Thursday , 20 September 2018
Home » Rajiv Dixit » मच्छर भगाने के लिए जब देसी इलाज कर सकते हैं तो क्यों दे रहें हैं अपने बच्चो को जहर ?

मच्छर भगाने के लिए जब देसी इलाज कर सकते हैं तो क्यों दे रहें हैं अपने बच्चो को जहर ?

Machhar bhagane ke liye desi tarika.

side effects of mosquito coil and natural way to get rid of mosquito. mosquito coil ke nuksan

शायद आप जानते नहीं होंगे जिन मच्छर भगाने वाली दवाओं का इतना प्रचार किया जा रहा है हमारे भांड मीडिया द्वारा वो बच्चे तो क्या एक हट्टे कट्टे इंसान को भी बीमार बनाने के लिए काफी है. इनमे से बहुत सारे नाम प्रचालन में हैं जैसे All Out, Good Night, Mortein इत्यादि. इन दवाओं में जिन केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है वो सेहत के लिए इतने घातक हैं के आप के कुछ दिन के इस्तेमाल से ही व्यक्ति सांस और अन्य बिमारियों का रोगी हो जाता है.

इनमे एथलीन,मेलफो क्वीनऔर फोस्टीन नामक तीन खतरनाक कैमिकल मिलाये जाते हैं जो यूरोप मे और अन्य 56 देशो मे पिछले कई सालों से बैन है ! और हम लोग इतने मूर्ख हैं के इसको घर मे छोटे-छोटे बच्चो के ऊपर लगाकर छोड़ देते हैं ! सोचते हैं के मच्छर नहीं काटेंगे, अगर मच्छर काट भे लेगा तो उसका इलाज हो सकता है, मगर एक बार इसका ज़हरीला धुंआ शरीर के अन्दर चला गया तो जो बीमारियाँ हम अपने बच्चों को देंगे वो उनसे जीवन भर मुक्त नहीं हो पाएंगे.

1 mosquito coil equal to 100 cigarette

क्या आप जानते हैं के 1 मच्छर भगाने वाली Coil इतना ज़हर देती है जितना 100 सिगरेट. तो क्या ये जानकार भी आप अपने बच्चों के लिए यही ज़हर लायेंगे. ये Liquid और ये Coil हमारे और हमारे बच्चो के स्वास्थ्य के लिए अति घातक हैं. और आज कल तो एक नया आया है पेपर वाला जो भूल कर भी इस्तेमाल मत कीजिये, वो एक सेकंड में इतना ज़हर हवा में घोल देता है के अच्छे भले आदमी को दमे का दौरा आ सकता है उस से.

इसका धुआं कैंसर का कारण भी बन सकता है, अनेको डॉक्टरों ने भी अभी तो इसको खतरनाक माना है तो आप क्यों इस्तेमाल कर रहे हो.

और ध्यान दीजिये, इन उपरोक्त चीजों से निकलने वाला धुआं मच्छर तो भगाएगा ही साथ ही साथ आपकी सांस की बीमारियाँ भी दूर करेगा.

आपको इसके घरेलु इस्तेमाल बताते हैं जो के बेहद साधारण हैं.

मच्छर दानी – मच्छर दानी बहुत बढ़िया विकल्प है मच्छर से मुक्ति पाने का, आप अपने बेड के साइज़ की मच्छर दानी ले आइये और इसको अपने बेड पर लगा लीजिये. इस से मच्छर नहीं आयेंगे.

गौ मूत्र और तुलसी – देसी गाय का गौ मूत्र आपको किसी भी गौ शाला से मिल जायेगा. या आज कल तो बाबा रामदेव और ऐसी अनेक कंपनियां भी देती हैं तो गौ मूत्र ले आइये इसमें बराबर मात्रा में तुलसी का अर्क मिला लीजिये और मच्छर भगाने वाले Liquid में से ये ज़हर निकाल कर इसको डाल दीजिये. इस से घर का वातावरण भी शुद्ध होगा और मच्छर भी भागेंगे.

नीम तेल और कपूर – नीम के तेल में कपूर मिला कर इस को आल आउट वाले लिक्विड की जगह लगा दीजिये, यह ग़ज़ब का रिजल्ट देगा. एक भी मच्छर नहीं आएगा.

पंचगव्य उत्पाद – आज कल गौशाला में पंच गव्य उत्पाद में मच्छर भगाने वाली Coil भी आती है, जो सेहत के लिए अति लाभप्रद है, तो आप उसको भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

गेंदे का पौधा – गेंदे का पौधा जहाँ पर लगा होता है वहां मच्छर बहुत कम आते हैं, इसलिए अगर हो सके तो अपने घर के चारों और गेंदे के पौधे लगाइए.

मलेरिया इत्यादि बुखारों के लिए हमारी वैज्ञानिक परंपरा

इसके अलावा हमारे पूर्वजों ने भी ये मौसमी बुखारों से लड़ने के लिए एक प्रथा बनायीं थी, वो थी खीर पूड़ी खाने की. हम सब जानते है की मच्छर काटने से मलेरिया होता है वर्ष मे कम से कम 700-800 बार तो मच्छर काटते ही होंगे अर्थात 70 वर्ष की आयु तक पहुंचते-पहुंचतेलाख बार मच्छर काट लेते होंगे । लेकिन अधिकांश लोगो को जीवनभर में एक दो बार ही मलेरिया होता हैसारांश यह है की मच्छर के काटने से मलेरिया होता है यह 1% ही सही है ।
शरद में ही पितृ पक्ष (श्राद्ध) आता है पितरों का मुख्य भोजन है खीर । इस दौरान 5-7 बार खीर खाना हो जाता है इसके बाद शरद पुर्णिमा को रातभर चाँदनी के नीचे चाँदी के पात्र में राखी खीर सुबह खाई जाती है (चाँदी का पात्र न हो तो चाँदी का चम्मच खीर मे डाल दे , लेकिन बर्तन मिट्टी या पीतल का हो, क्योंकि स्टील जहर और एल्यूमिनियम, प्लास्टिक, चीनी मिट्टी महा-जहर है) . यह खीर विशेष ठंडक पहुंचाती है । गाय के दूध की हो तो अतिउत्तम, विशेष गुणकारी (आयुर्वेद मे घी से अर्थात गौ घी और दूध गौ का) इससे मलेरिया होने की संभावना नहीं के बराबर हो जाती है

ध्यान रहे : इस ऋतु में बनाई खीर में केसर और मेंवों का प्रयोग न करे । ये गर्म प्रवृत्ति के होने से पित्त बढ़ा सकते है. सिर्फ इलायची डाले.

अगर आपको हमारे द्वारा दी गयी जानकारी अच्छी लगी तो हो शेयर ज़रूर करें. और अपने सुझाव भी हमको दे सकते हैं.

इस पोस्ट के लिए हम विशेषकर स्वर्गीय श्री राजीव दीक्षित जी का धन्यवाद देना चाहेंगे. Rajiv dixit Ayurveda

One comment

  1. पारसमल

    बहुत ही अच्छी जानकारी हैं
    आपका धन्यवाद

Leave a Reply

Your email address will not be published.

DMCA.com Protection Status