Monday , 18 November 2019
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पुरुष रोगो के लिए कुछ आयुर्वेदिक सरल व अनुभूत नुस्खे -अवश्य आजमाएं

पुरुष रोगो के लिए कुछ आयुर्वेदिक सरल व अनुभूत नुस्खे -अवश्य आजमाएं

पुरूषों में अनेक ऐसे रोग होते हे जो उन्हें निर्लज और सन्तानहीन ,कमजोरी आदि से ग्रसित कर देते है

इनका  जितनी जल्दी हो सके इलाज अवश्य करवाना चाहिए .

आज हम आपको इस पोस्ट में ऐसे ही नुस्खे बताने जा रहे हे जो पुरुष रोगों में बहुत लाभकारी और शीघ्र

लाभदायक हे

1.- स्वप्न दोष –

विधि —- 6 ग्राम चिरोंजी को कूट करके आधा किलो दूध में ओटाये आधा शेष रहने पर रोगी को सोते समय

पिलाये.इसके आठ दिन के सेवन से रोग नष्ट हो जाता है

2 .- स्वप्न दोष -2

विधि —- एक सफेद कोडी जिसमे थोडा सा भी  दूसरा रंग ना  हो आवश्यकतानुसार ले उसको पुरानी रुई पर लपेटकर

आग में रखकर राख कर ले .12 ग्राम राख की 7 पुडिया बना ले .प्रतिदिन प्रातःकाल एक पुडिया मक्खन में रख

दिया करे .घी के साथ गेंहू की रोटी खाने को दी जाये .अन्य सब चीजों से परहेज करे .यह नुस्खा बहुत ही

सरल और शानदार है .

3.- विर्याल्पता ,वीर्य की कमी –

विधि —- आवश्यकतानुसार चने लेकर गोखरू के रस से इतना तर करे की रस 2 अंगुल ऊपर आ जाये और छाया

में रख ले .एक ही रात में सारा पानी चनों में समा जायेगा .अब छाया में सुखाकर बारीक़ पिस ले .इसके बराबर

खांड मिलाकर सावधानी से रखे .प्रतिदिन प्रातःकाल 12 ग्राम की मात्रा दूध के साथ दिया करे .10 से 15 दिनों में

पूर्ण लाभ हो जायेगा .अनुभूत नुस्खे है

4.- विर्यल्पता -2

विधि —- आवश्यकतानुसार अस्वगंध लेकर बारीक़ चूर्ण बनाकर इसमें बराबर मात्रा में खांड मिलाकर रख ले

इसमें से प्रतिदिन 10 ग्राम की मात्रा गुनगुने दूध के साथ सेवन कराए .वीर्यवर्धक होने के साथ शरीर को पुष्ट

करता है .

5 .- विर्यल्पता -3

विधि —- 3 ग्राम दारचीनी का चूर्ण रात को सोते समय थोड़े गर्म -गर्म  दूध के साथ दिया करे .कुछ दिन इसके

सेवन से पुराने से पुराना रोग दूर होकर वीर्य में बहुत वर्धि करता है .

6 .- इन्द्रीय लेप –

विधि —- आवश्यकतानुसार लोंग लेकर खरल में डालकर सुरमे के समान बारीक़ बना ले और रख ले .रात को

एक ग्राम ओषधि शहद में मिलाकर लेप बना ले .सुपारी और सीवन को छोडकर शेष इन्द्रीय पर रात्रि में लेप करे .

ऊपर धतूरा या एरंड का पत्ता बांधकर हल्की सी पट्टी बांध ले .प्रातःखोलकर अंगो को गर्म पानी से साफ किया करे .

यदि इसके प्रयोग से अंग पर दाने प्रकट हो तो उसी समय इस ओषधि को छोडकर जलाया हुआ घी लगाया करे

जब ये समाप्त हो जाये तो पुनः यही किर्या करे .दाने पैदा होने पर पुनः बंद कर दे .इसी प्रकार दो तीन बार करने से

गुप्तांग के सब दोष दूर हो जायेंगे .

7 .- लेप -2

विधि —- दारचीनी और अकरकरा 3-3 ग्राम .दोनों को खूब बारीक़ करके १७ ग्राम मधु में मिलाकर रख ले .

सोते समय सुपारी व सीवन को छोडकर सोते समय लेप करे .यदि पित की तरह दाने निकल आये तो जलाया

हुआ घी लगाते रहे .दाने लुप्त होने पर पुनः इसी प्रकिया को आरम्भ कर दे .तीन बार के प्रयोग से बहुत

अधिक लाभ होगा .

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