Tuesday , 10 December 2019
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मस्तिषिक शक्तिवर्षक प्रयोग

मस्तिषिक शक्तिवर्षक प्रयोग

To Increase Brain Power 

यह बात तो हम सब लोग जानते है, की आज की पीढ़ी के लोगो की दिमागी ताकत काफी कम है, पहले के लोगो के मुकाबले जैसा के यादाश्त कम होना, जल्दी ही मानसिक थकावट महसूस करना आदि। इसलिए आज हम आपके लिए आयुर्वेदिक घरेलू और आसान सा नुस्खा ले के आएं है, जिसके इस्तमाल से आप मस्तिषिक सबंधी समस्याओं से निपट सकते है और अपने आप को मानसिक तोर पे बलवान बना सकते है।  आएं जाने मस्तिषिक शक्तिवर्धक प्रयोग के बारे में।

सात बादाम की गिरियां, सात दाने काली मिर्च, दो इलायची, तीन ग्राम सौंफ बड़ी ( गर्मियों के मौसम में सौंफ के स्थान पर धनिया शुष्क दाना ) रात के समय कांच या चीनी के बर्तन में भिगो दे। प्रात: काल व्यायाम के बाद, बादाम की घिरियों व इलायची के छिलके उत्तर लें और काली मिर्च और सौंफ के साथ सील पर रगड़ लें। जब खूब बारीक़ हो जाय तो 250 ग्राम पानी मिलाकर कपड़े में छान लें। फिर दो चमच शहद या मिश्री मिलाकर धीरे-धीरे पियें। यह बादाम का दूध मस्तिष्क की दुर्बलता मिटने तथा आँखों की ज्योति, शरीरिक बल एवं स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए अव्दितीय है।

विशेष

1. घर्मियो के मौसम में धनिया शुष्क दाना ( सौंफ के स्थान पर ) तीन ग्राम, ठंडा जल और मिश्री का प्रयोग उत्तम रहेगा और पित्त प्रकृति वालों के लिए यह अधिक अनुकूल रहेगा।2. शीतकाल में सदैव सौंफ, गुनगुने जल और शहद का प्रयोग उत्तम रहेगा और वात प्रकृति वालों के लिए यह अधिक अनुकूल रहेगा ।

3. शरीरिक प्रकृति के अनुसार उपरोक्त वस्तुओं में घटा-बढ़ी की जा सकती है पर बादाम सदैव रहेंगे। दो-दो बादाम गिरियां प्रति सप्ताह बढ़ाकर पंद्रह बादाम तक बढ़ाए जा सकते है और तदनुसार अन्य वस्तुओं में वृध्दि की जा सकती है।

4. डा. केलाग के अनुसार जिन बालको को माँ का दूध अनुकूल नही आता हो या अपच की शिकायत रहती हो तो उन्हें बादाम का दूध देना चाहिए। डा. केलाग ने सात वर्ष तक बादाम से बने दूध पर ही निर्वाह किया। प्रो. राममूर्ति बादाम के दूध पीने की प्रेरणा देते थे। उनके अनुसार दुनिया में बादाम जैसी पौष्टिक अन्य कोई वास्तु नही है। हकीम अजमल खा के अनुसार मानसिक कार्य करने वालों, विधियार्थियों और परीक्षाथियों के लिए बादाम, फल और दूध से बढ़कर भोजन कोई अन्य नही है।

विकल्प

सौंफ और मिश्री का संभाग चूर्ण मिलाकर दो चम्मच की मात्रा से दोनों समय भोजन के बाद लेते रहने से मस्तिष्क की कमजोरी दूर होती है। मास-दो मास लें।

विशेष

1. मस्तिष्क सम्बन्धी रोगों में सौंफ अत्यन्त गुणकारी है। यह मस्तिष्क की कमजोरी के अतिरिक्त दुर्बलता, चक्क्र एवं पाचन शक्ति के लिए लाभकारी है। इसके निरंतर सेवन से द्रष्टि कमजोर नही होती तथा मोतियाबिंद रुक जाता है।

2. उलटी, पोएस, जी मिचलना, पित्तविकार, जलन, उदरशूल, अग्निमांध, प्रवाहिका, मरोड़ आदि व्याधियों में लाभदायक है।

3. इसके अतिरिक्त सोंफ रक्त व वर्ण को साफ़ करने वाली एवं चर्मरोग नाशक है। प्रतिदिन दस ग्राम सोंफ सुबह-शाम बिना मीठा मिलाये वैसे ही चबा-चबाकर निरंतर कुछ समय तक सेवन करने से रक्त साफ़ होता है तथा त्वचा का रंग उजला होने लगता है।

4. हाथ पांव में जलन की शिकायत होने पर सोंफ के साथ बराबर मात्रा में धनिया कूट-छानकर मिश्री या चीनी मिलाकर भोजन के बाद पानी के साथ छ: ग्राम की मात्रा लेने से कुछ ही दिनों में यह शिकायत जाती रहती है।

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