Wednesday , 12 December 2018
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निम्बू एक फायदे अनेक जानिए कैसे

निम्बू ( Lemon ) एक फायदे अनेक जानिए कैसे

निम्बू एक बहुत ही फायदेमंद और गुणों वाला फल है। इसका प्रयोग हर मौसम में किया जा सकता है। निम्बू विषेस रूप से हमारे शरीर में एकत्रित कीटाणुओं को शरीर से निकाल बहार करता है। जैसे की रोज एक सेब खाने से हम डॉकटरो से बचे रह सकते है वैसे ही अगर रोज एक निम्बू के रस को लिया जाएँ तो बी हम डॉकटरो से बचे रह सकते है। आएं जाने निम्बू के सेवन की अलग-अलग विधि और उनके फायदे ।

1.उबलते हुए एक गिलास पानी में एक निम्बू निचोड़कर पीते रहने से शरीर के अंग-अंग में नई शक्ति अनुभव होने लगती है। नेत्रज्योति तेज हो जाती है। मानसिक दुर्लबता, सिरदर्द, पुट्ठों में झटके लगने बंद हो जाते है। अधिक काम से थकावट नही आती। निम्बू पानी बिना शककर और नमक मिलाए छोटे-छोटे घूँटों में पीना चाहिए। चाहे तो शहद के दो चम्मच मिला सकते है। शककर और नमक का अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। असाध्य रोगों में लम्बे समय तक उपवास रखने के बाद खाना नही दिया जाता है, परन्तु पानी में निम्बू का रस मिलाकर बार-बार पीते रहने से रोगी के दूषित पदार्थ निकल जाते है और उसके रोग दूर होते है। इसके नियमित सेवन से स्फूर्ति बनी रहती है।

2. 40 ग्राम किशमिश, 6 मुनक्के, 6 बादाम, 6 पिस्ते रात को आधा किलो पानी में कांच के बर्तन में भिगो दें। प्रात: पीसकर, छानकर एक चम्मच शहद मिलाकर और एक निम्बू निचोड़ कर भूखे पेट पियें। इससे मानसिक व शरीरिक कमजोरी और थकान दूर होती है। यह इन्द्रियों की शक्ति के लिए भी लाभदायक है।

3. एक कांच के गिलास में तीन हिस्से अजवाइन भर दें। इसे निम्बू के रस से भर कर मुंह पर कपड़ा डालकर धुप में रख दें। जब निम्बू का रस सुख जाये तो पूण: इसे निम्बू के रस से भर दें और धुप में ही पड़ा रहने दें। इस प्रकार सात बार निम्बू का रस डालकर अजवाइन सुखाएं। इस सुखाई हुई अजवाइन को अंत में कांच की बोतल में भर लें। इसका चौथाई चम्मच एक बार नित्य पानी में फंकी लें। इससे शरीर में बल बढ़ता है तथा योन-शक्ति बढ़ती है। इसे सेवन करते समय घी, दूध भी सेवन करते रहना चाहिए।

4. एक कप उबला हुआ पानी, एक चुटकी सेंधा नमक, एक चुटकी काला नमक, एक चम्मच चीनी, दस बून्द निम्बू का रस, भुना-पिसा हुआ चौथाई चम्मच जीरा सबको मिलाकर पियें। यह पेय बहुत स्वादिष्ट, पाचन शक्ति बढ़ाने वाला है। इसे चाय की जगह पियें तो अच्छा है। ये मिलाई जाने वाली चींजे स्वाद के अनुसार और परहेज के अनुसार घटा-बड़ा सकते है। यह बीमारी की अवस्था में भी ले सकते है। यह तीन बार नित्य पिया करें।

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