Monday , 16 July 2018
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यवक्षार बनाने की विधि. Yavkshar An Ayurvdic Medicine

यवक्षार बनाने की विधि. Yavkshar An Ayurvdic Medicine

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यवक्षार या जौ का क्षार हल्के मटमैले रंग का होता है . यह बहुत सी बीमारियों के लिए रामबाण है . इसे बनाना बहुत आसान है . जौ की राख को पानी में खूब उबालने से यवक्षार बनता है यह किडनी के रोगियों के लिए अति उत्तम दवा का काम करता है.

यवक्षार दो प्रकार से बनाया जा सकता है.

यवक्षार बनाने की पहली विधि.

आधे पके हुए जौ के पौधों को उखाडकर उनके टुकड़े कर लें . इसको जलाकर राख बना लें . राख में पानी मिलाकर अच्छी तरह से हिलाएं. इसको 6-7 घंटे तक पड़ा रहने दें. बीच बीच में अच्छे से हिलाते रहें. अंत में जब पानी बिलकुल शांत हो  जाए तो फिर ऊपर के तिनके निकाल कर पानी को निथारकर फेंक दें . नीचे के बचे हुए सफ़ेद रंग के गाढे द्रव को धीमी आंच पर धीरे धीरे पकाएं . जब यह काफी गाढ़ा हो जाए तो इसे सुखा लें . यही मटमैला सा पाऊडर यवक्षार कहलाता है .

यवक्षार बनाने की दूसरी विधि.

इस विधि में जौ के पौधे की जगह जौ को इस्तेमाल किया जाता है. पहले जौ को जला कर इसकी राख बना लीजिये. राख में पानी मिलाकर अच्छी तरह से हिलाएं. 10-15 मिनट के लिए रख दें . फिर से हिलाएं और  10-15 मिनट तक रख दें . ऐसा चार पांच बार करें. फिर पानी को निथारकर फेंक दें . नीचे के बचे हुए सफ़ेद रंग के गाढे द्रव को धीमी आंच पर धीरे धीरे पकाएं . जब यह काफी गाढ़ा हो जाए तो इसे सुखा लें . यही मटमैला सा पाऊडर यवक्षार कहलाता है.

इसकी 1-2 ग्राम की मात्रा शहद के साथ  लेने से खांसी और अस्थमा जैसी बीमारियों से छुटकारा मिलता है. पानी के साथ लेने पर पथरी और किडनी की समस्याओं से राहत मिलती है. भूख कम लगती हो तो आधा ग्राम यवक्षार रोटी में रखकर खाएं. यह कई तरह की दवाओं में प्रयोग में लाया जाता है.

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