Monday , 19 August 2019
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एग्जिमा Eczema

एग्जिमा
५० ग्राम सरसो का तेल लेकर लोहे की कड़ाही में चढ़ाकर आग पर रख दे। जब तेल खूब उबलने लगे तब इसमें ५० ग्राम नीम की कोमल कोपले ( नई पत्तियां ) डाल दे। कोपलों के काले पड़ते ही कड़ाही को तुरंत नीचे उतार ले अन्यथा तेल में आग लगकर तेल जल सकता है। ठंडा होने पर तेल को छानकर बोतल में भर ले। दिन मे चार बार एग्जिमा पर लगाएं, कुछ ही दिनों में सग्जिमा नष्ट हो जायेगा। एक वर्ष तक लगते रहे तो फिर यह रोग दोबारा कभी नही होगा।

सहायक उपचार
चना चुन को नूं बिन, चौसठ डॉन जो खाये।
दाद खाज और सेहुआ, जरा मूर सो जाय।

विकल्प
चार ग्राम चिरायता और चार ग्राम कुटकी लेकर शीशे या चीनी के पात्र में १२५ ग्राम पानी डालकर रात को उसमे भिगो दे और ऊपर से ढंक कर रख दे। प्रात: काल रात को भिगोया हुया चिरायता और कुटकी का पानी निथार कर कपड़े से छानकर पि ले और पीने के बाद ३-४ घंटे तक कुछ नही खाये और उसी समय अगले दिन के लिए उसी पात्र में १२५ ग्राम पानी और डाल दे। इस प्रकार चार दिन वही चिरायता और कुटकी काम देंगे। ततपश्चात उनको फेंककर नया चार-चार ग्राम चिरयता और कुटकी डालकर भिगोएं और चार-चार दिन के बाद बदलते रहे। यह पानी ( कड़वी चाय ) लगातार दो -चार सप्ताह पीने से एग्जिमा, फोड़ो-फुंसी आदि चरम नष्ट होते है, मुहांसे निकलना बंद होते है और रक्त साफ़ होता है।

विशेष
१. एग्जिमा में इस कड़वे पानी को पीने के आलावा इस पानी से एग्जिमा वाले स्थान को धोया करें।
२. इस प्रयोग से एग्जिमा और रक्तदोष के अतिरिक्त हड्डी की टी.बी , पेट के रोग, अपरस और कैंसर आदि बहुत सी बीमारियां दूर होती है। इस कठिन बिमारियों में आवश्यकता अनुसार एक दो महीने तक चिरायता और कुटकी का पानी पीना चाहिए। रोजाना यह पानी न पी सकने वाले यदि इसे सप्ताह में एक या दो चम्मच की मात्रा में यह पानी पिलाना चाहिए। बच्चो के लिए कड़वाहट कम करने क लिए इस कड़वी दवा क पिलाने के बाद ऊपर से एक-दो घुट सादा पानी पीला सकते है।
३. इस प्रयोग से सोरियसिस जैसे कठिन चर्मरोग दूर होता है। इस रोग में शरीरी की किसी -किसी जगह का चमड़ा लाल होकर फूल उठता है और सुखी और कड़ी छाल निकल आती है जो मछली के बाहरी चर्म जैसी दिखाई देती है। जहा-जहा चकते ( पैचेज ) होते है वहा पर बाल नही होते परन्तु ज्यो-ज्यो पैचेज ठीक होते है, वहा-वहा नए बाल उगने शुरू हो जाते है जो बीमारी के ठीक होने के लक्षण है। चिरायता और कुटकी के लगातार एक-दो महीने के प्रयोग से यह लाइलाज बीमारी भी ठीक हो जाती है।
४. हर प्रकार के ज्वर में, विशेषकर बसे हए ज्वर में यह प्रयोग अत्यंत लाभकारी है।
परहेज
खटाई ( खासकर इमली, अमचूर की खटाई ) भारी, तले मिर्ची मसालेदार तथा नशीले पदार्थो का सेवन न करे। नमक का सेवन भी कम से कम करें। इसी नमक का परहेज करना सम्भव न हो तो साधारण नमक के स्थान पर सेंधा नमक का प्रयोग करे क्योंकि इस नमक परिवर्तन से भी कई साधारण चर्म रोगो से मुक्ति मिलना सम्भव है।

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