एनीमिया (पांडू रोग) की 100 प्रतिशत कारगर आयुर्वेदिक उपचार
परिचय –
रक्ताल्पता या एनीमिया को ही आयुर्वेद में पांडू रोग कहा गया है इस रोग में रक्त की लाल रक्त कणिकाओ में
कमी होने के साथ- साथ रुधिर वर्णिका (हिमोग्लोबिन) का स्तर भी गिर जाता है .
इसके अतिरिक्त चोट लगने पर अत्यधिक रक्तस्राव ,मासिक धर्म अथवा प्रसव के समय अधिक रक्त स्राव आदि
अनेक कारणों से पांडू रोग हो सकता है .
लक्षण –
पांडू रोग होने पर शारीरिक शक्ति घटने के साथ त्वचा का रंग सफेद हो जाता है ,ह्रदय अधिक धडकता है और
पसीना अधिक आता है ,थोडा सा चलने फिरने अथवा परिश्रम करने पर रोगी बहुत अधिक थकान अनुभव करता
है ,यदि कुछ दिनों तक इसकी उपचार न कराई जाये तो ,अग्निमंध ,कटीशूल ,पांवो में दर्द ,आँखों के निचे शोथ के चिन्ह,
स्वभाव में चिडचिडापन और बार-बार थूक आने के लक्षण प्रतीत होते है .
उपचार –
आयुर्वेद में नवायस लोह को इस रोग की सर्वश्रेष्ठ ओषधि बताया गया हे
Only Ayurved आयुर्वेद जीवन जीने की कला हैं, हम बिना दवा के सिर्फ अपने खान पान और जीवन शैली में थोड़ा बदलाव कर के आरोग्य प्राप्त कर सकते हैं।

















