Wednesday , 18 July 2018
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नीलगिरी का तेल ( Eucalyptus Oil ) करे फेफड़ो की सफाई पहले दिन से ….

नीलगिरी का तेल ( Eucalyptus Oil ) नीलगिरी के पत्ते से आसुत तेल का सामान्य नाम है, जो कि ऑस्ट्रेलिया के पौधों के परिवार मर्टेसेई मूल के एक वंश और दुनिया भर में खेती की जाती है।नीलगिरी के तेल में व्यापक अनुप्रयोग का एक इतिहास है, जैसे दवा , एंटीसेप्टिक , विकर्षक , स्वादिष्ट बनाने का मसाला , खुशबू और औद्योगिक उपयोग।चयनित नीलगिरी प्रजातियों की पत्तियों को नीलगिरी तेल निकालने के लिए भाप भरी हुई है

रिसर्च के अनुसार ज्यादातर ह्रदय संबंधी और सांस से सम्बंधित समस्याएं इस होने वाले प्रदूषण की वजह से होती हैं। ये आपके फेफड़े पर बहुत बुरा असर डालते हैं और आपके श्वशन तंत्र की कोशिकाओं को ख़त्म कर देते हैं, जिसकी वजह से आपके फेफड़े अच्छी तरह से अपना काम नहीं कर पाते हैं।

जैसा कि हम सब जानते हैं कि फेफड़े मनुष्य के शरीर का एक अहम अंग होते हैं और इसका काम बाधित होने से आपके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए यह बहुत जरुरी है कि अपने फेफड़े को साफ़ सुथरा रखने के लिए इस पप्रदूषण से बचने के बारे में गंभीरता से सोंचे। आज के इस प्रदूषण भरी लाइफ में यूकेलिप्टस का तेल फेफड़ों को साफ़ रखने के लिए बहुत उपयोगी है तो आइये हम इस तेल से होने वाले फायदों के बारे में जानते हैं।
यूकेलिप्टस का तेल अपने औषधीय गुणों की वजह से जाना जाता है

नीलगिरी का तेल ( Eucalyptus Oil ) अपने औषधीय गुणों की वजह से जाना जाता है

सदियों से नीलगिरी का तेल ( Eucalyptus Oil ) अपने औषधीय गुणों की वजह से लोगों के बीच इस्तेमाल होता आया है। हालांकि यह तेल ऐरोमेटिक नहीं होता है फिर भी इसमें से दूसरे ऐरोमेटिक तेलों के जैसी खुशबू आती है। इसमें एंटी-इन्फ्लामेट्री, एंटी-स्पाज्मोडिक, एंटी-सेप्टिक, और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो इस तेल बहुत ही ख़ास बनाते हैं। यह तेल कई तरह से फायदेमंद होता है।

• एंटी-सेप्टिक गुण होने की वजह से यह तेल जले, कटे और कई तरह के घावों को आसानी से भर देता है। यह त्वचा में होने वाले कई तरह के इन्फेक्शन से भी बचाता है।

• अगर आप मानसिक रूप से थक चुके हैं या कोई तनाव है या फिर आप बहुत ज्यादा चिंतित हैं तो नीलगिरी का तेल ( Eucalyptus Oil ) आपके स्वास्थ्य के लिए हर तरह से आरामदायक है।

• नीलगिरी का तेल ( Eucalyptus Oil ) आपके मांसपेशियों के दर्द के लिए बहुत ही अच्छा होता है। इस तेल का मसाज करने से बहुत जल्दी आराम मिलता है।

• आप दांतों में होने वाली कैविटी, प्लेक्स या फिर और भी कई तरह के इन्फेक्शन को इस तेल से आसानी से दूर कर सकते हैं क्योंकि इसमें वैसे ही जर्मीसिडल गुण होते हैं जोकि आपके माउथवाश और टूथपेस्ट में होते हैं।

• यह आपके त्वचा के लिए एक नेचुरल बग की तरह काम करता है और दुसरे केमिकल प्रोडक्ट की तुलना में यह स्किन के इन्फेक्शन को दूर करने में ज्यादा असरदार होता है।

• नीलगिरी का तेल ( Eucalyptus Oil ) आपकी आंतो में मौजूद कीटाणुओं को दूर करने साथ आपकी त्वचा की भी अच्छे से देखभाल करता है।

• नीलगिरी का तेल ( Eucalyptus Oil ) बुखार, डायबिटीज और टीबी जैसी बीमारियों को भी ठीक करने के लिए बहुत ही सहायक होता है। इतने सारे लाभदायक गुणों के अलावा यह तेल सांस संबंधी समस्याओं को भी ठीक करने में उपयोगी है। सर्दी, खांसी, आस्थमा और ब्रोंकाइटीस से लेकर यह आपके फेफड़ों को भी साफ करने में कारगर है।

फेफड़ों के लिये नीलगिरी का तेल ( Eucalyptus Oil ) का कैसे इस्तेमाल करें:

नीलगिरी का तेल ( Eucalyptus Oil ) में प्राकृतिक औषधीय गुण होते हैं जिसकी वजह से यह वायु प्रदूषण की वजह से फेफड़ों में होने वाली दिक्कतों को दूर करने में मददगार होता है। स्वस्थ और एक्टिव लाइफस्टाइल के लिए यह जरुरी है कि आप अपने फेफड़े को ठीक से रखें। यहाँ हम आपको नीलगिरी का तेल ( Eucalyptus Oil ) कैसे इस्तेमाल करें, उसका तरीका बताने जा रहें हैं।

STEPS:
स्टेप 1: एक बड़े कटोरे में पानी को लेकर उसे गर्म करें।
स्टेप 2: उस गर्म पानी में यूकेलिप्टस के तेल की 4 से 5 बूंदे डालें।
स्टेप 3: फिर हफ्ते में दो या तीन बार उसका गर्म पानी का भाप लें।
ऐसा करने से आपके फेफड़ों से टॉक्सिक पदार्थ और म्यूकस बाहर निकल जायेगा और आपका फेफड़ा ठीक तरह से काम करेगा। इसके साथ ही इसका भाप लेने से आपको फ्लू, ब्रोंकाइटीस और सर्दी के अलावा सांस संबधी और भी दिक्कतों से आराम मिलेगा।

औषधीय और एंटीसेप्टिक

सिनेलाइन आधारित तेल का उपयोग इन्फ्लूएंजा और सर्दी के लक्षणों को दूर करने के लिए दवाइयों की तैयारी में घटक के रूप में किया जाता है , जैसे खांसी मिठाई,लोजेंग , मलहम और इन्हेलंट जैसे उत्पादों में।नीलगिरी के तेल में श्वसन तंत्र में रोगजनक बैक्टीरिया पर जीवाणुरोधी प्रभाव हो सकता है। इन्हेल्ड नीलगिरी तेल भाप ब्रोन्काइटिस के लिए एक डेंगेंटास्टेंट और उपचार है। सिनीओल एंटी-इन्फ्लैमेटरी साइटोकाइन निषेध के जरिए एयरवे बलगम हाइपरस्रीटीशन और अस्थमा को नियंत्रित कर सकता है हालांकि इसमें पर्याप्त सबूत नहीं हैं।पूर्व नैदानिक ​​परिणाम यह भी दिखाते हैं कि नीलगिरी के तेल मानव मोनोसाइट प्राप्त व्युत्पन्न मैक्रोफेज की फागोसाइटेटिक क्षमता पर प्रभाव से सहज सेल-मध्यस्थता प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को उत्तेजित करता है ।

नीलगिरी के तेल, नीलगिरी और अल्फा-टेरपिनोल के मुख्य रासायनिक घटक, आवश्यक तेल को सुखदायक, ठंडा वाष्प प्रदान करते हैं।>यह नीलगिरी के तेल के लिए उपयुक्त तेल बनाता है

प्रारंभिक शोध से पता चला है कि नीलगिरी के तेल में भड़काऊ और एनाल्जेसिक गुण होते हैं जो कि एक टॉपिक रूप से लागू सिलेंडर संघटक के रूप में होते हैं।

नीलगिरी का उपयोग दांतों की देखभाल में रोगाणुरोधी गुणों के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता उत्पादों में भी किया जाता है और साबुन ।यह संक्रमण को रोकने के लिए घावों पर भी लागू किया जा सकता है

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