं। वैसे भी आंवले का मुरब्बा शीतल और तर होता हैं। और नेत्रों के लिए हितकारी, रक शोधक, दाहशामक तथा हृदय, मस्तिष्क, यकृत, आंते, आमाशय को शक्ति प्रदान करने वाला होता हैं। इसके सेवन से स्मरण शक्ति तेज़ होती हैं। मानसिक एकाग्रता बढ़ती हैं। मानसिक दुर्लब्ता के कारण चक्कर आने की शिकायत दूर हो जाती हैं। सवेरे उठते ही सर दर्द और चक्कर आते हो तो इस से लाभ मिलता हैं। आज कल शुद्ध चांदी के वर्क आसानी से नहीं मिलते। अत:नकली चांदी के वर्क का इस्तमाल करना अच्छा नही है। चाय-बिस्कुट की जगह इसका नाश्ता लेने से न केवल पेट ही साफ़ रहेगा बल्कि शारीरिक शक्ति, स्फूर्ति एवं कांति में भी वृद्धि होगी। निम्न विधि से निर्मित आंवला मुरब्बा को यदि गर्भवती स्त्री सेवन करे तो स्वयं भी स्वस्थ रहेगी और उसकी संतान भी स्वस्थ होगी। आंवले के मुरब्बे के सेवन से रंग भी निखरता हैं।

निषेध – मधुमेह के रोगी इसे ना ले।

आंवला मुरब्बा बनाने की सर्वोत्तम विधि –

500 ग्राम स्वच्छ हरे आंवले कद्दू कस कर के उनका गुद्दा किसी कांच के मर्तबान में डाल दे और गुठली निकाल कर फेंक दे। अब इस गुद्दे पर इतना शहद डाले के गुद्दा शहद में तर हो जाए। तत्पश्चात कांच के पात्र को ढक्कन से ढक कर उसे दस दिन तक रोज़ाना चार पांच घंटे धुप में रखे। इस प्रकार प्राकृतिक तरीके से मुरब्बा बन जाएगा। बस दो दिन बाद इसे खाने के काम में लाया जा सकता हैं। इस विधि से तैयार किया गया मुरब्बा स्वस्थ्य की दृष्टि से श्रेष्ठ हैं। क्युकी आग की बजाये सूर्य की किरणों से निर्मित होने के कारण इसके गुण धर्म नष्ट नहीं होते। और शहद में रखने से इसकी शक्ति बहुत बढ़ जाती हैं।

सेवन विधि –

प्रतिदिन प्रात: खाली पेट ९० ग्राम ( दो चम्मच भर ) मुरब्बा लगातार तीन-चार सपताह तक नाश्ते के रूप में ले, विशेषकर गर्मियों में। चाहे तो इसके लेने के पंद्रह मिनट बाद गुनगुना दूध भी पिया जा सकता है। चेत्र या क्वार मांस में इसका सेवन करना विशेष लाभप्रद है। 

ऐसा मुरब्बा विधार्थियो और दिमागी काम करने वालो की मस्तिष्क की शक्ति और कार्यक्षमता बढ़ाने और चिड़चिड़ापन दूर करने के लिए अमृत है। इससे विटामिन सी, ए, कैलशियम, लोहा का अनूठा संगम है। 100 ग्राम आंवले के गूदे में 720 मिलीग्राम विटामिन सी, 15 आइ. यू. विटामिन ए, 50 ग्राम कैल्शियम, 1.2 ग्राम लोहा पाया जाता है।

आंवला ही एक ऐसा फल है जिसे पकाने या सुखाने पर भी इसके विटामिन नष्ट नही होते।

यदि उपरोक्त विधि से मुरब्बा बनाना सम्भव न हो तो केवल हरे आंवले के बारीक़ दुकड़े करके या कद्दूकस करके शहद के साथ सेवन करना भी लाभप्रद है। इससे पुराने कब्ज व पेट के रोगो में भी अभूतपूर्व लाभ होता है।

स्रोत – स्वदेशी चिकित्सा सार। डॉक्टर अजित मेहता।

3 comments

  1. Please tell me something to strengthen muscles my muscles are weak

  2. Mene bhang ka Sevan kiya .usse meri body hilti rhti h .meri yaadast khatam hoti ja rhi h .mujhe bhulne ki bimari badti ja rhi h .mujhe Iska koi elaj batao

  3. I want to know wich compani is best about amla jus and tabtets?

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