Friday , 23 October 2020
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त्रिफला जो आयुर्वेद में शरीर को कायाकल्प करने वाली ओषधि है

त्रिफला जो आयुर्वेद में शरीर को कायाकल्प करने वाली ओषधि है

परिचय –

हरड ,बेहडा तथा आंवला फल के समभाग मिश्रण को त्रिफला कहते है ,त्रिफला को आयुर्वेद में रसायन माना गया है

इसके विधिपूर्वक सेवन से रोगों का नाश होता है तथा शरीर में बल की व्रद्धि होती है .

त्रिफला के उपयोगी गुण –

  • त्रिफला कफ ,पित ,प्रमेह तथा कुष्ठ को हरने वाला ,दस्तावर,नेत्रों को हितकारी ,अग्नि प्रदीप्त करने वाला

रुचिवर्धक एंव विषमज्वरनाशक है .

  • 2.5 ग्राम त्रिफला चूर्ण में 125 मिली लोह भस्म मिलाकर प्रातः सांय सेवन करने से बाल झड़ना बंद होते है.
  • एक चम्मच त्रिफला चूर्ण को रात्रि को ठंडे पानी में भिगोकर प्रातः उस जल से नेत्रों को धोने से नेत्र रोगों

में लाभ होता है

  • पितजनित गुल्म में द्राक्षा एंव हरड का 1-2 चम्मच स्वरस गुड मिलाकर पीना अथवा त्रिफला चूर्ण की

3.5 ग्राम मात्रा को खांड में मिलाकर दिन में 3 बार खाना चाहियें .

  • त्रिफला,दाड़िम , राजादन ये सब वायुनाशक ,मुत्रदोश को मिटाने वाले है ,ह्रदय के लिए पिपसानाश्क है

एंव रूचि उत्पन करने वाले है .

  • रात्रि में सोते समय एक चम्मच त्रिफला चूर्ण का सेवन गुनगुने जल के साथ करने से कब्ज मिटती है .
  • त्रिफला का क्वाथ बनाकर 20 मिली मात्रा में पिने से विषम ज्वर का शमन होता है .
  • आधा चम्मच त्रिफला चूर्ण को प्रातः  ,दोपहर व सांय जल के साथ सेवन करने से अम्लपित में लाभ होता है .
  • 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण को रात्रि में 200 मिली पानी मे भिगोकर रखे ,प्रातः गर्म करे आधा शेष रहने पर

छान ले ,इसमें  2 चम्मच शहद मिलाकर सेवन करे ,कुछ दिनों में ही इसके सेवन से कई किलो वजन कम हो जाता है

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