Saturday , 23 September 2017
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एड्स / AIDS का कारण, लक्षण और उपचार संबंधी संपूर्ण जानकारी

एड्स / AIDS का कारण, लक्षण और उपचार संबंधी संपूर्ण जानकारी

 HIV. AIDS causes, symptoms, treatment, diagnosis and prevention tips in Hindi

AIDS आधुनिक युग का एक बहुत ही गंभीर और जानलेवा रोग है। AIDS का Full Form है Acquired Immuno Deficiency Syndrome यानि ऐसी बीमारी जो रोग-प्रतिकार शक्ति कम कर लक्षण देता है। इस रोग में व्यक्ति अपनी प्राकृतिक रोग-प्रतिकार शक्ति खो देता है। AIDS पीड़ित व्यक्ति के शरीर में प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण अवसरवादी संक्रमण जैसे कि सर्दी, खांसी, TB इत्यादि रोग आसानी से हो जाते है और उनका इलाज करना भी काफी कठिन हो जाता है।

AIDS रोग HIV विषाणु के संक्रमण से होता है। HIV का Full Form है Human Immuno Deficiency Virus यानि ऐसा विषाणु जो रोग प्रतिकार शक्ति कम कर देता है। HIV संक्रमण होने के बाद AIDS कि स्तिथि तक पहुचने में और लक्षण दिखने में 8-10 साल या ज्यादा समय भी लगने के कारण कई सालों तक तो रोगी को पता ही नहीं चलता कि उसे आखिर हुआ क्या है। धीरे-धीरे करके उसके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अर्थात रोगों से लड़ने की शक्ति समाप्त होने लगती है। इस रोग की जांच करवाने के तीन साल के अन्दर ज्यादातर रोगियों की मृत्यु हो जाती है।

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AIDS कैसे होता हैं ?

एड्स रोग HIV के संक्रमण से होता है। HIV संक्रमित व्यक्ति, जो HIV Positive हो या न हो और जिसमे HIV के लक्षण नहीं दिख रहे है ऐसे HIV संक्रमित व्यक्ति के खून (Blood), वीर्य (Semen), योनिक पानी (Vaginal fluid) और माँ के दूध (Breast Milk) से HIV संक्रमण होने से AIDS हो सकता है। आमतौर पर लोग HIV Positive होने का मतलब AIDS समझने लगे है, लेकिन ऐसा नहीं है। HIV Positive होने के बाद 8 से 10 साल में पीड़ित कि रोग प्रतिकार शक्ति क्षीण हो जाती है और वह अन्य मौकापरस्त रोगो से ग्रस्त हो जाता है, इस स्तिथि को AIDS कहते है।

निम्नलिखित प्रकार से HIV संक्रमण हो सकता है :

  • संक्रमित व्यक्ति से असुरक्षित यौन-संबंध बनाने से। अगर मुंह में छाले या मसूड़ो से खून बह रहा हो तब भी संक्रमण फ़ैल सकता है।

  • AIDS से ग्रस्त रोगी पर प्रयोग किए हुए इंजैक्शन को दूसरे व्यक्ति के शरीर में लगाने से।

  • AIDS संक्रमित खून प्राप्त करने से। (Contaminated Blood Transfusion)

  • AIDS ग्रस्त मां के द्वारा जन्म लेने वाले बच्चे को।

  • AIDS ग्रस्त मां के दूध से।

  • दाढ़ी करते समय, टैटू लगाते समय और शरीर में कोई छेद करते समय उपयोग में लिए जाने वाले सुई, ब्लेड इत्यादि सामग्री HIV विषाणु से संक्रमित होने पर।

एड्स / AIDS का कारण, लक्षण और उपचार संबंधी संपूर्ण जानकारी

 HIV. AIDS causes, symptoms, treatment, diagnosis and prevention tips in Hindi.

AIDS के क्या लक्षण है ? AIDS symptoms in Hindi

AIDS के प्रारंभिक लक्षण निचे दिए गए है :

  • अत्यधिक वजन का कम होना।

  • अधिक समय तक सुखी खांसी आना।

  • बार-बार बुखार आना।

  • लसिकाओ / ग्रन्थियों में सूजन।

  • एक हफ्ते से अधिक समय तक पतले दस्त होना।

  • बार-बार Fungal Infection होना।

  • रात को पसीना आना।

  • चमड़ी के निचे, मुंह, पलको के निचे या नाक में लाल, भूरे, बैंगनी या गुलाबी रंग के धब्बे होना।

  • याददाश कम होना।

  • शरीर में दर्द होना।

  • मानसिक रोग।

AIDS का निदान कैसे किया जाता है ? Diagnosis of AIDS in Hindi

AIDS के निदान / Diagnosis करने हेतु विविध जांच कि जाती है।

  • HIV 1 & 2 : AIDS के निदान / Diagnosis करने हेतु HIV 1 & 2 कि खून जांच कि जाती है। शरीर में HIV का संक्रमण होने के बाद, शरीर कि रोग प्रतिकार शक्ति जवाब में HIV Antibodies का निर्माण करती है। यह Antibodies शरीर में निर्माण होने पर व्यक्ति को HIV Positive कहा जाता है। HIV का संक्रमण होने के बाद, शरीर में HIV Antibodies निर्माण होने को 1 से 2 हफ्ते या 6 महीने तक का समय लगता है और इस समय को Window Period कहा जाता है। HIV विषाणु शरीर में मौजूद होने के बावजूद इस कालावधि में पीड़ित कि खून जांच सामान्य आ सकती है और पीड़ित दुसरो को AIDS फैला सकता है।

  • HIV Antigen Test : शरीर में HIV का संक्रमण होने के बाद Antibodies तैयार होने में काफी वक़्त लगता है परन्तु Antigen जल्दी तैयार हो जाते है। HIV Antigen Test से HIV का संक्रमण होने के कुछ दिनों में ही निदान हो सकता है और तुरंत उपचार एवं अन्य व्यक्तियो में फैलाव होने से रोका जा सकता है।

  • CD4 Count : CD4 Cells को Helper-T Cells भी कहा जाता है। यह हमारे रोग प्रतिकार शक्ति के महत्वपूर्ण अंग है। सामान्य स्वस्थ्य व्यक्ति में CD4 Cells कि संख्या 500-1500/ml होती है। CD4 Cells कि संख्या 200/ml से कम आने पर AIDS का निदान किया जाता है।

  • ELISA Test : AIDS के निदान / Diagnosis करने हेतु ELISA Test (enzyme-linked immunosorbent assay) कि जाती है। यह जांच Positive आने पर confirmation के लिए Western Blot Test जांच कि जाती है। HIV संक्रमण होने के शरुआती 3 हफ्ते से 6 महीने के Window Period में यह जांच False Negative भी आ सकती है।

  • Saliva Test : एक cotton pad पर मुंह के अंदर से थूक / saliva का sample लेकर laboratory जांच कि जाती है। यह जांच Positive आने पर confirmation  के लिए अन्य ब्लड टेस्ट किये जाते है।

  • Viral Load Test : इस जांच में खून में HIV के प्रमाण कि जांच कि जाती है। यह जांच निदान और उपचार के दौरान पीड़ित के सुधार के आकलन में काम आती है।

AIDS का क्या उपचार है ?  Treatment of AIDS in Hindi

AIDS के उपचार में कई तरह कि दवा का इस्तेमाल किया जाता है। AIDS  के उपचार का मुख्य उद्देश HIV विषाणु को कमजोर करना, शरीर कि रोग प्रतिकार शक्ति को फिर से मजबूत करना और मौकापरस्त अन्य रोगो को ठीक करना होता है।

समय के साथ-साथ AIDS  के उपचार में कई नयी दवाओ का निर्माण किया जा रहा है, परन्तु AIDS से बचाव ही AIDS का सबसे बेहतर इलाज है।

AIDS से बचाव कैसे करे ? AIDS prevention Tips in Hindi

AIDS से बचाव के लिए निम्नलिखित सावधानी बरते :

  • अपने साथी से वफादार रहे।

  • ज्यादा व्यक्तियों के साथ सेक्स सम्बन्ध नहीं बनाने चाहिए। अगर किसी अन्य व्यक्ति के साथ सेक्स संबंध बनाने भी हों तो हमेशा कंडोम का प्रयोग करना चाहिए।

  • जहां तक हो सके वेश्या या गलत लोगों से सेक्स संबंध बनाने से बचना चाहिए।

  • अगर बाहर दाढ़ी आदि बनवानी हो तो नाई से कहकर हमेशा नए ब्लेड का प्रयोग ही करवाएं।

  • अस्पताल आदि में सुई लगवाते समय हमेशा नई सीरींज का ही प्रयोग करना चाहिए।

  • अगर अस्पताल आदि में खून चढ़वाने की जरूरत पड़ जाए तो पहले पूरी तरह confirm हो जाएं कि जो खून आपको चढ़ाया जा रहा है वह किसी AIDS रोग से ग्रस्त रोगी का तो नहीं है।
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2 comments

  1. सर आपने AIDS संबब्धित आर्टिकल में लिखा है की एड्स mosquito के काटने से नहीं फैलता पर मै समझता हूँ की एड्स मच्छर के काटने से फ़ैल सकता है आप सोच रहे होंगे की मै ऐसा क्यों कह रहा हूँ तो चलिए मै आपको बताता हूँ की आखिर इसका कारण क्या है

    पहले बात करते है की एड्स एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति में जाता कैसे है तो इसका सरल सा तथ्य है की —–अगर रोगी व्यक्ति के खून का hiv वायरस किसी स्वस्थ्य व्यक्ति के खून मै मिल जाये तो hiv का संक्रमन स्वस्थ्य व्यक्ति को हो जायेगा चाहें वायरस का संचरण ब्लेड से हो या नीडल से

    तो मई ये सोच रहा हूँ की यदि एक मच्छर hiv से संक्रमित व्यक्ति को काटने के बाद वही मच्छर किसी healthy व्यक्ति को कटता है तो मच्छर के सुंड में मौजूद hiv वायरस का भी संचरण स्वस्थ व्यक्ति के शरीर मै हो जायेगा

    इसलिए मै कह रहा हो की एड्स मच्छर के काटने से भी फैलता है

  2. Aids ka ilaj hindi me, aids ka ayurvedic ilaj, aids ki jankari

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